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जम्मू में मौत का यू-टर्न: ठसाठस भरी थीं सवारियां, रफ्तार ने ढाया कहर, क्रैश बैरियर होते तो शायद न होता हादसा
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 21 Apr 2026 01:15 AM IST
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सार
रामनगर-उधमपुर मार्ग पर कघोट में हुए भीषण हादसे की अब तक जो परतें सामने आ रही हैं वे रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल में उपचाराधीन पीड़ितों की मानें तो हादसा महज इत्तेफाक नहीं बल्कि लापरवाही भयावह परिणाम था।
उधमपुर बस हादसा
- फोटो : एजेंसी
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विस्तार
रामनगर-उधमपुर मार्ग पर कघोट में हुए भीषण हादसे की अब तक जो परतें सामने आ रही हैं वे रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल में उपचाराधीन पीड़ितों की मानें तो हादसा महज इत्तेफाक नहीं बल्कि लापरवाही भयावह परिणाम था। तेज रफ्तार, बस में ठसाठस भरे लोग और ढलान पर तीखे मोड़ (यू-टर्न) पर सामने से आ रहे छोटे वाहन को रास्ता देने के लिए लंबा मोड़ लेने के घातक मेल ने 21 लोगों को मौत की गहरी खाई में धकेल दिया।
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जिस स्थान पर यह हादसा हुआ वहां की भौगोलिक स्थिति भी काफी चुनौतीपूर्ण है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह यू-मोड़ पहले भी कई वाहनों के लिए परेशानी का सबब रहा है। यहां मोड़ काफी लंबा और तीखा है। यहां भारी वाहनों को बहुत धीमी गति की जरूरत होती है। लोगों ने कहा कि अगर वहां सड़क किनारे क्रैश बैरियर होते, तो शायद बस खाई में गिरने से बच जाती।
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हादसे में घायलों ने बताया कि बस के अंदर तिल धरने की जगह नहीं थी। दर्जनों लोग खड़े होकर सफर कर रहे थे। पहाड़ी रास्ते पर बस में इतना भार लदा होना भी आत्मघाती साबित हुआ। इस सबके बीच चालक बस को तेज रफ्तार से चला रहा था। ढलान पर मोड़ते समय बस का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया।
कुछ घायलों का दावा है कि हादसे से ठीक पहले उन्होंने एक जोरदार धमाका सुना था। उनके मुताबिक ओवरलोडिंग और ढलान के दबाव के कारण बस का एक टायर फट गया था जिसके बाद बस अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गई। हालांकि पुलिस टीमें इस पहलू की जांच कर रही हैं।
'ऐसी लापरवाही रोज देखने को मिलती है'
स्थानीय निवासी प्रीतम चंद, शाम सिंह और रमेश कुमार का दावा है कि उधमपुर-रामनगर मार्ग पर यात्री वाहन चालकों की लापरवाही हर रोज देखने को मिलती है। सुबह के समय स्कूल-कालेज के छात्रों सहित कर्मचारियों की आवाजाही अधिक होती है। सीटें भर जाने के बावजूद सवारियों को ठूंस-ठूंसकर भरा जाता है। अगर समय रहते और नियमित रूप से विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती तो आज 21 लोगों के परिवारों में मातम नहीं छाता। उन्होंने सेना के जवानों का आभार व्यक्त किया जो मौके पर पहुंच गए और अधिक से अधिक लोगों को बचाने का प्रयास किया।

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