पहलगाम की बदली तस्वीर: आतंक के साए से निकला बाहर, घाटी में फिर गूंजा सैलानियों का शोर, लौट आई रौनक
आतंकी हमले के एक साल बाद पहलगाम में हालात तेजी से सामान्य हुए हैं, सुरक्षा मजबूत हुई है और पर्यटकों की वापसी से घाटी में रौनक लौट आई है। स्थानीय लोगों के चेहरे पर मुस्कान है और पर्यटन के जरिए पहलगाम ने खौफ को पीछे छोड़कर उम्मीद और हौसले की नई कहानी लिखी है।
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एक साल पहले हुए आतंकी हमले के बाद जहां कश्मीर की फिजाओं में डर और अनिश्चितता का माहौल था, वहीं अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होते दिख रहे हैं। पर्यटकों की वापसी इसका सबसे बड़ा संकेत है। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहलगाम पहुंच रहे सैलानी न सिर्फ यहां की वादियों का आनंद ले रहे हैं बल्कि स्थानीय लोगों के समर्थन में खुलकर अपनी बात भी रख रहे हैं।
पर्यटकों का कहना है कि कश्मीर की खूबसूरती जितनी प्रसिद्ध है, उससे कहीं ज्यादा दिल जीतने वाली यहां के लोगों की मेहमाननवाजी है।
उनका मानना है कि ऐसे समय में कश्मीर आना केवल एक यात्रा नहीं बल्कि यहां के लोगों के प्रति समर्थन का संदेश भी है, क्योंकि घाटी के अधिकांश परिवारों की आजीविका पर्यटन पर ही निर्भर करती है।
बायसरन समेत कई पर्यटन स्थलों पर फैसला जल्द
बंद चल रहे पर्यटन स्थल बायसरन, बांदीपोरा में गुरेज वैली और अथवातू के साथ ही कुपवाड़ा की बंगस घाटी के खुलने पर जल्द फैसला होने के आसार हैं।
हरियाणा से अपने परिवार के साथ पहलगाम पहुंचे दीपक कुमार कहते हैं कि हालात के डर से कश्मीर आना छोड़ देना यहां के लोगों के साथ अन्याय होगा। देश के किसी भी हिस्से में घटनाएं हो सकती हैं लेकिन इसके लिए पूरे क्षेत्र को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वे कहते हैं, कश्मीर के लोग बेहद सहयोगी और मिलनसार हैं। दीपक बताते हैं कि वह पिछले तीन वर्षों से लगातार कश्मीर आ रहे हैं और हर बार उनका अनुभव सकारात्मक रहा है। परिवार के कुछ सदस्यों के मन में डर जरूर था लेकिन मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि यहां हालात सामान्य हैं। उन्होंने कहा, यहां आकर उनका डर पूरी तरह दूर हो गया। अब तक का अनुभव शानदार रहा है।
पर्यटक बढ़ने से ही आएगा बदलाव
गुजरात से आईं नीलम भी कश्मीर की वादियों और यहां के लोगों की सराहना करते नहीं थकतीं। उनका कहना है कि पहलगाम हमले के बाद स्थानीय कारोबार पर गहरा असर पड़ा है। यहां के ज्यादातर लोग पर्यटन पर निर्भर हैं। अगर पर्यटक नहीं आएंगे तो उनका जीवन प्रभावित होगा। ऐसे में देशभर के लोगों को आगे आकर कश्मीर का रुख करना चाहिए। नीलम का मानना है कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या ही घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती है। जितने अधिक लोग यहां आएंगे, उतनी तेजी से यहां का पर्यटन उद्योग पटरी पर लौटेगा और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी।
स्थानीय कारोबारियों के लिए भी पर्यटकों की यह वापसी उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। होटलों, घोड़ा संचालकों, टैक्सी चालकों और दुकानदारों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर सैलानियों पर निर्भर है। पिछले साल की घटनाओं के बाद इनकी आय पर गहरा असर पड़ा था लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति सुधरने लगी है।

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