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जम्मू और कश्मीर

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शनि अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण के समय करें पंच दान, होगा हर समस्या का समाधान - 4 दिसम्बर, 2021
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शनि अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण के समय करें पंच दान, होगा हर समस्या का समाधान - 4 दिसम्बर, 2021

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आजाद ने केंद्र पर साधा निशाना: केंद्र शासित प्रदेश बनने से डीजीपी थानेदार और मुख्य सचिव हो गए पटवारी, ठंड के बाद कराएं चुनाव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया फरवरी माह तक पूरी कर सर्दियों के तुरंत बाद विधानसभा चुनाव कराने चाहिए। वह शनिवार को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के देवसर में एक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि सर्दियों में चुनाव कराना संभव नहीं है। अगले चार महीनों के लिए अगर केंद्र कहता भी तो हम हां नहीं करते। हम सभी ने जून में प्रधानमंत्री के साथ हुई सर्वदलीय बैठक में कहा था कि पहले राज्य का दर्जा बहाल किया जाए और फिर परिसीमन किया जाए।

आजाद ने कहा कि हमारी प्राथमिकता यह नहीं है कि कौन मुख्यमंत्री बने, हमारी प्राथमिकता है कि जम्मू-कश्मीर में 4 अगस्त 2019 की स्थिति को कैसे बहाल किया जाए। यह सिर्फ पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और फिर विधानसभा चुनाव कराने से होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए कोई लड़ाई नहीं है। जम्मू में हिंदू, सिख, कश्मीर में मुसलमान और यहां तक कि पंडित भी राज्य का दर्जा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी को यह नहीं मानना चाहिए कि केवल कश्मीरी ही राज्य का दर्जा चाहते हैं। हमने सर्वदलीय बैठक में भी कहा है कि भाजपा के नेता भी राज्य का दर्जा चाहते हैं।



डीजीपी बना थानेदार और मुख्य सचिव हो गया पटवारी
आजाद ने कहा कि राज्य का दर्जा खत्म कर यहां के लोगों को कमजोर किया गया। कहा, किसी केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा मिलता है, लेकिन यहां तो इसके विपरीत हुआ, राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। यह तो वैसे ही हुआ जैसे डीजपी को थानेदार और मुख्य सचिव को पटवारी बना दिया जाए।

हैदरपोरा मुठभेड़ की जांच वर्तमान जज से कराएं
सुरक्षा बलों द्वारा की गई मुठभेड़ों पर उठाए जा रहे सवालों के बारे में कांग्रेस नेता ने कहा कि सुरक्षा बलों को नागरिक क्षेत्रों में सावधानी बरतनी चाहिए ताकि कोई नागरिक हताहत न हो। वह मेडल के लिए किसी निर्दोष को गोली का निशाना न बनाएं। हैदरपोरा मामले में सरकार को किसी वर्तमान जज से जांच करवानी चाहिए। सुरक्षाबल जब भी किसी जगह जाते हैं कि जहां आतंकवादी छुपे होते हैं उस घर को भी नही बख्शा जाता। उन घरवालों की क्या गलती है। आतंकी किसी घर में घुस जाएं तो घरवालों का क्या कसूर। अब हर कोई डरता है, कोई बात करता है तो उसे जेल जाना पड़ता है। बेकसूर लोगों के मारे जाने से आतंकवाद बढ़ेगा।

आतंकवाद प्रभावित इलाकों का दौरा करें नेता
आजाद ने पार्टी के नेताओं से लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए घाटी के आतंकवाद प्रभावित इलाकों का दौरा करने की भी अपील की। कहा-कुलगाम, शोपियां और पुलवामा के तीन जिलों में आतंकवाद है। वे पहले भी उग्रवाद देख चुके हैं। उन्हें प्रोत्साहित करने, उनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत है यहां के लोगों को यह न लगे कि उनका कोई नहीं है। इस इलाके में तीन साल बाद कांग्रेस ने किसी राजनीति कार्यक्रम का आयोजन किया था।
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जम्मू-कश्मीर: वाहन दुर्घटना में मारे गए परिवार को न्याय मिलने में देरी पर अदालत ने माफी मांगी, बीमा कंपनी में तुरंत भुगतान करने का दिया आदेश 

मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) कुलगाम ने शुक्रवार को 13 साल पहले एक वाहन दुर्घटना में जान गंवाने वाले एक मजदूर के परिवार से फैसले में हुई देरी के लिए माफी मांगी है। साथ ही बीमा कंपनी को पहले दी गई आर्थिक मदद के अलावा 1293040 रुपये (बारह लाख, तिरानबे हजार,चालीस रुपये)की राशि दावे की तारीख से 8 फीसदी ब्याज के साथ प्रभावित परिवारों को देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पैसे का भुगतान मृत मजदूर के कानूनी वारिस को किया जाएगा।

अदालत ने कहा, इस दावा याचिका के निपटान में देरी को सही ठहराने का कोई प्रयास किए बिना यह न्यायाधिकरण पीड़ित परिवार से याचिका के निपटान में देरी के कारण हुई लंबी पीड़ा के लिए माफी मांगता है। कुलगाम के एक मजदूर की वर्ष 2009 में एक वाहन दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उसके परिवार में विधवा पत्नी के अलावा पांच बच्चे थे। परिवार ने मुआवजे के लिए फरवरी 2011 में ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया, लेकिन मुआवजे की राशि उसे अभी तक नहीं मिली। 

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे विलियम इवर्ट ग्लैडस्टोन का उल्लेख किया 
एसएसीटी के पीठासीन अधिकारी ताहिर खुर्शीद ने मामले की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को कहा कि इस तरह के मामलों को अधिकतम छह माह की अवधि में निपटा दिया जाना चाहिए। परंतु विभिन्न कारणों से ऐसा नहीं हो पाया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुलगाम ने एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी के रूप में 1868 से 1894 तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे विलियम इवर्ट ग्लैडस्टोन का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय में देरी का मतलब है न्याय से वंचित रखना, और यहां मुझे यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि एक विधवा और पांच अनाथ बच्चों की ओर से दायर मुआवजे के लिए दाखिल तत्काल दावा याचिका उक्त उद्धरण के समर्थन में उद्धृत किया जाने वाला एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
 
लारवाही ने मौत के एक साधारण मामले को बनाया जटिल 
कोर्ट ने कहा कि लापरवाही से मौत के एक साधारण मामले को इतने सालों में इतना जटिल बना दिया गया कि समय पर मामले का निपटारा नहीं हो सका और मृतक परिवार को 11साल के लंबे समय तक कष्टों को भुगतना पड़ा। लेकिन परिवार हादसे के बाद इतने लंबे समय तक कैसे जीवित रहा यह महसूस करना काफी दर्दनाक है। समय को पीछे ले जाने पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है, और न ही दुनिया में कोई भी ऐसा दावा कर सकता है। बीते समय को दोहराया नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा- यह उस बहती नदी की तरह है जिसका पानी आप दो बार नहीं छू सकते। 
 
सांविधानिक दिवस के शुभ अवसर पर सुनवाई 
अदालत ने कहा, इस दावा याचिका के निपटान में देरी को सही ठहराने का कोई प्रयास किए बिना यह न्यायाधिकरण पीड़ित परिवार से याचिका के निपटान में देरी के कारण हुई लंबी पीड़ा के लिए माफी मांगता है। कोर्ट ने कहा कि हालांकि कानूनी पेचीदगियों के जाल में मामले को प्रतीक्षा में रखने के लिए अभी भी प्रयास किया जा रहा था, लेकिन अब उसने बीमा कंपनी के किसी भी प्रयास को सफल होने की अनुमति नहीं दी। इसका तार्किक अंत संयोग से सांविधानिक दिवस के शुभ अवसर पर तय किया जा रहा है।
 
आज भारत के संविधान को अपनाने का दिन है जो अपने नागरिकों को त्वरित, सामाजिक और आर्थिक न्याय प्रदान करता है। कोर्ट ने कहा, जब किसी भी परिवार का कमाने वाला एक दुर्घटना में मर जाता है, तो यह पीड़ित के परिवार को भावनात्मक और आर्थिक रूप से तोड़ देता है। इस अवधि में एक प्रश्न सबसे गंभीरता के साथ सामने आता है कि जीवित कैसे रहें? यह बहुत ही विकट और दयनीय स्थिति थी।

मोटर वाहन अधिनियम का उद्देश्य, पीड़ित पक्ष को जल्द न्याय मिले
कोर्ट ने कहा कि शोक संत्पत परिवारों को जीवित रहने के लिए विधायिका ने मोटर वाहन अधिनियम कानून वर्ष 1988 (एमवीएसीटी) में लागू किया। यह उन परिवारों के लिए था जिन्होंने अपने प्रियजनों और एक मात्र कमाने वाले को मोटर दुर्घटना में खो दिया। इसका उद्देश्य था कि इस विषम स्थिति में प्रभावित परिवारों को समय पर मुआवजा मिल सके। निश्चित रूप से यह किसी के जीवन की भरपाई नहीं कर सकता परंतु उनके कुनबे को सुरक्षित रह सकता है जो परिवार सम्मान से जीना चाहते हैं।

अधिनियम का वास्तविक सार यह है कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द मुआवजा प्रदान मिले अन्यथा इस कानून का पूरा उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। हर दिन जो मृतक परिवार की दबाव की जरूरतों को पूरा करने के लिए जेब में एक पैसा के बिना गुजरता है, वह अधिनियम की विफलता है और अपने संविधान में कल्याणकारी देश का अपने नागरिकों को उनके सामाजिक और आर्थिक न्याय को सुरक्षित करने का वादा है।
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जम्मू-कश्मीर: शीत लहर की चपेट में जम्मू, न्यूनतम तापमान 9.7 डिग्री, कश्मीर में पारा शून्य से नीचे

जम्मू-कश्मीर में साफ मौसम के बीच घाटी शीत लहर की चपेट में हैं। यहां पर रात का न्यूनतम तापमान 9.7 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है। दिन में मौसम साफ रहने से धूप निकलने से जहां कुछ राहत मिल रही है वहीं, रात को ठंडी हवाएं चलने से ठिठुरन बढ़ने लगी है। वहीं, शुक्रवार को सुबह के समय धुंध भी पड़ी रही, जिस कारण वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।

उधर, श्रीनगर संभाग के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे होने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में जलस्थल जमने लगे हैं। लेह और कारगिल में सबसे अधिक ठंड पड़ रही है। मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार आगामी दिनों में मौसम साफ रहेगा, लेकिन तापमान में गिरावट आएगी। राजधानी श्रीनगर में बीती रात न्यूनतम तापमान माइनस 1.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पहलगाम में रात का पारा माइनस 3.3 और गलमर्ग में माइनस 1.8 डिग्री रहा। 

जम्मू में दिनभर मौसम साफ रहने के साथ ठंडक का अहसास बढ़ा है। जिले में सुबह और रात में सर्द हवाएं परेशान कर रही हैं। यहां दिन का तापमान 23.5 और बीती रात का न्यूनतम तापमान 9.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। संभाग के बनिहाल में बीती रात का न्यूनतम तापमान 5.8, बटोत में 5.7, कटड़ा में 9.2 और भद्रवाह में 2.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लेह में बीती रात का न्यूनतम तापमान माइनस 7.5 और दिन का पारा 5.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 
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केंद्र पर निशाना: जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला बोले- खोखले निकले सारे वादे, पैर पसार रहा आतंकवाद

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने डोडा जिले में जनसभा के दौरान केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद दावे किए जा रहे थे कि अंबानी, टाटा और बिड़ला जम्मू-कश्मीर में निवेश करेंगे। जिससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे। लेकिन अभी तक ऐसा कुछ हुआ नहीं। जो परियोजनाएं चल रही हैं उनमें भी स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है।

इसके बाद आतंकवाद को लेकर भी उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमारे शासन के दौरान जिन इलाकों से आतंक का सफाया हुआ था, वहां आतंकवाद फिर से बढ़ रहा है। ये आतंकवादी बाहर से नहीं आए हैं, बल्कि कश्मीर के युवा हैं जो गुस्से और अन्य कारणों से हथियार उठाने को तैयार हैं।
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उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो) उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो)

आतंकियों के खात्मे के लिए विशेष रणनीति: नागरिकों के सभी हत्यारे मारे गए, जानिए क्या है सर्जिकल ऑपरेशन?

