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Srinagar News: लेह एपेक्स बॉडी व कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने गृहमंत्री से मुलाकात के लिए मांगा समय
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लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए।स्रो
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संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 30 अप्रैल को प्रस्तावित लेह दौरे के दौरान उनसे व्यक्तिगत मुलाकात के लिए समय मांगा है।
मंगलवार को लेह में पत्रकारवार्ता के दौरान लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष छेरिंग दोरजे लकरुक और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलई ने कहा कि दोनों संगठनों की साझा राय है कि चूंकि गृह मंत्री स्वयं नीतिगत निर्णय ले रहे हैं इसलिए लद्दाख के लंबित मुद्दों पर सीधे गृह मंत्रालय के साथ सार्थक बातचीत होनी चाहिए।
नेताओं ने कहा कि अमित शाह ने पहले आश्वासन दिया था कि वे समय-समय पर हाई पावर्ड कमेटी की बैठकों की अध्यक्षता स्वयं करेंगे और वार्ता के लिए लद्दाख भी आएंगे। उन्होंने उनके आगामी दौरे को एक महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि लेह में उनसे सीधी मुलाकात का स्वागत किया जाएगा। सरकार की ओर से उप-समिति के गठन की घोषणा पर असंतोष जताते हुए नेताओं ने कहा कि ऐसी समितियों में सीमित सदस्य होते हैं और आमतौर पर बड़े फैसले नहीं लिए जाते। उन्होंने दोहराया कि उनकी मुख्य मांगें विशेष रूप से लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत सांविधानिक संरक्षण यथावत हैं।
उन्होंने कहा कि एक लिखित मसौदा प्रस्ताव पहले ही सरकार को सौंपा जा चुका है और अब केंद्र सरकार को इन प्रस्तावों की समीक्षा कर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। नेताओं ने उम्मीद जताई कि अमित शाह के दौरे के दौरान इस दिशा में प्रगति होगी। प्रतिनिधियों ने 24 सितंबर के विरोध प्रदर्शन से जुड़े हिरासत में लिए गए लोगों पर दर्ज एफआईआर को वापस लेने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि लगभग 30 लोगों पर गंभीर धाराएं लगाई गई हैं और इन सभी मामलों को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।
उन्होंने 24 सितंबर की घटनाओं से प्रभावित परिवारों और घायलों के लिए मुआवजे की भी मांग की। उनका कहना था कि खोई हुई जानें वापस नहीं लाई जा सकतीं लेकिन आर्थिक राहत और न्याय से लोगों के जख्मों पर मरहम लगाया जा सकता है। हालिया जिला पुनर्गठन पर पूछे गए सवाल के जवाब में वक्ताओं ने कहा कि यह मुद्दा वर्षों से चर्चा में था और गृह मंत्रालय के साथ बैठकों में पहले ही स्वीकार किया जा चुका था।
अगर अमित शाह के दौरे के दौरान वार्ता नहीं होती तो आगे की रणनीति क्या होगी, इस पर नेताओं ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि गृह मंत्री लद्दाख के प्रतिनिधियों से मिलेंगे। हालांकि, यदि उम्मीदें पूरी नहीं हुईं तो लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की कार्यकारिणी बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग से पीछे नहीं हटेंगे तथा किसी भी टेरिटोरियल काउंसिल या किसी अन्य नाम से वैकल्पिक व्यवस्था स्वीकार नहीं करेंगे।
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लेह। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 30 अप्रैल को प्रस्तावित लेह दौरे के दौरान उनसे व्यक्तिगत मुलाकात के लिए समय मांगा है।
मंगलवार को लेह में पत्रकारवार्ता के दौरान लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष छेरिंग दोरजे लकरुक और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलई ने कहा कि दोनों संगठनों की साझा राय है कि चूंकि गृह मंत्री स्वयं नीतिगत निर्णय ले रहे हैं इसलिए लद्दाख के लंबित मुद्दों पर सीधे गृह मंत्रालय के साथ सार्थक बातचीत होनी चाहिए।
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नेताओं ने कहा कि अमित शाह ने पहले आश्वासन दिया था कि वे समय-समय पर हाई पावर्ड कमेटी की बैठकों की अध्यक्षता स्वयं करेंगे और वार्ता के लिए लद्दाख भी आएंगे। उन्होंने उनके आगामी दौरे को एक महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि लेह में उनसे सीधी मुलाकात का स्वागत किया जाएगा। सरकार की ओर से उप-समिति के गठन की घोषणा पर असंतोष जताते हुए नेताओं ने कहा कि ऐसी समितियों में सीमित सदस्य होते हैं और आमतौर पर बड़े फैसले नहीं लिए जाते। उन्होंने दोहराया कि उनकी मुख्य मांगें विशेष रूप से लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत सांविधानिक संरक्षण यथावत हैं।
उन्होंने कहा कि एक लिखित मसौदा प्रस्ताव पहले ही सरकार को सौंपा जा चुका है और अब केंद्र सरकार को इन प्रस्तावों की समीक्षा कर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। नेताओं ने उम्मीद जताई कि अमित शाह के दौरे के दौरान इस दिशा में प्रगति होगी। प्रतिनिधियों ने 24 सितंबर के विरोध प्रदर्शन से जुड़े हिरासत में लिए गए लोगों पर दर्ज एफआईआर को वापस लेने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि लगभग 30 लोगों पर गंभीर धाराएं लगाई गई हैं और इन सभी मामलों को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।
उन्होंने 24 सितंबर की घटनाओं से प्रभावित परिवारों और घायलों के लिए मुआवजे की भी मांग की। उनका कहना था कि खोई हुई जानें वापस नहीं लाई जा सकतीं लेकिन आर्थिक राहत और न्याय से लोगों के जख्मों पर मरहम लगाया जा सकता है। हालिया जिला पुनर्गठन पर पूछे गए सवाल के जवाब में वक्ताओं ने कहा कि यह मुद्दा वर्षों से चर्चा में था और गृह मंत्रालय के साथ बैठकों में पहले ही स्वीकार किया जा चुका था।
अगर अमित शाह के दौरे के दौरान वार्ता नहीं होती तो आगे की रणनीति क्या होगी, इस पर नेताओं ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि गृह मंत्री लद्दाख के प्रतिनिधियों से मिलेंगे। हालांकि, यदि उम्मीदें पूरी नहीं हुईं तो लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की कार्यकारिणी बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग से पीछे नहीं हटेंगे तथा किसी भी टेरिटोरियल काउंसिल या किसी अन्य नाम से वैकल्पिक व्यवस्था स्वीकार नहीं करेंगे।

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