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जम्मू-कश्मीर में अब संख्या आधारित नहीं, मूल्य आधारित पर्यटन चाहिए : उमर
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श्रीनगर के एसकेआईसीसी में कार्यक्रम के दौररान मुख्यमंत्री उमर। संवाद
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- एसकेआईसीसी में मुख्यमंत्री ने सतत पर्यटन योजना सम्मेलन को किया संबोधित
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को अब संख्या आधारित पर्यटन से हटकर मूल्य आधारित और सतत पर्यटन मॉडल की ओर बढ़ना होगा। यह मॉडल क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी की रक्षा के साथ-साथ दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि भी सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री वीरवार को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित सतत पर्यटन योजना सम्मेलन-कल के लिए पर्यटन की रूपरेखा के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा, स्थिरता के बिना पर्यटन कुछ साल चल सकता है लेकिन लंबे समय तक नहीं टिक सकता जब तक स्थिरता इसकी नींव न हो। अब समय आ गया है कि हम तय करें कि 100 पर्यटकों से 1-1 रुपया कमाना है या एक पर्यटक से 100 रुपये कमाने वाला अनुभव देना है। इसी सवाल का जवाब हमारे भविष्य के सभी पर्यटन मास्टर प्लान तय करेगा।
वह जम्मू-कश्मीर आने वाले पर्यटकों की बढ़ती संख्या का स्वागत करते हैं लेकिन भविष्य में पर्यटक प्रवाह को नियंत्रित करना पड़ सकता है ताकि पर्यटन स्थलों की रक्षा हो और पर्यटकों को ट्रैफिक जाम, खराब सुविधाओं और भीड़ भाड़ का सामना न करना पड़े। पिछले 30 सालों के अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सामान्य स्थिति दिखाने के लिए हमने संख्या-आधारित तरीका अपनाया लेकिन पहलगाम घटना के बाद होटल खाली होने से पहले ट्रैफिक जाम की स्थिति ने दिखाया कि जम्मू-कश्मीर का पर्यटन तंत्र कितना नाजुक है। सतत पर्यटन योजना में इन मुद्दों को प्राथमिकता देनी होगी जिनमें ट्रैफिक नियमन, पार्किंग, ठोस कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण, भवन नियम और पर्यावरणीय वहन क्षमता शामिल है।
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गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग व डल झील को हमें अपने घरों जैसा मानना होगा
सीएम ने डल झील में चल रहे सफाई अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि कचरे का बड़ा हिस्सा स्थानीय बस्तियों से आता है। इसलिए सरकार के साथ-साथ नागरिकों की भी जिम्मेदारी है। गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और डल झील को हमें अपने घरों जैसा मानना होगा। जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी ताकत नदियां, झीलें, पहाड़, ग्लेशियर और प्राकृतिक सुंदरता है। हम डिज्नीलैंड, यूनिवर्सल स्टूडियो या लास वेगास नहीं बेच रहे। इसलिए हर मास्टर प्लान का मुख्य उद्देश्य इन प्राकृतिक संपत्तियों की रक्षा होना चाहिए।
हर जगह के लिए एक जैसा नियम नहीं हो सकता
उन्होंने प्रत्येक पर्यटन स्थल की वहन क्षमता का वैज्ञानिक आकलन करने पर जोर दिया। कहा कि श्रीनगर जितने पर्यटक झेल सकता है उतने गुलमर्ग या गुरेज नहीं। हर जगह के लिए एक जैसा नियम नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने बाहर से आने वाले पर्यटक वाहनों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय परिवहन ऑपरेटरों की आजीविका प्रभावित होती है। उद्देश्य पर्यटन से अपने लोगों को अधिक लाभ पहुंचाना और वैल्यू चेन में ऊपर जाना है।
