लद्दाख में बड़ा फैसला: दो कनाल तक जमीन के इस्तेमाल पर अब नहीं लेनी होगी मंजूरी, लोगों को मिली राहत
लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने नगर समिति क्षेत्रों में 2 कनाल तक भूमि के आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और मिश्रित उपयोग के लिए बिना अनुमति की नई अंतरिम व्यवस्था को मंजूरी दी है।
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लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के सक्सेना ने लोगों को राहत देते हुए नगर समिति क्षेत्रों के लिए एक अंतरिम भूमि उपयोग नियामक ढांचे को मंजूरी दी है। इसके तहत नगर निकाय की सीमा के भीतर 2 कनाल तक भूमि का उपयोग आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक या मिश्रित उपयोग के लिए बिना किसी पूर्व अनुमति के किया जा सकेगा।
इस फैसले का उद्देश्य लद्दाख में मास्टर प्लान और जोनल डेवलपमेंट प्लान की अनुपलब्धता के कारण लंबे समय से बनी अनिश्चितता को दूर करना है। इससे आम लोगों को मकान निर्माण, व्यवसाय शुरू करने और अन्य विकास कार्यों के लिए अनुमति लेने में आ रही परेशानियों से राहत मिलेगी।
उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नगर समिति क्षेत्रों में केवल मास्टर प्लान या जोनल डेवलपमेंट प्लान के अभाव के आधार पर किसी विकास प्रस्ताव या भवन निर्माण आवेदन को रोका नहीं जाएगा। 2 कनाल तक की भूमि का उपयोग आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक या मिश्रित उपयोग के लिए किया जा सकेगा और इसके लिए किसी प्राधिकरण से मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।
वीके सक्सेना ने कहा कि लद्दाख के दीर्घकालिक विकास और स्थिरता के लिए योजनाबद्ध शहरी विकास जरूरी है, लेकिन मास्टर प्लान तैयार होने तक इसकी कमी नागरिकों के विकास कार्यों में बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि नया ढांचा विकास की जरूरतों और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाएगा।
हालांकि, कुछ गतिविधियों को बिना अनुमति के करने पर रोक रहेगी। इनमें रेड, ऑरेंज और ग्रीन श्रेणी के उद्योग, बूचड़खाने, व्यावसायिक पशुपालन, पत्थर खदानें, ज्वलनशील सामग्री का भंडारण और कब्रिस्तान या श्मशान घाट जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
लद्दाख में फिलहाल कोई शहरी विकास प्राधिकरण नहीं है, जो मास्टर प्लान और जोनल डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के लिए आवश्यक होता है। वर्तमान में शहरी विकास और भवन निर्माण संबंधी कार्य लद्दाख बिल्डिंग बायलॉज-2025 के तहत नियंत्रित किए जा रहे हैं।
यह अंतरिम व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक लद्दाख के लिए मास्टर प्लान, जोनल डेवलपमेंट प्लान और संबंधित नियमों को अधिसूचित नहीं कर दिया जाता। नगर समितियों को इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।