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Srinagar News: उप-मुख्यमंत्री ने कश्मीर में पारंपरिक खनन गतिविधियां बहाल करने के दिए निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। उप-मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने वीरवार को कहा कि कश्मीर में रेत, पत्थर की खदानों और ढीले पदार्थों को उठाने पर तुरंत फैसले लिए जाएं ताकि लोगों को निर्माण सामग्री की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। वे कश्मीर में चिह्नित स्थानों पर पारंपरिक खनन गतिविधियों और पत्थर खनन को बहाल करने की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
बैठक में विधायक जस्टिस (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी, अहसान अहमद पारदेसी, हिलाल अकबर लोन, निजाम-उद-दीन भट, जावेद हसन बैग और मुश्ताक अहमद गुरू शामिल हुए। इसके अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव खनन विभाग, निदेशक भूविज्ञान एवं खनन, निदेशक वित्त खनन, संयुक्त निदेशक और जिला खनिज अधिकारी भी मौजूद थे। उप-मुख्यमंत्री ने अवैध खनन गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही कहा कि गैरकानूनी संचालन पर प्रतिबंध के कारण लोगों को निर्माण सामग्री की कमी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने पर्यावरण हितों की रक्षा करते हुए खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए जम्मू-कश्मीर की व्यापक खनन नीति समय पर बनाने को कहा। खनन कार्यों में पारदर्शिता पर जोर देते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी जिले में अवैध खनन न होने पाए। उप-मुख्यमंत्री ने कश्मीर में खनन में लगी सभी कंपनियों से प्रभावी रॉयल्टी वसूली की जरूरत पर जोर दिया। खनन कार्यों से जुड़े लंबित जुर्माने और अदालती मामलों के तेजी से निपटारे को कहा ताकि विभाग का कामकाज सुचारू हो। बैठक में श्रीनगर के पंथाचौक, बांदीपोरा के सद्रेकोट बाला समेत अन्य चिह्नित स्थानों पर पारंपरिक पत्थर खनन गतिविधियों को बहाल करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
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उप-मुख्यमंत्री ने विकास की जरूरतों और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन की अहमियत बताई। उन्होंने संबंधित विभागों को विनियमित खनन कार्यों की तौर-तरीके तय करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में खनन गतिविधियों के संरचित पुनरुद्धार के तौर-तरीकों पर चर्चा हुई और लोगों की सुविधा के लिए व्यापक रूपरेखा तय की गई। उप-मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को नजदीकी तालमेल से काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि सभी फैसले पारदर्शी, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और जन-केंद्रित तरीके से लिए जाएं ताकि निर्माण सामग्री की उपलब्धता के साथ-साथ पारिस्थितिक संतुलन भी बना रहे।
श्रीनगर। उप-मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने वीरवार को कहा कि कश्मीर में रेत, पत्थर की खदानों और ढीले पदार्थों को उठाने पर तुरंत फैसले लिए जाएं ताकि लोगों को निर्माण सामग्री की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। वे कश्मीर में चिह्नित स्थानों पर पारंपरिक खनन गतिविधियों और पत्थर खनन को बहाल करने की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
बैठक में विधायक जस्टिस (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी, अहसान अहमद पारदेसी, हिलाल अकबर लोन, निजाम-उद-दीन भट, जावेद हसन बैग और मुश्ताक अहमद गुरू शामिल हुए। इसके अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव खनन विभाग, निदेशक भूविज्ञान एवं खनन, निदेशक वित्त खनन, संयुक्त निदेशक और जिला खनिज अधिकारी भी मौजूद थे। उप-मुख्यमंत्री ने अवैध खनन गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही कहा कि गैरकानूनी संचालन पर प्रतिबंध के कारण लोगों को निर्माण सामग्री की कमी का सामना न करना पड़े।
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उन्होंने पर्यावरण हितों की रक्षा करते हुए खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए जम्मू-कश्मीर की व्यापक खनन नीति समय पर बनाने को कहा। खनन कार्यों में पारदर्शिता पर जोर देते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी जिले में अवैध खनन न होने पाए। उप-मुख्यमंत्री ने कश्मीर में खनन में लगी सभी कंपनियों से प्रभावी रॉयल्टी वसूली की जरूरत पर जोर दिया। खनन कार्यों से जुड़े लंबित जुर्माने और अदालती मामलों के तेजी से निपटारे को कहा ताकि विभाग का कामकाज सुचारू हो। बैठक में श्रीनगर के पंथाचौक, बांदीपोरा के सद्रेकोट बाला समेत अन्य चिह्नित स्थानों पर पारंपरिक पत्थर खनन गतिविधियों को बहाल करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
उप-मुख्यमंत्री ने विकास की जरूरतों और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन की अहमियत बताई। उन्होंने संबंधित विभागों को विनियमित खनन कार्यों की तौर-तरीके तय करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में खनन गतिविधियों के संरचित पुनरुद्धार के तौर-तरीकों पर चर्चा हुई और लोगों की सुविधा के लिए व्यापक रूपरेखा तय की गई। उप-मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को नजदीकी तालमेल से काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि सभी फैसले पारदर्शी, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और जन-केंद्रित तरीके से लिए जाएं ताकि निर्माण सामग्री की उपलब्धता के साथ-साथ पारिस्थितिक संतुलन भी बना रहे।