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Srinagar News: अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने किया फॉरेस्ट ट्रेनिंग स्कूल बांदीपोरा का दौरा
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बांदीपोरा। जम्मू-कश्मीर, मिजोरम और मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के 37 रेंज अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के तहत फॉरेस्ट ट्रेनिंग स्कूल, चित्तरनार, बांदीपोरा का दौरा किया। मंडल वन अधिकारी (डीएफओ) बांदीपोरा वसीम फारूक ने बताया कि दौरे पर आए अधिकारियों को जिले में चल रही विभिन्न वानिकी, संरक्षण और वन बहाली पहलों की प्रत्यक्ष जानकारी दी गई।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को वुलर संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (डब्ल्यूयूसीएमए) द्वारा वुलर झील में किए जा रहे संरक्षण और पारिस्थितिक बहाली कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल को क्षेत्र में वन बहाली परियोजनाओं और वन आवरण व जैव विविधता बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों से भी अवगत कराया गया।
वसीम फारूक ने कहा कि अधिकारी इन पहलों की व्यावहारिक समझ हासिल करने के लिए फील्ड विजिट करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह का फील्ड एक्सपोजर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का अहम हिस्सा है, क्योंकि इससे अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में लागू सफल संरक्षण मॉडल और सर्वोत्तम प्रथाओं को समझने में मदद मिलती है। ये दौरे अधिकारियों के पेशेवर कौशल और क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दौरे पर आए सदस्यों ने वन विभाग और डब्ल्यूयूसीएमए द्वारा बांदीपोरा में किए गए संरक्षण और बहाली कार्यों की सराहना की।
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उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्रों की बहाली, आर्द्रभूमि पुनर्प्राप्ति और एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक वुलर झील को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं।
अधिकारियों ने बहाली उपायों के सकारात्मक प्रभाव पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन और नदरू की खेती से जुड़ी पारंपरिक आजीविका पुनर्जीवित हो रही है। उन्होंने जिले में पारिस्थितिक बहाली और इको-टूरिज्म पहलों की भी सराहना की, जिसमें वन पार्क और संरक्षण स्थलों का विकास शामिल है जो जागरूकता के साथ-साथ राजस्व भी उत्पन्न कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को वुलर संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (डब्ल्यूयूसीएमए) द्वारा वुलर झील में किए जा रहे संरक्षण और पारिस्थितिक बहाली कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल को क्षेत्र में वन बहाली परियोजनाओं और वन आवरण व जैव विविधता बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों से भी अवगत कराया गया।
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वसीम फारूक ने कहा कि अधिकारी इन पहलों की व्यावहारिक समझ हासिल करने के लिए फील्ड विजिट करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह का फील्ड एक्सपोजर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का अहम हिस्सा है, क्योंकि इससे अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में लागू सफल संरक्षण मॉडल और सर्वोत्तम प्रथाओं को समझने में मदद मिलती है। ये दौरे अधिकारियों के पेशेवर कौशल और क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दौरे पर आए सदस्यों ने वन विभाग और डब्ल्यूयूसीएमए द्वारा बांदीपोरा में किए गए संरक्षण और बहाली कार्यों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्रों की बहाली, आर्द्रभूमि पुनर्प्राप्ति और एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक वुलर झील को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं।
अधिकारियों ने बहाली उपायों के सकारात्मक प्रभाव पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन और नदरू की खेती से जुड़ी पारंपरिक आजीविका पुनर्जीवित हो रही है। उन्होंने जिले में पारिस्थितिक बहाली और इको-टूरिज्म पहलों की भी सराहना की, जिसमें वन पार्क और संरक्षण स्थलों का विकास शामिल है जो जागरूकता के साथ-साथ राजस्व भी उत्पन्न कर रहे हैं।