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Srinagar News: डल झील में नेचर शिकारा की शुरुआत, पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई पहल
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- यह खास शिकारा पर्यटकों और स्कूली छात्रों को देगा बर्ड वाचिंग और इको-टूरिज्म का अनूठा अनुभव
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में स्थित प्रसिद्ध डल झील में पर्यटकों के लिए एक नई और अनूठी पहल द नेचर शिकारा की शुरुआत की गई है। घाट नंबर 16 पर पर्यावरण वकील नदीम कादरी की ओर से स्थापित द नेचर यूनिवर्सिटी ने द नेचर शिकारा का शुभारंभ किया।
बता दें कि जहां आम शिकारे केवल झील की सैर कराते हैं वहीं यह नया शिकारा माइक्रो क्रूज की तरह काम करेगा जिसमें प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया है। नदीम कादरी ने अमर उजाला के साथ बातचीत में कहा कि इस शिकारे में पर्यटकों के लिए बर्ड वाचिंग, नेचर ट्रेल्स और पर्यावरण स्थिरता से जुड़ा एक पूरा पैकेज होगा। इस राइड के दौरान इसमें एक इंटरप्रेटर (गाइड) मौजूद रहेगा जो पक्षियों और प्रकृति के बारे में विस्तार से जानकारी देगा।
इसमें पर्यावरण जागरूकता को लेकर किताबें, पत्रिकाएं और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े पोस्टर रखे गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि झील में कोई कचरा न फेंका जाए और इसके संरक्षण के लिए सकारात्मक प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि इसका संचालन टूरिस्ट पुलिस की निगरानी में ही किया जाएगा। डल झील को साफ रखने और लोगों में जागरूकता लाने के लिए इस पहल की निगरानी टूरिस्ट पुलिस कर रही है।
द नेचर शिकारा की कोऑर्डिनेटर सीरत उल निसार ने बताया कि यह शिकारा स्कूली बच्चों के लिए खास पहल है। अक्सर स्थानीय स्कूली बच्चों को डल झील के बारे में गहराई से जानने का मौका नहीं मिलता। यह पहल छात्रों को प्रकृति संरक्षण की शिक्षा देने का भी प्रयास है। इसकी बुकिंग ऐप और क्यूआर कोड से की जा सकेगी। इस शिकारे की बुकिंग के लिए द नेचर शिकारा नाम से एक आधिकारिक ऐप और व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है जिसे क्यूआर कोड स्कैन करके किसी भी समय आसानी से बुक किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि अभी शुरुआत एक शिकारे के साथ की गई है और दो दिन के भीतर अच्छा रिस्पांस मिला है। इस हफ्ते के अंदर डल झील में ऐसे 10 और शिकारे जोड़े जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोग इस विशेष इको-टूर का आनंद ले सकें। शिकारा के कप्तान जावेद अहमद ने कहा कि यह एक सपना सच होने जैसा है। हम एक स्थानीय हितधारक हैं और डल झील के निवासी हैं। इसका शुभारंभ एक अद्वितीय मिसाल कायम करता है। इस पहल का सभी को विशेषकर पर्यटकों को समर्थन करना चाहिए।
इस बीच कई पर्यटक इसका आनंद लेते नजर आए। रियासी से आए पर्यटक सतपाल डोगरा ने कहा कि यह एक एक अच्छी शुरुआत है। अगर कोई भी बाहर से घूमने आएगा तो उसे अगर यहां के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं है तो वह किताबों के जरिये ज्ञान प्राप्त कर पाएगा। बता दें कि द नेचर शिकारा का शुभारंभ पर्यावरण जागरूकता और पारिस्थितिकी की शिक्षा को समर्पित है। यह डल झील की सुरक्षा और उसके जीर्णोद्धार के लिए चलाई जाने वाली इसी तरह की अन्य पहलों के लिए एक मिसाल कायम करता है।
नदीम ने कहा कि जबरवान के नजारों, ऐतिहासिक धरोहरों, शानदार इतिहास, जीवंत समुदाय, तैरते बाजार और खूबसूरत चार चिनारी के बीच सैर करें। यहां की शांति, स्थिरता और रूहानी एहसास का अनुभव करें। इस आंदोलन का हिस्सा बनें, बदलाव का हिस्सा बनें और इस मील के पत्थर का हिस्सा बनें।