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबल विशेष रणनीति के तहत ऑपरेशन चला रहे हैं। पिछले महीने आतंकी हमलों में मारे गए नागरिकों की हत्या में शामिल लगभग सभी आतंकियों का खात्मा किया जा चुका है। सुरक्षाबल खुफिया आधारित सर्जिकल ऑपरेशन के तहत काम कर रहे हैं, जिसमें आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए छोटी टीमें बनाई गई हैं। 

सूत्रों का कहना है कि आतंकवाद से निपटने में पुलिस, खुफिया एजेंसियों और सेना के बीच बेहतर तालमेल के एक ढांचे का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य आतंकियों के खात्मे के साथ अवाम को सुरक्षित रखना है। ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए स्थानीय आबादी को भरोसे में रखना भी प्राथमिकता है।

पिछले तीन वर्षों में सुरक्षाबलों ने न्यूनतम क्षति सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए। इसी का परिणाम है कि 2018 की तुलना में तीन सालों में नागरिकों को कम क्षति पहुंची। डीजीपी दिलबाग सिंह ने गुरुवार को कहा कि हैदरपोरा मुठभेड़ की जांच से पता चलता है कि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में आतंकवादियों को एक नेटवर्क का समर्थन प्राप्त था।

उधर, सुरक्षाबलों को जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में स्थानीय लोगों से कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी सहित समर्थन मिल रहा है क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे झूठे प्रचार को खारिज कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में स्थिति नियंत्रण में है। 2018 में आतंक से संबंधित 318 घटनाओं की तुलना में 2021 में केवल 121 घटनाएं दर्ज की गईं। 2019 में जहां 202 पथराव की घटनाएं हुईं, वहीं 2021 में केवल 39 मामले दर्ज किए गए।
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अमर उजाला संवाद: जम्मू-कश्मीर के युवाओं के हुनर को सोशल मीडिया ने दिला दी पहचान, आज दुनिया में नाम

अगर आप में हुनर है और कुछ हटकर करने का जनून है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आपको नई पहचान दिलाने को तैयार है। हुनर के दम पर जम्मू के कई युवा आज सोशल मीडिया मंच पर स्टार बन गए हैं। कोई पढ़ रहा है तो कोई नौकरी कर रहा है। शौक को करिअर बनाने वाली इन प्रतिभाओं के आज लाखों फैन हैं। ट्रेवलिंग-फूड, फिटनेस, फैशन, संस्कृति, संगीत और अभिनय से जुड़े ये युवा फेसबुक, इंस्टाग्राम व यू-ट्यूब पर मनोरंजन के साथ जन सरोकार के मुद्दे भी उठा रहे हैं। जम्मू की लोक संस्कृति को नई पहचान दिला रहे ये सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर पैसा भी कमा रहे हैं। अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में सोशल मीडिया मंच के इन सितारों ने कहा कि मेहनत और समर्पण के साथ किए काम को दुनिया हाथों हाथ लेती है।

गायकी का शौक था, सोशल मीडिया ने साकार किया सपना 
अपनी आवाज का जादू बिखेर रही जम्मू दी कुड़ी के नाम से मशहूर वर्षा जमवाल के वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों लोग पसंद कर रहे हैं। भजन गायकी से संगीत की दुनिया का सफर शुरू करने वाली वर्षा संगीत में एमए की पढ़ाई कर रही हैं। उनका कहना है कि बचपन से गाने का शौक था। माता के भजन गाने से शुरू हुआ सफर आज उन्हें पेशेवर गायक बना चुका है। पहले अवसर नहीं मिलते थे, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने उन्हें नई पहचान दिला दी। इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर उनके आज लाखों फैन हैं। वर्षा ने कहा कि मातृभाषा डोगरी उनकी प्राथमिकता रही है। भविष्य में भी वह डोगरी के लिए काम करती रहेंगी।
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जम्मू-कश्मीर: डीसी पहुंचे राजोरी थाने का निरीक्षण करने, डेढ़ घंटे के बाद गेट खुला तो रह गए हक्के-बक्के 

