सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   Srinagar, Dal Lake, Water Polluted

Srinagar News: बिगड़ रही डल की सेहत, खतरे में जल का जीवन

विज्ञापन
Srinagar, Dal Lake, Water Polluted
विज्ञापन
पानी कम होने से सायनोबैक्टीरियल ब्लूम बढ़े, ईपीजी ने जताई चिंता
Trending Videos

अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। एनवायर्नमेंटल पॉलिसी ग्रुप (ईपीजी) ने डल झील के पानी की तेजी से बिगड़ती हालत पर गहरी चिंता जताई है। यह हालत बड़े पैमाने पर साइनोबैक्टीरियल ब्लूम के बाद हुई है जिसने झील के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। इससे डल झील हरी दिखाई दे रही है।
ईपीजी ने बयान में बताया कि ब्लूम का कारण मौसमी तापमान में बदलाव या पानी का कम बहाव है। यह ब्लूम लगभग दो हफ्ते पहले शुरू हुआ था। ब्लूम दिखने से कुछ समय पहले लेक कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ठेकेदार ने मैकेनिकल डीवीडिंग का काम किया गया था। पहले डीवीडिंग तय साइंटिफिक प्रोटोकॉल के साथ की जाती थी जिसमें वनस्पतियों का मूल्यांकन भी शामिल था। इस बार ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

इकोलॉजिकल सुरक्षा उपायों के बिना जड़ों वाली वनस्पतियों को मैकेनिकल तरीके से हटाने से झील के किनारे की तलछट में फॉस्फोरस और नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्वों की भरमार हो जाती है। ये पोषक तत्व पानी के कॉलम में फिर से फैल जाते हैं। मीठे पानी के सिस्टम में प्राकृतिक रूप से मौजूद साइनोबैक्टीरिया इन पोषक तत्वों का तेजी से इस्तेमाल करते हैं जिससे तेजी से बढ़ोतरी होती है।
मौजूदा ब्लूम का पैमाना और एक जैसा होना इस बात का पक्का संकेत देता है कि तलछट में गड़बड़ी से होने वाला पोषक तत्वों का बढ़ना ही इसका संभावित कारण था। यह ब्लूम झील की सतह पर फैले पेंट जैसे गाढ़े हरे मैल के रूप में दिखाई दिया है। साथ ही बदबू और पानी का रंग बहुत ज्यादा हरा हो गया है। ईपीजी का कहना है कि संभावित गलतियों को मानने के बजाय एलसीएमए चुनिंदा वीडियो मैसेज के जरिए स्थिति की गंभीरता को कम दिखाने की कोशिश कर रहा है।

जलीय जीवों के लिए है बेहद खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार सायनोबैक्टीरियल ब्लूम नीले-हरे शैवाल होते हैं जो फास्फोरस, नाइट्रोजन की अधिकता के कारण तेजी से पनपते हैं। यह स्थिति पानी की सतह पर गाढ़ी, तैलीय परत बनाती है जो सूर्य का प्रकाश रोकती है और विष पैदा कर जल को जहरीला व ऑक्सीजन-मुक्त कर देती है। इससे जलीय जीवन मर जाता है। इंसानों के संपर्क में आने से चमड़ी पर रैशेज, गले में जलन, सांस की दिक्कतें, निमोनिया और पेट की गंभीर परेशानी हो सकती है।

निगीन झील का पानी आता है पीने के लिए
ईपीजी ने कहा कि डल झील और आपस में जुड़ी निगीन झील का पानी निशात वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए डल बंड लिफ्ट स्टेशन और पोखरीबल लिफ्ट स्कीम के जरिए म्युनिसिपल सप्लाई के लिए उठाया जाता है। सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (हाइड्रोलिक), सर्कल श्रीनगर की ओर से सर्कुलेट किए गए एक वीडियो में कहा गया है कि वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट पानी की क्वालिटी पैरामीटर्स पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। यह पक्का कर रहे हैं कि श्रीनगर शहर के ग्राहकों को आपूर्ति करने से पहले ब्लूम से प्रभावित पानी को ठीक से ट्रीट किया जाए। इस पर ईपीजी का कहना है कि प्लांट लेवल पर रिएक्टिव ट्रीटमेंट, सोर्स पर प्रिवेंटिव इकोलॉजिकल मैनेजमेंट का विकल्प नहीं हो सकता।
ईपीजी ने डीवीडिंग की साइंटिफिक जांच, टॉक्सिन मॉनिटरिंग नतीजों सहित पानी की क्वालिटी के डेटा को तुरंत पब्लिक में बताने और झील मैनेजमेंट के लिए एक परमानेंट मल्टीडिसिप्लिनरी ओवरसाइट सिस्टम बनाने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed