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Udhampur News: प्रतिबंधित प्लास्टिक की ब्रिकी पर प्रशासन सख्त

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उधमपुर। शहर में बढ़ते पॉलीथीन प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग के साथ मिलकर व्यापक जांच अभियान शुरू कर दिया है। विभाग की टीमें बाजारों, दुकानों, गोदामों और थोक विक्रेताओं की जांच कर रही हैं तथा प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री के स्रोतों का पता लगाने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब प्लास्टिक प्रतिबंध केवल नारों और जागरूकता अभियानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू किया जाएगा।

शुक्रवार को बाजार खुलने के बाद एडीडीसी जुगल किशोर की अगुवाई में प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में पहुंचकर दुकानों की जांच की। इस दौरान विशेषतौर पर थोक विक्रेताओं को सख्त हिदायत दी गई और कुछ दुकानदारों को जुर्माना भी लगाया गया।
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विभाग के अनुसार 120 माइक्रोन से अधिक मोटाई वाले तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप स्टांपिंग युक्त प्लास्टिक कैरी बैग ही उपयोग के लिए अनुमत हैं। इसके विपरीत 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले सभी प्लास्टिक बैगों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है। अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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एडीडीसी जुगल किशोर ने बताया कि पूरा शहर पाॅलीथिन के कचरे से भर चुका है, जगह जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इससे न केवल शहर का सौंदर्य प्रभावित हो रहा है बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। नालियों के जाम होने, आवारा पशुओं द्वारा प्लास्टिक निगलने तथा भूमि और जल स्रोतों के प्रदूषित होने की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। इसलिए प्रशासन का प्रयास है कि प्रतिबंध लगने के बावजूद शहर में इसके पहुंचने का सोर्स पता लगाकर उस पर रोक लगाई जाए ताकि शहर में लगातार बढ़ रही इस समस्या पर काबू पाया जा सके।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत कचरे के पृथक्करण, संग्रहण और वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया है। स्थानीय निकायों के साथ मिलकर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग का मानना है कि केवल सरकारी कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है।
अधिकारियों ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। उनका कहना है कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करे, कपड़े या जूट के थैलों को अपनाए तथा कचरे को निर्धारित स्थानों पर ही डाले। यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो शहर को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त बनाया जा सकता है। आने वाले दिनों में अभियान को और तेज किया जाएगा तथा उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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