पुलिस थाने में औचक निरीक्षण करने पहुंचे राजोरी के जिला मजिस्ट्रेट और जिला उपायुक्त राजेश कुमार शवन को थाने के भीतर जाने के लिए गेट पर डेढ़ घंटा इंतजार करना पड़ा। यह घटना शनिवार शाम की है। डीसी के साथ अतिरिक्त उपायुक्त और एसीआर भी मौजूद थे। बाद में अतिरिक्त एसपी ने मौके पर पहुंचकर जिला उपायुक्त को थाने में प्रवेश दिलाया।

घटनाक्रम के पीछे माजरा क्या था, इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन पुलिस ने दावा किया है कि अधिकारी ड्यूटी पर अलग-अलग जगह पर थे। डीसी कुछ देर से थाने में जरूर गए लेकिन पुलिस की सराहना करके लौटे। उपायुक्त राजेश कुमार शवन शनिवार शाम करीब 7.00 बजे थाने का निरीक्षण करने पहुंच गए, लेकिन उन्हें राजोरी थाने में निरीक्षण के लिए जाने नहीं दिया गया।

मौके पर कुछ लोग भी जमा गए, इससे खबर अन्य लोगों तक पहुंच गई। करीब डेढ़ घंटे बाद एडिशनल एसपी विवेक शेखर शर्मा मौके पर पहुंचे और उपायुक्त को अपने साथ थाने के अंदर ले गए। कुछ जानकारों ने बताया कि एसएचओ ने डीसी को रोका तो इसका कारण है कि थाने के अंदर जरूर कुछ ऐसा काम हो रहा था जो नहीं होना चाहिए।
 
वहीं घटना पर प्रतिक्रिया से अधिकारी घंटों बचते रहे। हालांकि बाद में एएसपी ने कहा कि जिला उपायुक्त थाने में गए थे। उन्होंने निरीक्षण कर बाकायदा पुलिस की प्रशंसा भी की।
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जम्मू-कश्मीर: नवंबर में कोरोना से मौतें बढ़ीं, घाटी में आरटीपीसीआर टेस्टिंग में की गई बढ़ोतरी 

Rajori Police Station।
जम्मू-कश्मीर में कोविड संक्रमित मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। इस वर्ष जुलाई के बाद नवंबर में कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़ी है। प्रदेश प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई को सात संक्रमित मरीजों की मौत हुई, जिसके बाद इसमें कमी आई। लेकिन अब नवंबर से जैसे-जैसे संक्रमित मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, वैसे ही मौतें भी बढ़ने लगी हैं। घाटी में बीते 24 घंटों के दौरान तीन संक्र्रमित मरीजों की मौत हुई है। 

बूस्टर डोज लगाने पर भी दिया जा रहा जोर
इनमें श्रीनगर, बारामुला और बांदीपोरा जिले में एक-एक मौत हुई है। पहली नंवबर को भी चार कोविड मरीजों ने दम तोड़ा था। जबकि अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में औसतन यह संख्या प्रतिदिन एक या दो के बीच दर्ज की जा रही थी। बढ़ते मामलों पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने अधिक टेस्टिंग और बूस्टर डोज पर जोर दिया है। जिला प्रशासन ने श्रीनगर के कई अस्पतालों में आरटीपीसीआर टेस्टिंग दोबारा से शुरू की है। पीजीआई चंडीगड़ द्वारा अब श्रीनगर में स्थित जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल अस्पताल को भी आरटीपीसीआर टेस्ट करने की अनुमति दी है। इसके साथ अब बूस्टर डोज लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है। 

जीएमसी श्रीनगर के एचओडी कम्यूनिटी मेडिसन डॉ. मोहम्मद सलीम के अनुसार कोविड खुराक ले चुके लोगों में संक्रमण पाया जाना और उनमें एंटी बॉडी की कमी को देखकर केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग को बूस्टर डोज पॉलिसी लेकर आने की आवश्यकता है।
बीते 24 घंटें में घाटी में सामने आए कोविड के 119 मामलों में से श्रीनगर से 42, बारामुला से 23, बडगाम से 19, कुपवाड़ा से 13, बांदीपोरा से सात, गांदरबल से आठ, पुलवामा से चार, अनंतनाग से दो, कुलगाम एक और शोपियां से कोई मामला नहीं है।

