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Srinagar News: निशात वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ेगी, 22 एमजीडी होगा उत्पादन
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- कमिश्नर एसएमसी ने किया 3 एमजीडी प्लांट का निरीक्षण, समय पर काम पूरा करने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। नगर निगम श्रीनगर के कमिश्नर फज लुल हसीब ने सोमवार को निशात वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 3 एमजीडी रैपिड सैंड फिल्ट्रेशन प्लांट के लिए चल रहे बुनियादी ढांचा विकास कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने शहर के पेयजल आपूर्ति ढांचे को मजबूत करने के लिए इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान जल कार्य प्रभाग के अधिकारियों ने कमिश्नर को बताया कि यह परियोजना सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत 406 लाख रुपये की स्वीकृत लागत से चल रही है।
निशात वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 1895 में चालू हुआ था। यह श्रीनगर की सबसे महत्वपूर्ण जल आपूर्ति सुविधा है जो मौजूदा समय में करीब 6.38 लाख आबादी को पानी देती है। इसमें आवासीय, वाणिज्यिक, संस्थागत, प्रशासनिक और पर्यटन क्षेत्र शामिल हैं। प्लांट की मौजूदा क्षमता 19 मिलियन गैलन प्रतिदिन है। यहां 1935 से 2000 के बीच पांच रैपिड सैंड फिल्ट्रेशन प्लांट लगाए गए थे।
कमिश्नर ने कहा कि तेजी से शहरी विस्तार और बढ़ती पानी की मांग को देखते हुए प्लांट की क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है। इस परियोजना में 3 एमजीडी रैपिड सैंड फिल्ट्रेशन प्लांट चालू करना, सप्लाई और ट्रंक मेन बिछाना, उपचारित जल प्रणाली को मजबूत करना, इलेक्ट्रो-मैकेनिकल उपकरणों का उन्नयन और सुरक्षा दीवार व स्लुइस चैंबर का निर्माण शामिल है। काम पूरा होने पर निशात डब्ल्यूटीपी की क्षमता 19 एमजीडी से बढ़कर 22 एमजीडी हो जाएगी। यह 26 साल में प्लांट की पहली बड़ी क्षमता वृद्धि होगी।
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उन्नत ढांचे से निशात, ब्रेन, बुलेवार्ड, गुपकर, सोनवार, शिवपोरा, लाल चौक, करन नगर, बाबरशाह, मुनव्वरबाद, खयाम, खान्यार, रैनावारी, सैदाकदल, डल बस्तियां, मीर बेहरी, डल बुंद और आसपास के इलाकों में पेयजल आपूर्ति बेहतर होगी। मौजूदा 6.38 लाख आबादी के साथ करीब एक लाख अतिरिक्त आबादी को भी सुरक्षित और भरोसेमंद पेयजल मिलेगा।
कमिश्नर ने कार्य एजेंसी को उच्चतम गुणवत्ता और कारीगरी बनाए रखते हुए सभी काम तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जरूरी शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना एसएमसी की प्रमुख प्राथमिकता है। निगम शहर की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और निवासियों, संस्थानों, पर्यटन स्थलों, सरकारी प्रतिष्ठानों व सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निर्बाध पेयजल देने के लिए प्रतिबद्ध है। निरीक्षण के दौरान एसएमसी और जल कार्य प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। नगर निगम श्रीनगर के कमिश्नर फज लुल हसीब ने सोमवार को निशात वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 3 एमजीडी रैपिड सैंड फिल्ट्रेशन प्लांट के लिए चल रहे बुनियादी ढांचा विकास कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने शहर के पेयजल आपूर्ति ढांचे को मजबूत करने के लिए इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान जल कार्य प्रभाग के अधिकारियों ने कमिश्नर को बताया कि यह परियोजना सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत 406 लाख रुपये की स्वीकृत लागत से चल रही है।
निशात वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 1895 में चालू हुआ था। यह श्रीनगर की सबसे महत्वपूर्ण जल आपूर्ति सुविधा है जो मौजूदा समय में करीब 6.38 लाख आबादी को पानी देती है। इसमें आवासीय, वाणिज्यिक, संस्थागत, प्रशासनिक और पर्यटन क्षेत्र शामिल हैं। प्लांट की मौजूदा क्षमता 19 मिलियन गैलन प्रतिदिन है। यहां 1935 से 2000 के बीच पांच रैपिड सैंड फिल्ट्रेशन प्लांट लगाए गए थे।
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कमिश्नर ने कहा कि तेजी से शहरी विस्तार और बढ़ती पानी की मांग को देखते हुए प्लांट की क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है। इस परियोजना में 3 एमजीडी रैपिड सैंड फिल्ट्रेशन प्लांट चालू करना, सप्लाई और ट्रंक मेन बिछाना, उपचारित जल प्रणाली को मजबूत करना, इलेक्ट्रो-मैकेनिकल उपकरणों का उन्नयन और सुरक्षा दीवार व स्लुइस चैंबर का निर्माण शामिल है। काम पूरा होने पर निशात डब्ल्यूटीपी की क्षमता 19 एमजीडी से बढ़कर 22 एमजीडी हो जाएगी। यह 26 साल में प्लांट की पहली बड़ी क्षमता वृद्धि होगी।
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उन्नत ढांचे से निशात, ब्रेन, बुलेवार्ड, गुपकर, सोनवार, शिवपोरा, लाल चौक, करन नगर, बाबरशाह, मुनव्वरबाद, खयाम, खान्यार, रैनावारी, सैदाकदल, डल बस्तियां, मीर बेहरी, डल बुंद और आसपास के इलाकों में पेयजल आपूर्ति बेहतर होगी। मौजूदा 6.38 लाख आबादी के साथ करीब एक लाख अतिरिक्त आबादी को भी सुरक्षित और भरोसेमंद पेयजल मिलेगा।
कमिश्नर ने कार्य एजेंसी को उच्चतम गुणवत्ता और कारीगरी बनाए रखते हुए सभी काम तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जरूरी शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना एसएमसी की प्रमुख प्राथमिकता है। निगम शहर की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और निवासियों, संस्थानों, पर्यटन स्थलों, सरकारी प्रतिष्ठानों व सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निर्बाध पेयजल देने के लिए प्रतिबद्ध है। निरीक्षण के दौरान एसएमसी और जल कार्य प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।