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दुष्प्रचार एक मशीनरी और हम उसके काट हैं : मेजर जनरल जोशी

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जीओसी 19 डिवीजन मनोज जोशी। संवाद
बारामुला में सेना कमांडर का सीमा पार की फर्जी खबरों पर करारा प्रहार
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खाली दिमाग शैतान का घर होता है लेकिन हम युवाओं को नफरत के बजाय क्रिकेट बैट, रनिंग ट्रैक और शांति का संदेश दे रहे हैं : जीओसी 19 डिव
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में सेना का मेगा स्पोर्ट्स आयोजन केवल खेल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीमा पार पाकिस्तान समर्थित उन दुष्प्रचार अभियानों को शिकस्त देने का एक रणनीतिक हथियार भी है जो युवाओं के दिमाग में जहर घोलने की कोशिश करते हैं। यह बात सेना की 19 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) मेजर जनरल मनोज जोशी ने सोमवार को कही। वे बारामुला में महीने भर चलने वाले खेल महोत्सव वारमुल गिंदो के तीसरे संस्करण के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि आप शैतान की कार्यशाला को काम करने की अनुमति देते हैं, तो वह सीमा पार से भी संचालित हो सकती है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि यह खेल आयोजन अपने पहले संस्करण के 13 खेलों और 1,800 प्रतिभागियों से बढ़कर इस साल 23 खेलों और 3,700 खिलाड़ियों तक पहुंच चुका है। सेना कमांडर ने घाटी में शांति भंग करने के लिए पाकिस्तान स्थित तत्वों द्वारा चलाए जा रहे निरंतर दुष्प्रचार का विशेष रूप से उल्लेख किया। हाल ही का एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कल ही किसी ने वर्ष 2017 के एक पुराने ट्वीट को जानबूझकर वायरल किया ताकि अमरनाथ यात्रा को लेकर दहशत फैलाई जा सके। इसमें झूठा दावा किया गया था कि बारामुला में हमला हुआ है और यात्रा रद्द कर दी जाएगी।
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मेजर जनरल जोशी ने कहा कि दुष्प्रचार एक सोची-समझी मशीनरी है और इसके पीछे दुश्मन का हाथ है, जो समाज में गलत बातें फैलाकर सुरक्षाबलों की छवि खराब करना चाहते हैं, लेकिन इस दुष्प्रचार का कोई वजूद नहीं है। सुरक्षाबलों की जमीनी सच्चाई और भारत विरोधी तत्वों के झूठे बयानों के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ तो दुष्प्रचार के जरिए यह कहा जाता है कि सेना खराब है और उसके साथ खड़े मत होओ, लेकिन दूसरी तरफ युवा इस खेल आयोजन में सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
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उन्होंने याद दिलाया कि जब भी कोई सड़क दुर्घटना होती है या किसी के घर में आग लगती है, तो सेना बिना यह सोचे कि सामने कौन है, तुरंत मदद के लिए पहुंचती है, क्योंकि यह सेना का वादा है कि वह हमेशा जनता के लिए मौजूद है। जीओसी ने जोर देकर कहा कि खेल उग्रवाद और भटकाव का सबसे बड़ा तोड़ हैं, जो युवाओं को नशे की लत और गलत सोच से दूर रखते हैं। एक खिलाड़ी अच्छी तरह जानता है कि अगर उसे खेल में बेहतर करना है तो नशा उसके बीच में बाधा बनेगा, इसलिए वह कभी उस रास्ते पर नहीं जाएगा।

सेना इस दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए मेरा देश, मेरी पहचान जैसे व्यापक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी चला रही है, जिसमें बारामुला, सोपोर और पट्टन के 7,500 छात्रों ने हिस्सा लिया और देश के सात राज्यों की संस्कृति को देखा। इसके अलावा वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और यूथ पार्लियामेंट जैसे आयोजन भी किए जा रहे हैं ताकि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा दी जा सके। जीओसी ने बारामुला को तर्जुमान-ए-अमन यानी शांति का दूत बताते हुए उम्मीद जताई कि खेल संस्कृति के दम पर आगामी एक महीने में 25 से 30 हजार दर्शकों को आकर्षित करने वाला बारामुला जल्द ही उग्रवाद के साये से पूरी तरह बाहर निकलकर एक स्पोर्ट्स सिटी के रूप में अपनी नई पहचान बनाएगा।
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