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Udhampur News: घर-घर पहुंच रहा टीबी मुक्त अभियान, छुआछूत जैसे भ्रम से मिल रही निजात
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उधमपुर। जिले में टीबी (क्षय रोग) के विरुद्ध छेड़ा गया अभियान अब जन आंदोलन का रूप ले रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें दुर्गम क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर न केवल मरीजों की पहचान कर रही हैं बल्कि बीमारी से जुड़े छुआछूत जैसे सामाजिक भ्रम को दूर करने में भी सफल साबित हो रही हैं। टीबी दिवस के अवसर पर जिले में जागरूकता गतिविधियों को और तेज कर दिया गया है।
शहर में जागरूकता वाहन भी चलाया जाएगा जिसमें घोषणा के माध्यम से टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज की जानकारी दी जाएगी। कभी टीबी को एक कलंक मानकर छिपाया जाता था लेकिन 2024 के बाद शुरू हुए अभियान ने लोगों की सोच बदल दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों के कारण अब लोग लक्षण दिखने पर बिना किसी डर के खुद आगे आकर जांच करवा रहे हैं। विभाग की टीमें भारी जोखिम उठाकर दूरदराज के इलाकों में पहुंच रही हैं, ताकि संक्रमण को समय रहते फैलने से रोका जा सके। अब तक करीब 1348 मामले सामने आ चुके हैं। जरूरतमंदों को मुफ्त दवा व उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
10 मार्च तक जिले भर में किए गए कार्यों के आंकड़े
स्क्रीनिंग: 1,33,828 (1.33 लाख से अधिक)
नोटिफाइड मरीज: 1,348
उपचाराधीन मरीज: 396
रोग मुक्त हुए लोग: 300
ब्लॉक अनुसार स्थिति
ब्लॉक
स्क्रीनिंग
पहचाने गए मरीज
मजालता
14,000
78
टिकरी
8,241
329
बसंतगढ़
4,892
102
चिनैनी 3,926
316
रामनगर
3,577
385
पंचैरी
4,776
138
इन लक्षणों पर रखें नजर और करें सहयोग
जिला टीबी अधिकारी अनिल सलोच ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लक्षण दिखें तो उन्हें तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध मुफ्त जांच सुविधा का लाभ उठाना चाहिए। सात दिन से अधिक लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ या बलगम में खून आना और अचानक वजन कम होने को नजरअंदाज न करें। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी मरीजों के प्रति भेदभाव न करें बल्कि उनका सहयोग करें। उन्हें पौष्टिक आहार जैसे फल, दाल आदि उपलब्ध कराएं जिससे उनकी जल्द रिकवरी हो सके। नियमित और पूर्ण इलाज से टीबी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
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शहर में जागरूकता वाहन भी चलाया जाएगा जिसमें घोषणा के माध्यम से टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज की जानकारी दी जाएगी। कभी टीबी को एक कलंक मानकर छिपाया जाता था लेकिन 2024 के बाद शुरू हुए अभियान ने लोगों की सोच बदल दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों के कारण अब लोग लक्षण दिखने पर बिना किसी डर के खुद आगे आकर जांच करवा रहे हैं। विभाग की टीमें भारी जोखिम उठाकर दूरदराज के इलाकों में पहुंच रही हैं, ताकि संक्रमण को समय रहते फैलने से रोका जा सके। अब तक करीब 1348 मामले सामने आ चुके हैं। जरूरतमंदों को मुफ्त दवा व उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
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10 मार्च तक जिले भर में किए गए कार्यों के आंकड़े
स्क्रीनिंग: 1,33,828 (1.33 लाख से अधिक)
नोटिफाइड मरीज: 1,348
उपचाराधीन मरीज: 396
रोग मुक्त हुए लोग: 300
ब्लॉक अनुसार स्थिति
ब्लॉक
स्क्रीनिंग
पहचाने गए मरीज
मजालता
14,000
78
टिकरी
8,241
329
बसंतगढ़
4,892
102
चिनैनी 3,926
316
रामनगर
3,577
385
पंचैरी
4,776
138
इन लक्षणों पर रखें नजर और करें सहयोग
जिला टीबी अधिकारी अनिल सलोच ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लक्षण दिखें तो उन्हें तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध मुफ्त जांच सुविधा का लाभ उठाना चाहिए। सात दिन से अधिक लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ या बलगम में खून आना और अचानक वजन कम होने को नजरअंदाज न करें। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी मरीजों के प्रति भेदभाव न करें बल्कि उनका सहयोग करें। उन्हें पौष्टिक आहार जैसे फल, दाल आदि उपलब्ध कराएं जिससे उनकी जल्द रिकवरी हो सके। नियमित और पूर्ण इलाज से टीबी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।