{"_id":"6a4d5dad18f25f3c440c99b8","slug":"jammu-kashmir-news-rajouri-news-c-272-1-raj1001-107642-2026-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीजीएसबीयू के लिए सालाना अनुदान 37 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ किया जाए: पूर्व मंत्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीजीएसबीयू के लिए सालाना अनुदान 37 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ किया जाए: पूर्व मंत्री
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजोेरी। जम्मू-कश्मीर भाजपा के उपाध्यक्ष एवं पूर्व शिक्षा मंत्री चौधरी जुल्फकार अली ने बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय (बीजीएसबीयू) के लिए वार्षिक ग्रांट-इन-एड को मौजूदा 37 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि सीमित वित्तीय संसाधनों के बीच विश्वविद्यालय से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करना उचित नहीं है।
राजोेरी दौरे के दौरान विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रोफेसर जावेद इक़बाल से मुलाकात के बाद चौधरी जुल्फकार अली ने कहा कि बीजीएसबीयू पीर पंजाल क्षेत्र का प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान है, जिसने राजोेरी और पुंछ के हजारों विद्यार्थियों, विशेषकर सीमावर्ती, दूरदराज़ और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर क्षेत्र की शैक्षिक तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय को उसकी बढ़ती जरूरतों और जिम्मेदारियों के अनुरूप वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई, संचालन खर्च, शिक्षकों की कमी, आधारभूत ढांचे के विस्तार, तकनीकी उन्नयन तथा नए शैक्षणिक कार्यक्रमों के कारण विश्वविद्यालय पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मौजूदा अनुदान पर्याप्त नहीं है और इससे विश्वविद्यालय के विकास के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
विज्ञापन
पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार को विद्यार्थियों, शिक्षकों और पूरे पीर पंजाल क्षेत्र के उच्च शिक्षा क्षेत्र के हित में बीजीएसबीयू की वार्षिक ग्रांट-इन-एड को बढ़ाकर 50 करोड़ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को मजबूत करना खर्च नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के भविष्य में निवेश है।
चौधरी जुल्फकार अली ने वर्ष 2019 से लंबित जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड के अनुदान को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों तक अनुदान जारी न होना दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित है। उन्होंने मांग की कि लंबित वक्फ बोर्ड अनुदान को बिना किसी और देरी के तत्काल जारी किया जाए, क्योंकि शिक्षा के लिए निर्धारित धनराशि नौकरशाही की देरी या प्रशासनिक उदासीनता की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक वित्तीय सहायता रोके जाने से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक योजनाओं, आधारभूत संरचना के विकास, शोध गतिविधियों और छात्र कल्याण कार्यक्रमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसका सीधा असर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
चौधरी जुल्फकार अली ने उपराज्यपाल, केंद्र शासित प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि बीजीएसबीयू के लिए बढ़ा हुआ वार्षिक अनुदान तथा वर्ष 2019 से लंबित वक्फ बोर्ड अनुदान दोनों को जल्द से जल्द जारी किया जाए।
उन्होंने कहा, पीर पंजाल के युवाओं को उपेक्षा नहीं, अवसर मिलने चाहिए। बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय को मजबूत करना क्षेत्र के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है। सरकारों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाकर अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि बीजीएसबीयू केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि सीमावर्ती जिलों के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। इसलिए सभी पक्षों को राजनीति से ऊपर उठकर इसके उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।
विज्ञापन
राजोेरी दौरे के दौरान विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रोफेसर जावेद इक़बाल से मुलाकात के बाद चौधरी जुल्फकार अली ने कहा कि बीजीएसबीयू पीर पंजाल क्षेत्र का प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान है, जिसने राजोेरी और पुंछ के हजारों विद्यार्थियों, विशेषकर सीमावर्ती, दूरदराज़ और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर क्षेत्र की शैक्षिक तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय को उसकी बढ़ती जरूरतों और जिम्मेदारियों के अनुरूप वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई, संचालन खर्च, शिक्षकों की कमी, आधारभूत ढांचे के विस्तार, तकनीकी उन्नयन तथा नए शैक्षणिक कार्यक्रमों के कारण विश्वविद्यालय पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मौजूदा अनुदान पर्याप्त नहीं है और इससे विश्वविद्यालय के विकास के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
विज्ञापन
पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार को विद्यार्थियों, शिक्षकों और पूरे पीर पंजाल क्षेत्र के उच्च शिक्षा क्षेत्र के हित में बीजीएसबीयू की वार्षिक ग्रांट-इन-एड को बढ़ाकर 50 करोड़ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को मजबूत करना खर्च नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के भविष्य में निवेश है।
चौधरी जुल्फकार अली ने वर्ष 2019 से लंबित जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड के अनुदान को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों तक अनुदान जारी न होना दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित है। उन्होंने मांग की कि लंबित वक्फ बोर्ड अनुदान को बिना किसी और देरी के तत्काल जारी किया जाए, क्योंकि शिक्षा के लिए निर्धारित धनराशि नौकरशाही की देरी या प्रशासनिक उदासीनता की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक वित्तीय सहायता रोके जाने से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक योजनाओं, आधारभूत संरचना के विकास, शोध गतिविधियों और छात्र कल्याण कार्यक्रमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसका सीधा असर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
चौधरी जुल्फकार अली ने उपराज्यपाल, केंद्र शासित प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि बीजीएसबीयू के लिए बढ़ा हुआ वार्षिक अनुदान तथा वर्ष 2019 से लंबित वक्फ बोर्ड अनुदान दोनों को जल्द से जल्द जारी किया जाए।
उन्होंने कहा, पीर पंजाल के युवाओं को उपेक्षा नहीं, अवसर मिलने चाहिए। बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय को मजबूत करना क्षेत्र के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है। सरकारों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाकर अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि बीजीएसबीयू केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि सीमावर्ती जिलों के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। इसलिए सभी पक्षों को राजनीति से ऊपर उठकर इसके उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।