Leh-Ladakh: मिग ला की बर्फीली चुनौती पार कर सबिता ने लहराया विजय का परचम, बनीं पहली भारतीय महिला
बिहार की सबिता महतो ने 265 किमी लंबी लेह-मिग ला अल्ट्रा रन पूरी कर इतिहास रच दिया और वह इसे पूरा करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।
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बिहार की रहने वाली धाविका और पेशेवर पर्वतारोही सबिता महतो ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 265 किलोमीटर लंबी लेह-मिग ला अल्ट्रा रन सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इसके साथ ही वह इस बेहद कठिन उच्च हिमालयी अल्ट्रा एंड्योरेंस दौड़ को पूरा करने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।
सबिता ने 20 जुलाई को इस चुनौतीपूर्ण अभियान की शुरुआत की थी और छह दिनों की कठिन यात्रा के बाद 26 जुलाई को इसे पूरा किया। यह दौड़ करीब 19,400 फीट ऊंचे मिग ला दर्रे से होकर गुजरती है, जहां धावकों को बेहद कम ऑक्सीजन, शून्य से नीचे तापमान, तेज हवाओं और कठिन पहाड़ी रास्तों जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
बिहार के सारण जिले के पानापुर गांव की 30 वर्षीय सबिता ने बताया कि इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, कड़ा प्रशिक्षण और मानसिक मजबूती है। उन्होंने इस दौड़ की तैयारी के लिए लगभग दो महीने तक द्रास में अभ्यास किया। इस दौरान उन्होंने लंबी दूरी की दौड़, हाइकिंग और पर्वतारोहण के जरिए खुद को कठिन हिमालयी परिस्थितियों के लिए तैयार किया।
सबिता ने कहा 3,500 से 6,000 मीटर की ऊंचाई पर हर कदम चुनौतीपूर्ण होता है। जब शरीर जवाब देने लगता है, तब मन की ताकत ही आगे बढ़ने का हौसला देती है।
इस अल्ट्रा रन के दौरान उन्होंने रोजाना करीब 40 से 50 किलोमीटर की दूरी तय की। उनका सफर लेह से शुरू होकर उपशी, त्सो कार क्षेत्र, चुमाथांग, न्योमा और रोंग होते हुए मिग ला तक पहुंचा। उन्होंने यह पूरी दौड़ अकेले पूरी की हालांकि अभियान के दौरान मेडिकल टीम, फिल्म निर्माताओं और लॉजिस्टिक सहयोगियों की टीम उनके साथ रही।
सबिता इससे पहले भी कई कठिन अभियानों में अपनी क्षमता साबित कर चुकी हैं। उन्होंने 570 किलोमीटर लंबी मनाली–उमलिंग ला अल्ट्रा रन 17 दिनों में पूरी की थी। इसके अलावा उन्होंने 1,200 किलोमीटर लंबी दिल्ली–उमलिंग ला साइकिलिंग अभियान को भी सफलतापूर्वक पूरा किया है।
वर्ष 2014 से पेशेवर पर्वतारोहण से जुड़ी सबिता ने हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट, दार्जिलिंग से प्रशिक्षण लिया है। वह लद्दाख, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश की कई 7,000 मीटर से अधिक ऊंची चोटियों पर सफल आरोहण कर चुकी हैं।
अपनी इस उपलब्धि को उन्होंने अपने माता-पिता और देश को समर्पित किया। सबिता ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनकी सफलता युवाओं और महिलाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करे। उन्होंने कहा हर लड़की को यह विश्वास रखना चाहिए कि संसाधनों की कमी से बड़ा उसका दृढ़ संकल्प होता है।
सबिता ने बताया कि शुरुआत में परिवार से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके समर्पण और मेहनत को देखते हुए बाद में परिवार ने उनका पूरा साथ दिया।
उन्होंने भारतीय सेना, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), लद्दाख प्रशासन और अन्य सहयोगी संस्थाओं का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं के प्रयासों से हिमालयी क्षेत्रों में साहसिक खेलों और अभियानों के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है।
लेह-मिग ला अल्ट्रा रन की ऐतिहासिक सफलता के बाद सबिता अब फिर से माउंटेन गाइड के रूप में काम शुरू करेंगी, ताकि अपने प्रशिक्षण, पोषण और भविष्य के पर्वतारोहण अभियानों के लिए आवश्यक संसाधन जुटा सकें।