 बीते 24 घंटों में कोविड से तीन मरीजों की गई जान, 149 संक्रमित मामले 
जम्मू-कश्मीर में कोविड से मौतों के उछाल ने स्वास्थ्य विभाग और प्रदेश प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बीते कुछ समय से कोरोना से मरने वाले अधिकांश मरीजों ने कोविड की दोनों खुराक ले रखी थी। लेकिन उनमें अन्य शारीरिक समस्याओं के कारण बचाया नहीं जा सका। नई मौतों के मामले में अधिकांश की उम्र 45 से 75 के बीच है। कश्मीर में शनिवार दूसरे दिन भी तीन लोगों की कोरोना से मौत हो गई। यहां मौतों का औसतन आंकड़ा बढ़ रहा है। बीते 24 घंटों के भीतर प्रदेश में 149 नए संक्रमित मामले मिले हैं, जिसमें श्रीनगर से सर्वाधिक 42 मामले हैं। 

कश्मीर के कई जिलों में सामुदायिक स्तर पर संक्रमण का प्रसार कायम
कश्मीर के कई जिलों में सामुदायिक स्तर पर संक्रमण का प्रसार कायम है। जिला जम्मू में नौ लोग संक्रमित हुए हैं। जीएमसी के माइक्रोबायोलाजी विभाग के सोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप डोगरा के अनुसार यह जरूरी नहीं कि कोविड टीके की दोनों खुराक लेने वाले को संक्रमण नहीं होगा, लेकिन उन पर संक्रमण का प्रभाव कम रहेगा। जिन लोगों ने एक बार टीकाकरण करवाया है, उन्हें निर्धारित समय पर दूसरी खुराक जरूर लगवानी चाहिए।

एहतियात बरतने की जरूरत
अब तक जिन लोगों ने कोई टीकाकरण नहीं कराया है, वे खुद के साथ दूसरों के लिए संक्रमण के लिहाज से खतरा बन सकते हैं। दोनों डोज ले चुके हृदय, मधुमेह सहित अन्य गंभीर शारीरिक समस्या वाले लोगों को अधिक एहतियात बरतने की जरूरत है। अगर उन्हें संक्रमण होता है तो उनके किसी अहम अंग को ज्यादा नुकसान होने का खतरा रहता है। मौजूदा डेल्टा और डेल्टा प्लस म्यूटेशन अधिक प्रभावी हैं।
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जम्मू-कश्मीर: पंचायत घरों में बनेंगे आधार और मनरेगा कार्ड, पहले चरण में 1508 पंचायतों में खुलेंगे सामुदायिक सेवा केंद्र 

जम्मू-कश्मीर में पंचायत स्तर पर नई पहल के तहत सरकार 1508 पंचायत घरों में सामुदायिक सेवा केंद्र खोलेगी। इससे ग्रामीणों को आधार कार्ड बनवाने, आधार कार्ड या मनरेगा जॉब कार्ड आदि में त्रुटि होने पर इसे दुरुस्त करवाने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। पंचायत घर में ही सारी सेवाएं उपलब्ध होंगी।

इसके लिए सीएससी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ सरकार ने समझौता किया है। जम्मू-कश्मीर पंचायतीराज विभाग के निदेशक राकेश सरंगल के अनुसार पहले चरण में 1508 पंचायत घरों में सामुदायिक सेवा केंद्र खोले जाएंगे। इस परियोजना के तहत गांव के बाहर खिदमत केंद्रों को पंचायत घर में शिफ्ट किया जाएगा। 
 
इससे ग्रामीणों को अपने गांव में ही सभी प्रकार की सुविधाएं हासिल हो सकें। इसके लिए सरकार को अतिरिक्त कर्मचारी की नियुक्ति करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। खिदमत केंद्रों का स्टाफ ही पंचायत घरों से काम करेगा। सरकार इसके लिए सुविधाएं जरूरी उपलब्ध करवाएगी। 

