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Amarnath Yatra: बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए 3,823 श्रद्धालु रवाना, हर-हर महादेव के जयघोष के साथ यात्रा शुरू
Tue, 28 Jul 2026 02:25 AM IST
Digvijay Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 28 Jul 2026 02:25 AM IST
सार
अमरनाथ यात्रा के तहत सोमवार को भगवती नगर यात्री निवास आधार शिविर से 3,823 श्रद्धालुओं का नया जत्था बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना हुआ।
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अमरनाथ यात्रा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
अमरनाथ यात्रा के तहत सोमवार को भगवती नगर यात्री निवास आधार शिविर से 3,823 श्रद्धालुओं का नया जत्था बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना हुआ। श्रद्धालुओं ने बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ यात्रा शुरू की।
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आधार शिविर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की चहल-पहल रही और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद वाहनों का काफिला निर्धारित समय पर घाटी के लिए रवाना किया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रवाना हुए जत्थे में 2,882 पुरुष, 838 महिलाएं, दो बच्चे, 84 साधु और 17 साध्वियां शामिल हैं। इस जत्थे में कोई विदेशी श्रद्धालु या ट्रांसजेंडर यात्री शामिल नहीं है।
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यात्रा को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से आधार शिविर और यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, भोजन तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के वाहनों को सुरक्षा जांच के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति दी गई। मौसम की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
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प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। अधिकृत सुरक्षा काफिले के साथ ही आगे बढ़ें और मौसम को देखते हुए पूरी सावधानी बरतें। जम्मू शहर से श्रद्धालुओं के लगातार प्रस्थान के साथ श्री अमरनाथ यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ रही है।
कुल श्रद्धालु : 3,823
पुरुष : 2,882
महिलाएं : 838
बच्चे : 2
साधु : 84
साध्वियां : 17
ऑपरेशन सिंदूर की तरह पाक की तरफ से आए 480 वीडियो
सोशल मीडिया निगरानी टीम चौबीसों घंटे विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर रख रही है नजर
पुरुषोत्तम वर्मा
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली पुलिस समेत देश की सुरक्षा एजेंसियों ने तकनीक-आधारित निगरानी और कार्रवाई का एक खास अभियान शुरू किया।
इसमें बड़े पैमाने पर ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी), मेटाडेटा की जांच, व्यवहार का विश्लेषण और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रहे एआई-जनरेटेड और डीपफेक सामग्री की फोरेंसिक जांच शामिल थी।
इस निगरानी प्रक्रिया के दौरान महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया खातों के एक ऐसे सुनियोजित नेटवर्क की पहचान की जो गलत, भ्रामक और एआई-जनरेटेड सामग्री फैला रहे थे।
इनका मकसद लोगों की राय को प्रभावित करना, भ्रम पैदा करना, अशांति भड़काना और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना था। तकनीकी विश्लेषण से यह भी पता चला कि इसमें भारत के बाहर से (खासकर पाकिस्तान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों से) काम करने वाले असामाजिक तत्व शामिल थे, जो भारतीय दर्शकों को निशाना बनाकर भ्रामक कथानक को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे थे।
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था-एक) देवेश चंद श्रीवास्तव ने कहा कि भ्रामक वीडियो डालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि आपत्तिजनक पोस्ट को हटाया जा रहा है। पुलिस विभिन्न मंचों पर साझा किए गए पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों की जांच कर रही है ।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आपत्तिजनक और अवैध सामग्री को हटाने की कार्रवाई एक सतत प्रक्रिया है। प्रदर्शन की निगरानी के दौरान दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े 480 से अधिक सोशल मीडिया खातों की पहचान की है, जो प्रदर्शन से संबंधित फर्जी कथानक, अफवाहें और एआई से तैयार किए गए फर्जी वीडियो प्रसारित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से जुड़े ये वही सोशल मीडिया खाते हैं जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी सक्रिय थे। हमारी टीमें इन खातों से जुड़े आईपी पते की भी जांच कर रही हैं।
विशेष टीमें ऐसे सोशल मीडिया खातों की पहचान कर रही हैं, जिन्होंने कथित रूप से अपमानजनक भाषा, भ्रामक जानकारी या संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली सामग्री साझा की है।