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अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में स्थित प्रसिद्ध डल झील में पर्यटकों के लिए एक नई और अनूठी पहल द नेचर शिकारा की शुरुआत की गई है। घाट नंबर 16 पर पर्यावरण वकील नदीम कादरी की ओर से स्थापित द नेचर यूनिवर्सिटी ने द नेचर शिकारा का शुभारंभ किया।
बता दें कि जहां आम शिकारे केवल झील की सैर कराते हैं वहीं यह नया शिकारा माइक्रो क्रूज की तरह काम करेगा जिसमें प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया है। नदीम कादरी ने अमर उजाला के साथ बातचीत में कहा कि इस शिकारे में पर्यटकों के लिए बर्ड वाचिंग, नेचर ट्रेल्स और पर्यावरण स्थिरता से जुड़ा एक पूरा पैकेज होगा। इस राइड के दौरान इसमें एक इंटरप्रेटर (गाइड) मौजूद रहेगा जो पक्षियों और प्रकृति के बारे में विस्तार से जानकारी देगा।
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इसमें पर्यावरण जागरूकता को लेकर किताबें, पत्रिकाएं और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े पोस्टर रखे गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि झील में कोई कचरा न फेंका जाए और इसके संरक्षण के लिए सकारात्मक प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि इसका संचालन टूरिस्ट पुलिस की निगरानी में ही किया जाएगा। डल झील को साफ रखने और लोगों में जागरूकता लाने के लिए इस पहल की निगरानी टूरिस्ट पुलिस कर रही है।
द नेचर शिकारा की कोऑर्डिनेटर सीरत उल निसार ने बताया कि यह शिकारा स्कूली बच्चों के लिए खास पहल है। अक्सर स्थानीय स्कूली बच्चों को डल झील के बारे में गहराई से जानने का मौका नहीं मिलता। यह पहल छात्रों को प्रकृति संरक्षण की शिक्षा देने का भी प्रयास है। इसकी बुकिंग ऐप और क्यूआर कोड से की जा सकेगी। इस शिकारे की बुकिंग के लिए द नेचर शिकारा नाम से एक आधिकारिक ऐप और व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है जिसे क्यूआर कोड स्कैन करके किसी भी समय आसानी से बुक किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि अभी शुरुआत एक शिकारे के साथ की गई है और दो दिन के भीतर अच्छा रिस्पांस मिला है। इस हफ्ते के अंदर डल झील में ऐसे 10 और शिकारे जोड़े जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोग इस विशेष इको-टूर का आनंद ले सकें। शिकारा के कप्तान जावेद अहमद ने कहा कि यह एक सपना सच होने जैसा है। हम एक स्थानीय हितधारक हैं और डल झील के निवासी हैं। इसका शुभारंभ एक अद्वितीय मिसाल कायम करता है। इस पहल का सभी को विशेषकर पर्यटकों को समर्थन करना चाहिए।
इस बीच कई पर्यटक इसका आनंद लेते नजर आए। रियासी से आए पर्यटक सतपाल डोगरा ने कहा कि यह एक एक अच्छी शुरुआत है। अगर कोई भी बाहर से घूमने आएगा तो उसे अगर यहां के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं है तो वह किताबों के जरिये ज्ञान प्राप्त कर पाएगा। बता दें कि द नेचर शिकारा का शुभारंभ पर्यावरण जागरूकता और पारिस्थितिकी की शिक्षा को समर्पित है। यह डल झील की सुरक्षा और उसके जीर्णोद्धार के लिए चलाई जाने वाली इसी तरह की अन्य पहलों के लिए एक मिसाल कायम करता है।
नदीम ने कहा कि जबरवान के नजारों, ऐतिहासिक धरोहरों, शानदार इतिहास, जीवंत समुदाय, तैरते बाजार और खूबसूरत चार चिनारी के बीच सैर करें। यहां की शांति, स्थिरता और रूहानी एहसास का अनुभव करें। इस आंदोलन का हिस्सा बनें, बदलाव का हिस्सा बनें और इस मील के पत्थर का हिस्सा बनें।

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