ये सुविधाएं मिलेंगी
सामुदायिक सेवा केंद्र में दो लैपटॉप, एक डेस्कटॉप, एक जीरॉक्स मशीन, एक जेनसेट, ऑल इन वन प्रिंटर, पीवीसी प्रिंटर, एफटीटीएच कनेक्शन, बायो मीट्रिक डिवाइस, वाटर प्यूरिफायर, सभी कमरों में पंखे मुहैया करवाए जाएंगे। इस संबंध में सरकार की तरफ से जिला स्तर पर कमेटियों का गठन किया गया हैं। अतिरिक्त जिला उपायुक्त स्तर के अधिकारी को अध्यक्ष बनाया गया है। जिला सूचना अधिकारी, जिला पंचायत अधिकारी, संबंधित ब्लाक विकास अधिकारी कमेटी के सदस्य बनाए गए हैं, जिनकी देखरेख में प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 
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रोजगार: जम्मू-कश्मीर में बढ़ेगा घरेलू उत्पादों का निर्यात, श्रीनगर में 15 दिन में कारगो टर्मिनल खोलने की तैयारी 

जम्मू-कश्मीर में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए निर्यात गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। श्रीनगर में अगले 15-20 दिन में कारगो टर्मिनल को शुरू किया जा रहा है। इसमें अधिक उड़ानों के लिए रास्ता खुल जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घरेलू निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ लुल्लू समूह की ओर से श्रीनगर से दुबई के लिए चार दिसंबर को पहली खेप भेजी जा रही है। 

श्रीनगर में टर्मिनल पर काम किया जा रहा है। टर्मिनल शुरू होने से घरेलू सामान को वहां रखा जा सकेगा। निर्यात गतिविधियों में घाटी से कृषि और बागवानी पर अधिक ध्यान केंद्रित होगा। बाहरी निर्यात को आकर्षित करने के लिए सब्सिडी का प्रावधान भी रखा गया है। प्रदेश में निर्यात के लक्ष्य को 1500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5000 करोड़ करने पर लक्ष्य निर्धारित किया है।

इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में सस्ती बिजली उपलब्ध करवाने पर काम किया जा रहा है। प्रदेश में आने वाले समय में स्मार्ट फैकटिरयां के लिए सस्ती बिजली की उपयुक्त जगह दी जाएगी। केंद्र के प्रयासों के बीच जम्मू कश्मीर की ओर से 400 बिलियन डालर निर्यात के लक्ष्य में सहयोग देने पर काम किया जा रहा है।

जम्मू कश्मीर में अब तक 29 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं और दिसंबर तक इसे 35 हजार करोड़ करने का लक्ष्य है, इसी तरह  मार्च 2022 तक यह आंकड़ा 50 हजार करोड़ तक करने का लक्ष्य है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रधान प्रमुख रंजन प्रकाश ठाकुर ने कहा कि निर्यात गतिविधियों को बढ़ाया जा रहा है। इसमें श्रीनगर और जम्मू से प्रमुख रूप से नई पहल की जा रही है। इसके लिए हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। इससे घरेलू उत्पादों की मांग बढ़ेगी।
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जम्मू-कश्मीर:  अवंतीपोरा में आतंकियों के दो मददगार गिरफ्तार, एके-47 के 383 कारतूस और गोला बारूद बरामद

जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर अवंतीपोरा में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) के दो आतंकी मददगारों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से गोला-बारूद और अन्य सामग्री भी बरामद की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एक अधिकारी ने बताया कि अवंतीपोरा पुलिस ने सेना की 42 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) और सीआरपीएफ की 130 बटालियन के जवानों के साथ मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान शनिवार को आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े दो आतंकी मददगारों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मुजम्मिल अयूब भट पुत्र मोहम्मद अयूब भट और सुहेल मंजूर मोहंद पुत्र मंजूर अहमद मोहंद के रूप में हुई है।

दोनों शाहाबाद खारपोरा बाला लालगाम (अवंतीपोरा) के निवासी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से एके-47 के 383 कारतूस सहित गोला-बारूद बरामद हुआ है। पकड़े गए दोनों आरोपी एचएम कमांडरों के संपर्क में थे और हथियार व गोला-बारूद एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में सक्रिय थे। इसके अलावा आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए आश्रय और अन्य रसद सहायता भी आतंकियों को पहुंचाते थे।  
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जम्मू-कश्मीर: फर्जीवाड़ा कर 98 हजार परिवार ले रहे थे सरकारी राशन, सरकार को लग रही थी 20 करोड़ की 