सम्मेलन में सलाहकार नासिर असलम वानी, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, एसीएस धीरज गुप्ता और एसीएस पर्यटन आशीष चंद्र वर्मा सहित कई अधिकारी और पर्यटन हितधारक मौजूद थे। एसीएस पर्यटन ने प्रस्तुति में कहा कि सरकार अब पर्यावरणीय संवेदनशीलता और बुनियादी ढांचे के आधार पर पर्यटन स्थलों का टीयर-आधारित वर्गीकरण करेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को अब संख्या आधारित पर्यटन से हटकर मूल्य आधारित और सतत पर्यटन मॉडल की ओर बढ़ना होगा। यह मॉडल क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी की रक्षा के साथ-साथ दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि भी सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री वीरवार को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित सतत पर्यटन योजना सम्मेलन-कल के लिए पर्यटन की रूपरेखा के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा, स्थिरता के बिना पर्यटन कुछ साल चल सकता है लेकिन लंबे समय तक नहीं टिक सकता जब तक स्थिरता इसकी नींव न हो। अब समय आ गया है कि हम तय करें कि 100 पर्यटकों से 1-1 रुपया कमाना है या एक पर्यटक से 100 रुपये कमाने वाला अनुभव देना है। इसी सवाल का जवाब हमारे भविष्य के सभी पर्यटन मास्टर प्लान तय करेगा।
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वह जम्मू-कश्मीर आने वाले पर्यटकों की बढ़ती संख्या का स्वागत करते हैं लेकिन भविष्य में पर्यटक प्रवाह को नियंत्रित करना पड़ सकता है ताकि पर्यटन स्थलों की रक्षा हो और पर्यटकों को ट्रैफिक जाम, खराब सुविधाओं और भीड़ भाड़ का सामना न करना पड़े। पिछले 30 सालों के अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सामान्य स्थिति दिखाने के लिए हमने संख्या-आधारित तरीका अपनाया लेकिन पहलगाम घटना के बाद होटल खाली होने से पहले ट्रैफिक जाम की स्थिति ने दिखाया कि जम्मू-कश्मीर का पर्यटन तंत्र कितना नाजुक है। सतत पर्यटन योजना में इन मुद्दों को प्राथमिकता देनी होगी जिनमें ट्रैफिक नियमन, पार्किंग, ठोस कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण, भवन नियम और पर्यावरणीय वहन क्षमता शामिल है।
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गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग व डल झील को हमें अपने घरों जैसा मानना होगा
सीएम ने डल झील में चल रहे सफाई अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि कचरे का बड़ा हिस्सा स्थानीय बस्तियों से आता है। इसलिए सरकार के साथ-साथ नागरिकों की भी जिम्मेदारी है। गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और डल झील को हमें अपने घरों जैसा मानना होगा। जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी ताकत नदियां, झीलें, पहाड़, ग्लेशियर और प्राकृतिक सुंदरता है। हम डिज्नीलैंड, यूनिवर्सल स्टूडियो या लास वेगास नहीं बेच रहे। इसलिए हर मास्टर प्लान का मुख्य उद्देश्य इन प्राकृतिक संपत्तियों की रक्षा होना चाहिए।
हर जगह के लिए एक जैसा नियम नहीं हो सकता
उन्होंने प्रत्येक पर्यटन स्थल की वहन क्षमता का वैज्ञानिक आकलन करने पर जोर दिया। कहा कि श्रीनगर जितने पर्यटक झेल सकता है उतने गुलमर्ग या गुरेज नहीं। हर जगह के लिए एक जैसा नियम नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने बाहर से आने वाले पर्यटक वाहनों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय परिवहन ऑपरेटरों की आजीविका प्रभावित होती है। उद्देश्य पर्यटन से अपने लोगों को अधिक लाभ पहुंचाना और वैल्यू चेन में ऊपर जाना है।
सम्मेलन में सलाहकार नासिर असलम वानी, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, एसीएस धीरज गुप्ता और एसीएस पर्यटन आशीष चंद्र वर्मा सहित कई अधिकारी और पर्यटन हितधारक मौजूद थे। एसीएस पर्यटन ने प्रस्तुति में कहा कि सरकार अब पर्यावरणीय संवेदनशीलता और बुनियादी ढांचे के आधार पर पर्यटन स्थलों का टीयर-आधारित वर्गीकरण करेगी।

श्रीनगर के एसकेआईसीसी में कार्यक्रम के दौररान मुख्यमंत्री उमर। संवाद