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Srinagar News: शोपियां में सेब बागानों को हुए नुकसान की निष्पक्ष जांच की मांग
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शोपियां। जिले के कुछ इलाकों में सेब के बागानों को हुए नुकसान के बाद जहां बागवानों में चिंता बढ़ गई है, वहीं एग्रोकेमिकल डीलर्स एसोसिएशन ने मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि वास्तविक कारण सामने आए बिना डीलरों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
एसोसिएशन अध्यक्ष ने प्रभावित बागवानों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि कई किसानों को नुकसान हुआ है लेकिन बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि एग्रोकेमिकल डीलर लंबे समय से बागवानी क्षेत्र को कीटनाशक, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराते रहे हैं तथा फसल सीजन के दौरान किसानों को उधार सुविधाएं भी प्रदान करते हैं।
उन्होंने बताया कि जिस उत्पाद को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसे कृषि विभाग द्वारा आवश्यक परीक्षणों के बाद आधिकारिक मंजूरी और पंजीकरण दिया गया था। एसोसिएशन के अनुसार, बागवानी विभाग, कृषि विभाग और शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की संयुक्त टीमों ने प्रभावित बागानों का दौरा किया है। पत्तियों, पौधों और अन्य नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है ताकि नुकसान के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
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अध्यक्ष ने कहा कि बदलते मौसम, तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव, ओलावृष्टि और अन्य पर्यावरणीय कारक भी नुकसान की वजह हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक खेती के तौर-तरीकों और ग्रोथ रेगुलेटर के उपयोग से फसलें कभी-कभी अधिक संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे मामूली जलवायु तनाव भी बागानों को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी पक्ष को दोषी ठहराने से बचा जाए और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाए।
एसोसिएशन अध्यक्ष ने प्रभावित बागवानों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि कई किसानों को नुकसान हुआ है लेकिन बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि एग्रोकेमिकल डीलर लंबे समय से बागवानी क्षेत्र को कीटनाशक, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराते रहे हैं तथा फसल सीजन के दौरान किसानों को उधार सुविधाएं भी प्रदान करते हैं।
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उन्होंने बताया कि जिस उत्पाद को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसे कृषि विभाग द्वारा आवश्यक परीक्षणों के बाद आधिकारिक मंजूरी और पंजीकरण दिया गया था। एसोसिएशन के अनुसार, बागवानी विभाग, कृषि विभाग और शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की संयुक्त टीमों ने प्रभावित बागानों का दौरा किया है। पत्तियों, पौधों और अन्य नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है ताकि नुकसान के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
अध्यक्ष ने कहा कि बदलते मौसम, तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव, ओलावृष्टि और अन्य पर्यावरणीय कारक भी नुकसान की वजह हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक खेती के तौर-तरीकों और ग्रोथ रेगुलेटर के उपयोग से फसलें कभी-कभी अधिक संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे मामूली जलवायु तनाव भी बागानों को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी पक्ष को दोषी ठहराने से बचा जाए और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाए।