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Rajouri News: थन्नामंडी की लाह वाली बावली का 5.78 करोड़ से होगा कायाकल्प
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-संरक्षण से प्रमुख हेरिटेज एवं पर्यटक स्थल के रूप में विकसित होगी ऐतिहासिक बावली
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। प्रदेश सरकार ने जिले के थन्नामंडी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक लाह वाली बावली के जीर्णोद्धार, कायाकल्प एवं संरक्षण के लिए 5.78 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इससे इस जल संरचना के संरक्षण के साथ ही इसे एक प्रमुख हेरिटेज एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की उम्मीद जगी है।
लाह वाली बावली एक पुरानी जल संरचना नहीं, बल्कि थन्नामंडी क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण विरासत मानी जाती है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक यह बावली आसपास के लोगों तथा इस पहाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले यात्रियों के लिए पानी का महत्वपूर्ण स्रोत रही है।
स्थानीय निवासी इमरान खान व दिलावर खान ने बताया कि थन्नामंडी क्षेत्र मुगल रोड और पीर पंजाल के रास्ते कश्मीर जाने वाला पुराना मार्ग है। इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों और सैन्य दलों के लिए जल स्रोतों का विशेष महत्व था। लाह वाली बावली इसी ऐतिहासिक परिवेश की निशानी है। पुराने समय की पत्थर की चिनाई और बावली की पारंपरिक संरचना इस क्षेत्र की वास्तुकला एवं जल संरक्षण की परंपरा को दर्शाती है। ऐसे में जीर्णोद्धार का उद्देश्य आधुनिक निर्माण के बजाय इसकी मूल ऐतिहासिक एवं स्थापत्य पहचान को बनाए रखना है। बावली को पर्यटन से जोड़ने की योजना 2013 में तत्कालीन सरकार ने भी घोषित की थी। तब 85 लाख की परियोजना रिपोर्ट तैयार कर 42 कनाल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था।
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डीसी ने जनवरी में किया था स्थल का निरीक्षणि
इस बावली के संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन भी सक्रिय रहा है। गत जनवरी में जिला विकास आयुक्त अभिषेक शर्मा ने निरीक्षण कर तैयार डीपीआर की समीक्षा की थी। संबंधित विभागों को निर्देश दिए थे कि बावली के संरक्षण में प्राकृतिक जल स्रोत को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। पत्थर की चिनाई का कार्य मूल स्वरूप को ध्यान में रखकर किया जाए। बावली के आसपास उचित सीमांकन, अतिक्रमण हटाने और फेंसिंग करने के भी निर्देश दिए थे। कपड़े धोने के लिए अलग स्थान, शौचालय सुविधा तथा बावली तक पहुंचने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और आम लोगों के लिए सुरक्षित एवं सुगम रास्ता विकसित करने पर जोर दिया था।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
प्रस्तावित परियोजना से ऐतिहासिक बावली और उससे जुड़े स्थापत्य तत्वों का संरक्षण किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इसे केवल संरक्षित स्मारक तक सीमित रखने के बजाय हेरिटेज टूरिज्म के एक आकर्षक केंद्र के रूप में विकसित करना है। बावली का विकास होने से थन्नामंडी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। इससे स्थानीय दुकानदारों, छोटे कारोबारियों, परिवहन सेवाओं और अन्य पर्यटन गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। प्रदेश सरकार ने जिले के थन्नामंडी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक लाह वाली बावली के जीर्णोद्धार, कायाकल्प एवं संरक्षण के लिए 5.78 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इससे इस जल संरचना के संरक्षण के साथ ही इसे एक प्रमुख हेरिटेज एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की उम्मीद जगी है।
लाह वाली बावली एक पुरानी जल संरचना नहीं, बल्कि थन्नामंडी क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण विरासत मानी जाती है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक यह बावली आसपास के लोगों तथा इस पहाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले यात्रियों के लिए पानी का महत्वपूर्ण स्रोत रही है।
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स्थानीय निवासी इमरान खान व दिलावर खान ने बताया कि थन्नामंडी क्षेत्र मुगल रोड और पीर पंजाल के रास्ते कश्मीर जाने वाला पुराना मार्ग है। इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों और सैन्य दलों के लिए जल स्रोतों का विशेष महत्व था। लाह वाली बावली इसी ऐतिहासिक परिवेश की निशानी है। पुराने समय की पत्थर की चिनाई और बावली की पारंपरिक संरचना इस क्षेत्र की वास्तुकला एवं जल संरक्षण की परंपरा को दर्शाती है। ऐसे में जीर्णोद्धार का उद्देश्य आधुनिक निर्माण के बजाय इसकी मूल ऐतिहासिक एवं स्थापत्य पहचान को बनाए रखना है। बावली को पर्यटन से जोड़ने की योजना 2013 में तत्कालीन सरकार ने भी घोषित की थी। तब 85 लाख की परियोजना रिपोर्ट तैयार कर 42 कनाल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था।
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डीसी ने जनवरी में किया था स्थल का निरीक्षणि
इस बावली के संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन भी सक्रिय रहा है। गत जनवरी में जिला विकास आयुक्त अभिषेक शर्मा ने निरीक्षण कर तैयार डीपीआर की समीक्षा की थी। संबंधित विभागों को निर्देश दिए थे कि बावली के संरक्षण में प्राकृतिक जल स्रोत को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। पत्थर की चिनाई का कार्य मूल स्वरूप को ध्यान में रखकर किया जाए। बावली के आसपास उचित सीमांकन, अतिक्रमण हटाने और फेंसिंग करने के भी निर्देश दिए थे। कपड़े धोने के लिए अलग स्थान, शौचालय सुविधा तथा बावली तक पहुंचने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और आम लोगों के लिए सुरक्षित एवं सुगम रास्ता विकसित करने पर जोर दिया था।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
प्रस्तावित परियोजना से ऐतिहासिक बावली और उससे जुड़े स्थापत्य तत्वों का संरक्षण किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इसे केवल संरक्षित स्मारक तक सीमित रखने के बजाय हेरिटेज टूरिज्म के एक आकर्षक केंद्र के रूप में विकसित करना है। बावली का विकास होने से थन्नामंडी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। इससे स्थानीय दुकानदारों, छोटे कारोबारियों, परिवहन सेवाओं और अन्य पर्यटन गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है।