प्रदेश में फर्जीवाड़ा कर सरकारी डिपो से राशन ले रहे 98 हजार परिवारों के डुप्लीकेट कार्ड सूची से काट दिए गए हैं। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने इसकी फाइनल सूची भी जारी कर दी है। इसी के आधार पर अब लोगों को राशन मुहैया करवाया जाएगा। विभाग की ओर से करवाए गए सर्वे में पता चला था कि कई लोग एक शहर से दूसरे शहर में नौकरी कर रहे हैं और दोनों शहरों में राशन ले रहे हैं।

इतना ही नहीं दूसरे प्रदेश में ब्याही गई लड़कियों के नाम का राशन भी उनके परिवार वाले ले रहे हैं। इसके अलावा बाहरी राज्यों से यहां नौकरी की तलाश में आए लोगों ने भी डिपो होल्डरों से मिलकर अपने राशन कार्ड बनवा लिए थे। इससे सरकार को हर माह राशन वितरित में 20 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था।  आधार सीडिंग के दौरान उपभोक्ताओं के अंगूठे के निशान और अन्य जानकारियां ऑनलाइन अंकित की गईं।

कई लोगों ने फायदे के चक्कर में दूसरी जगह पर भी आधार कार्ड जमा करवाकर डुप्लीकेट राशन कार्ड बनवा लिए थे। ऐसे में डबल एंट्री दर्शाई गई। बाद में इस पर जांच शुरू हुई। जांच में प्रदेश में 98 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं के डुप्लीकेट राशन कार्ड मिले, जिन्हें अब काट दिया है। पहले विभाग ने इस मामले में एफआईआर करने के निर्देश दिए थे। हालांकि अभी तक किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई है।

बाहरी राज्यों के लोगों पर होगी अब कार्रवाई
अब दूसरे राज्यों से प्रदेश में रह रहे राशन कार्ड धारकों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। मौजूदा समय में दूसरे राज्यों के लोगों ने जेएंडके से भी राशन कार्ड बनवाए हैं। जबकि दूसरे राज्यों में भी ये लोग राशन ले रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को चिह्नित किया जा रहा है। दूसरे राज्यों से भी रिकॉर्ड मांगा गया है।
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जम्मू-कश्मीर: ग्रामीण क्षेत्रों में गैरहाजिर शिक्षकों की खैर नहीं, अब पंचायत सदस्य करेंगे प्राइमरी स्कूलों की निगरानी

जम्मू-कश्मीर ग्रामीण क्षेत्र में तैनात शिक्षक अब बिना अधिकृत अवकाश के ड्यूटी से गैरहाजिर नहीं रह सकेंगे। स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति पर निगरानी रखने का जिम्मा स्कूल शिक्षा विभाग ने पंचायत सदस्यों को सौंपा है। ये सदस्य स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति के साथ-साथ विकास कार्य, शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी नजर रखेंगे और एक रिपोर्ट तैयार करेंगे, जो विभाग के अधिकारियों को हर माह भेजी जाएगी।  

ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। प्राइमरी स्तर के बाद प्रदेश में हर पांचवां बच्चा स्कूल छोड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में आने वाले स्कूलों में शिक्षा तो है, लेकिन ज्यादातर शिक्षक बिना विभाग की जानकारी के ड्यूटी से नदारद रहते हैं। ऐसे शिक्षकों पर नजर रखने और प्राइमरी स्तर के स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए विभाग ने यह कदम उठाया है।

इसके प्रभावी रूप से लागू होने पर शिक्षा स्तर में सुधार के साथ-साथ शिक्षकों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। पिछले महीने मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता ने प्राइमरी स्तर तक के स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए विभाग को स्कूलों की निगरानी में पंचायत सदस्यों को शामिल करने को कहा था। स्कूल शिक्षा विभाग अब पंचायत सदस्य की भागीदारी को बढ़ा रहा है। 
 
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