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Srinagar News: पुलवामा के मुर्रान गांव में बरारी माएज मंदिर फिर से खुला
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पुलवामा। 36 साल के लंबे अंतराल के बाद एक और ऐतिहासिक मंदिर फिर से खुल गया है। पुलवामा के मुर्रान गांव में सदियों पुराने मंदिर को फिर से खोला गया, जो कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए एक अहम पल है। देवी की पूजा करने के लिए शुक्रवार को बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित मंदिर में इकट्ठा हुए। साथ ही कई स्थानीय मुसलमान भी इस समारोह में शामिल हुए और देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस कार्यक्रम के दौरान कई कश्मीरी पंडित भावुक हो गए और उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही उनकी मातृभूमि में वापसी के लिए ठोस कदम उठाएगी। स्थानीय मुसलमानों ने वापस लौट रहे पंडितों के साथ एकजुटता दिखाई और उनसे अपने पैतृक गांव में वापस आकर स्थायी रूप से बसने का आग्रह किया।
''''बरारी माएज'''' के नाम से जाना जाने वाला यह ऐतिहासिक मंदिर कभी कश्मीरी पंडितों के लिए आस्था का एक अहम केंद्र था। हालांकि 1989 में आतंकवाद के फैलने और उसके बाद समुदाय के पलायन के कारण यह मंदिर उपेक्षा और जीर्ण-शीर्ण अवस्था का शिकार हो गया था। सुरक्षा हालात में सुधार के साथ अब इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे फिर से खोल दिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आ रहे हैं।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद से 1990 के दशक में जीर्ण-शीर्ण हो चुके 200 से ज़्यादा ऐतिहासिक मंदिरों का जीर्णोद्धार किया गया है। कश्मीरी पंडित पूजा-अर्चना करने और अपनी विरासत से फिर से जुड़ने के लिए इन जगहों पर बड़ी संख्या में आ रहे हैं।
इस कार्यक्रम के दौरान कई कश्मीरी पंडित भावुक हो गए और उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही उनकी मातृभूमि में वापसी के लिए ठोस कदम उठाएगी। स्थानीय मुसलमानों ने वापस लौट रहे पंडितों के साथ एकजुटता दिखाई और उनसे अपने पैतृक गांव में वापस आकर स्थायी रूप से बसने का आग्रह किया।
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''''बरारी माएज'''' के नाम से जाना जाने वाला यह ऐतिहासिक मंदिर कभी कश्मीरी पंडितों के लिए आस्था का एक अहम केंद्र था। हालांकि 1989 में आतंकवाद के फैलने और उसके बाद समुदाय के पलायन के कारण यह मंदिर उपेक्षा और जीर्ण-शीर्ण अवस्था का शिकार हो गया था। सुरक्षा हालात में सुधार के साथ अब इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे फिर से खोल दिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आ रहे हैं।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद से 1990 के दशक में जीर्ण-शीर्ण हो चुके 200 से ज़्यादा ऐतिहासिक मंदिरों का जीर्णोद्धार किया गया है। कश्मीरी पंडित पूजा-अर्चना करने और अपनी विरासत से फिर से जुड़ने के लिए इन जगहों पर बड़ी संख्या में आ रहे हैं।