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Srinagar News: हाईकोर्ट ने पीएसए के तहत हिरासत के निर्देश को किया रद्द, दूसरे को रखा बरकरार
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हाईकोर्ट ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत एक हिरासत आदेश को रद्द कर दिया है जबकि दूसरे को बरकरार रखा है। जस्टिस एमए चौधरी की बेंच ने मोहम्मद सैयद रहमान शमस की हिरासत को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि श्रीनगर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) की ओर से पारित आदेश में कानूनी कमियां थीं।
अदालत ने पाया कि हिरासत के आधार अस्पष्ट थे। उनमें खास जानकारी की कमी थी जिससे हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने के अधिकार से वंचित होना पड़ा। अदालत ने आगे कहा कि हिरासत के आधार काफी हद तक पुलिस डोजियर की हूबहू नकल थे जिससे पता चलता है कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी ने अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि अधिकारी यह साबित करने में नाकाम रहे कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति पर लगे आरोपों से निपटने के लिए सामान्य आपराधिक कानून क्यों काफी नहीं था।
निवारक हिरासत को एक ऐसा उपाय बताते हुए जिसका इस्तेमाल बहुत कम किया जाना चाहिए, अदालत ने 7 दिसंबर 2021 के हिरासत आदेश को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि अगर किसी अन्य मामले में उसकी जरूरत न हो तो हिरासत में लिए गए व्यक्ति को तुरंत रिहा किया जाए। इस बीच, अदालत ने पुलवामा के रऊफ अहमद लोन के हिरासत आदेश को बरकरार रखा और अप्रैल 2025 में जारी पीएसए आदेश को चुनौती देने वाली उसकी याचिका को खारिज कर दिया।
लोन ने दलील दी थी कि उसकी हिरासत अस्पष्ट और पुराने आधारों पर आधारित थी और उसे संबंधित सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई थी। हालांकि, रिकॉर्ड की जांच करने के बाद अदालत ने पाया कि वह बार-बार राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल रहा था और उसकी निवारक हिरासत को सही ठहराने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद थी।
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अदालत ने पाया कि हिरासत के आधार अस्पष्ट थे। उनमें खास जानकारी की कमी थी जिससे हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने के अधिकार से वंचित होना पड़ा। अदालत ने आगे कहा कि हिरासत के आधार काफी हद तक पुलिस डोजियर की हूबहू नकल थे जिससे पता चलता है कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी ने अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि अधिकारी यह साबित करने में नाकाम रहे कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति पर लगे आरोपों से निपटने के लिए सामान्य आपराधिक कानून क्यों काफी नहीं था।
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निवारक हिरासत को एक ऐसा उपाय बताते हुए जिसका इस्तेमाल बहुत कम किया जाना चाहिए, अदालत ने 7 दिसंबर 2021 के हिरासत आदेश को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि अगर किसी अन्य मामले में उसकी जरूरत न हो तो हिरासत में लिए गए व्यक्ति को तुरंत रिहा किया जाए। इस बीच, अदालत ने पुलवामा के रऊफ अहमद लोन के हिरासत आदेश को बरकरार रखा और अप्रैल 2025 में जारी पीएसए आदेश को चुनौती देने वाली उसकी याचिका को खारिज कर दिया।
लोन ने दलील दी थी कि उसकी हिरासत अस्पष्ट और पुराने आधारों पर आधारित थी और उसे संबंधित सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई थी। हालांकि, रिकॉर्ड की जांच करने के बाद अदालत ने पाया कि वह बार-बार राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल रहा था और उसकी निवारक हिरासत को सही ठहराने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद थी।

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