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Srinagar News: केयू में कश्मीरी और संस्कृत में अनुवाद विषय पर कार्यशाला शुरू
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। कश्मीर विश्वविद्यालय (केयू) के मुख्य परिसर में भारतीय भाषाओं में अनुवाद कश्मीरी और संस्कृत विषय पर मंगलवार से तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यशाला शुरू हुई।
यह कार्यशाला केयू के कश्मीरी विभाग द्वारा राष्ट्रीय अनुवाद मिशन और केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान मैसूर के सहयोग से आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों में अनुवाद कौशल को विकसित करना, भाषाई आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और अकादमिक व साहित्यिक क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
उद्घाटन सत्र में कुलपति निलोफर खान ने कहा कि अनुवाद भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि इससे विभिन्न भाषाओं के बीच अकादमिक और साहित्यिक सामग्री को अधिक सुलभ बनाया जा सकता है। डीन अकादमिक अफेयर्स शरीफुद्दीन पीरजादा ने कहा कि इस तरह की पहल बहुभाषी शोध को बढ़ावा देने और भाषाई विविधता को संरक्षित करने के लिए जरूरी है।
रजिस्ट्रार नसीर इकबाल ने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय भाषाओं और अनुवाद से जुड़े कार्यक्रमों को लगातार समर्थन देता रहेगा। एनटीएम के प्रभारी अधिकारी तारिक खान ने अपने वर्चुअल संबोधन में मिशन के उद्देश्यों पर बात की। उन्होंने ज्ञान के प्रसार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में अनुवाद की भूमिका को अहम बताया।
कार्यशाला में विशेषज्ञ व्याख्यान, व्यावहारिक अनुवाद अभ्यास और संवादात्मक सत्र शामिल हैं। इसमें विश्वविद्यालय के छात्र और शोधार्थी भाग ले रहे हैं।
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श्रीनगर। कश्मीर विश्वविद्यालय (केयू) के मुख्य परिसर में भारतीय भाषाओं में अनुवाद कश्मीरी और संस्कृत विषय पर मंगलवार से तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यशाला शुरू हुई।
यह कार्यशाला केयू के कश्मीरी विभाग द्वारा राष्ट्रीय अनुवाद मिशन और केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान मैसूर के सहयोग से आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों में अनुवाद कौशल को विकसित करना, भाषाई आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और अकादमिक व साहित्यिक क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
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उद्घाटन सत्र में कुलपति निलोफर खान ने कहा कि अनुवाद भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि इससे विभिन्न भाषाओं के बीच अकादमिक और साहित्यिक सामग्री को अधिक सुलभ बनाया जा सकता है। डीन अकादमिक अफेयर्स शरीफुद्दीन पीरजादा ने कहा कि इस तरह की पहल बहुभाषी शोध को बढ़ावा देने और भाषाई विविधता को संरक्षित करने के लिए जरूरी है।
रजिस्ट्रार नसीर इकबाल ने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय भाषाओं और अनुवाद से जुड़े कार्यक्रमों को लगातार समर्थन देता रहेगा। एनटीएम के प्रभारी अधिकारी तारिक खान ने अपने वर्चुअल संबोधन में मिशन के उद्देश्यों पर बात की। उन्होंने ज्ञान के प्रसार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में अनुवाद की भूमिका को अहम बताया।
कार्यशाला में विशेषज्ञ व्याख्यान, व्यावहारिक अनुवाद अभ्यास और संवादात्मक सत्र शामिल हैं। इसमें विश्वविद्यालय के छात्र और शोधार्थी भाग ले रहे हैं।

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