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Srinagar News: लस्सीपोरा में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले 11 कोल्ड स्टोरेज इकाइयों को नोटिस
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पुलवामा। जिले का लस्सीपोरा इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर (आईजीसी) में संचालित 11 कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (सीए) कोल्ड स्टोरेज इकाइयों को जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति (पीसीसी) ने नोटिस जारी किया है। यह सख्त कदम पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन और अनिवार्य प्रदूषण नियंत्रण बुनियादी ढांचे की कमी को लेकर उठाया गया है। यह सेंटर कश्मीर के बागवानी उद्योग और सेब भंडारण के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुए निरीक्षणों के दौरान इन इकाइयों में अपशिष्ट जल (वेस्ट वाटर) के प्रबंधन के लिए आवश्यक एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) और कम्पोजिट पिट गायब मिले जो नियमों के तहत अनिवार्य हैं। इस कार्रवाई के दायरे में कुल 11 कोल्ड स्टोरेज इकाइयां शामिल हैं। जल और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम के तहत जारी इन आदेशों में इकाइयों को तुरंत बंद करने के साथ-साथ उनके बिजली और पानी के कनेक्शन काटने की भी सिफारिश की गई है। इसके लिए पुलवामा के उपायुक्त, बिजली विभाग (केपीडीसीएल) और जन स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
सूत्रों ने बताया कि निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद इन इकाइयों ने अपशिष्ट जल के निपटान की कोई व्यवस्था नहीं की। कुछ इकाइयां तो प्रदूषण नियंत्रण समिति से वैध सहमति का नवीनीकरण कराए बिना ही चल रही थीं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सीए स्टोर्स में फलों की धुलाई और ग्रेडिंग के दौरान निकलने वाले रसायनों और अत्यधिक ठंडे पानी का वैज्ञानिक उपचार किए बिना छोड़ना आसपास के जल स्रोतों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।
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इस कार्रवाई से कश्मीर के सेब उद्योग और व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है क्योंकि लस्सीपोरा की ये सीए स्टोरेज सुविधाएं फलों को सुरक्षित रखने और घाटी की बागवानी अर्थव्यवस्था को सहारा देने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। दूसरी ओर लस्सीपोरा के एस्टेट्स मैनेजर फैयाज अहमद ने कहा कि उन्हें अभी तक प्रदूषण नियंत्रण समिति से ऐसे किसी आदेश की प्रति नहीं मिली है, जिसने आधिकारिक रिकॉर्ड और एस्टेट प्रशासन के बीच विरोधाभास खड़ा कर दिया है। फिलहाल, उद्योग से जुड़े सभी लोग इस मामले में अंतिम स्पष्टीकरण और भविष्य की कार्ययोजना का इंतजार कर रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुए निरीक्षणों के दौरान इन इकाइयों में अपशिष्ट जल (वेस्ट वाटर) के प्रबंधन के लिए आवश्यक एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) और कम्पोजिट पिट गायब मिले जो नियमों के तहत अनिवार्य हैं। इस कार्रवाई के दायरे में कुल 11 कोल्ड स्टोरेज इकाइयां शामिल हैं। जल और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम के तहत जारी इन आदेशों में इकाइयों को तुरंत बंद करने के साथ-साथ उनके बिजली और पानी के कनेक्शन काटने की भी सिफारिश की गई है। इसके लिए पुलवामा के उपायुक्त, बिजली विभाग (केपीडीसीएल) और जन स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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सूत्रों ने बताया कि निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद इन इकाइयों ने अपशिष्ट जल के निपटान की कोई व्यवस्था नहीं की। कुछ इकाइयां तो प्रदूषण नियंत्रण समिति से वैध सहमति का नवीनीकरण कराए बिना ही चल रही थीं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सीए स्टोर्स में फलों की धुलाई और ग्रेडिंग के दौरान निकलने वाले रसायनों और अत्यधिक ठंडे पानी का वैज्ञानिक उपचार किए बिना छोड़ना आसपास के जल स्रोतों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।
इस कार्रवाई से कश्मीर के सेब उद्योग और व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है क्योंकि लस्सीपोरा की ये सीए स्टोरेज सुविधाएं फलों को सुरक्षित रखने और घाटी की बागवानी अर्थव्यवस्था को सहारा देने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। दूसरी ओर लस्सीपोरा के एस्टेट्स मैनेजर फैयाज अहमद ने कहा कि उन्हें अभी तक प्रदूषण नियंत्रण समिति से ऐसे किसी आदेश की प्रति नहीं मिली है, जिसने आधिकारिक रिकॉर्ड और एस्टेट प्रशासन के बीच विरोधाभास खड़ा कर दिया है। फिलहाल, उद्योग से जुड़े सभी लोग इस मामले में अंतिम स्पष्टीकरण और भविष्य की कार्ययोजना का इंतजार कर रहे हैं।