अधिकारी ने कहा कि हमारी टीमें प्रत्येक वीडियो की बारीकी से निगरानी कर रही हैं और फर्जी, डीपफेक तथा अवैध सामग्री साझा करने वाले सोशल मीडिया खातों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
डीसीपी के इस्तीफे
वाली खबर फर्जी
दिल्ली पुलिस ने हाल में प्रसारित एक डीपफेक वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सुमित झा के छात्र प्रदर्शन के कारण इस्तीफा देने का दावा करने वाला वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी है और एआई से तैयार किया गया है। पुलिस ने अधिकारी का वास्तविक वीडियो भी साझा किया।
100 खाते भारत के बाहर से चल रहे थे-तकनीकी जांच से पता चला कि लगभग 100 खाते भारत के बाहर से संचालित हो रहे थे। आगे के विश्लेषण से यह स्थापित हुआ कि 140 से अधिक पोस्ट और प्रोफाइल में एआई-जनरेटेड या एआई-सहायता प्राप्त सामग्री शामिल था, जिसकी पहचान और पुष्टि महाराष्ट्र साइबर के अत्याधुनिक ऑडियो-वीडियो फोरेंसिक विश्लेषण टूल का उपयोग करके वैज्ञानिक रूप से की गई।
बढ़ा-चढ़ाकर
दिखाए गए दृश्य
पहचाने गए एआई-जनरेटेड सामग्री की विस्तृत तकनीकी जांच से पता चला कि इसमें भीड़ के डिजिटल रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए दृश्य, सिंथेटिक आवाज बनाना, क्लोन किया गया ऑडियो और सार्वजनिक हस्तियों से गलत तरीके से जोड़े गए हेरफेर किए गए वीडियो शामिल थे। प्रतिनिधि सोशल मीडिया खाते और उनसे संबंधित एआई-जनरेटेड सामग्री नीचे दिए गए हैं।
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जंतर-मंतर आंदोलन : सभी नहीं... सिर्फ सरकारी एफआईआर ही होंगी वापस
निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज छेड़छाड़, मारपीट व पत्रकारों से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल वे मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं।
निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज एफआईआर, जिनमें महिला पत्रकारों से छेड़छाड़, मारपीट और अन्य आपराधिक आरोप शामिल हैं, वापस नहीं ली जाएंगी। इन मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
केंद्र सरकार ने पहले ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए भरोसा दिया था कि ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी के तहत दिल्ली पुलिस अपनी ओर से दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। हालांकि सोमवार शाम तक इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी नहीं हुए।
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त देवेश चंद श्रीवास्तव के अनुसार, आंदोलन के दौरान दिल्ली में करीब 20 एफआईआर दर्ज हुईं। इनमें अधिकांश मामले प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और हिंसा से जुड़े हैं। वहीं करीब पांच एफआईआर निजी शिकायतों पर दर्ज की गई हैं। इनमें दो महिला पत्रकारों द्वारा छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं।
चूंकि ये निजी शिकायतों पर आधारित मामले हैं, इसलिए इन्हें सरकार या पुलिस अपने स्तर पर वापस नहीं ले सकती। इन मामलों में आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में दिल्ली पुलिस स्वयं शिकायतकर्ता है, केवल उन्हीं में अभियोजन पक्ष अदालत से मुकदमा वापस लेने का अनुरोध करेगा। इसके लिए पहले दिल्ली के उपराज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होगी। एलजी की अनुमति मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत में अभियोजन आगे न चलाने का आवेदन देगी। अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी कि मुकदमा वापस लिया जाए या नहीं।
ऐसे होगी सरकारी एफआईआर वापसी की प्रक्रिया
n केंद्र या सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक आदेश जारी होगा।
n दिल्ली पुलिस अभियोजन की ओर से उपराज्यपाल को मुकदमे वापस लेने का प्रस्ताव भेजेगी।
n एलजी की मंजूरी मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत में अभियोजन आगे न चलाने का आवेदन देगी।
n अदालत आवेदन पर सुनवाई के बाद अंतिम फैसला सुनाएगी। अदालत की अनुमति के बिना कोई भी मुकदमा स्वतः समाप्त नहीं होगा।
केस खत्म करने के तीन वैकल्पिक कानूनी रास्ते
n क्लोजर रिपोर्ट: यदि चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते, तो पुलिस अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। मजिस्ट्रेट की मंजूरी के बाद मामला समाप्त हो
सकता है।
n हाईकोर्ट की शरण: गंभीर मामलों या राहत न मिलने की स्थिति में बीएनएसएस की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट एफआईआर निरस्त करने पर विचार कर सकता है।
n लोक अदालत का विकल्प: बिना अनुमति प्रदर्शन, रास्ता जाम या धारा 163 के उल्लंघन जैसे अपेक्षाकृत छोटे मामलों का निस्तारण आपसी सहमति से लोक अदालत में किया जा सकता है।
आंदोलन से जुड़े मामले एक नजर में
n करीब 20 एफआईआर
दर्ज हैं।
n 14 मामले प्रदर्शन और हिंसा से जुड़े।
n एक मामला बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने का।
n पांच निजी शिकायतों वाले मामले, जिनमें पत्रकारों से मारपीट और छेड़छाड़ के आरोप शामिल।
n टॉलस्टॉय मार्ग और जंतर-मंतर पर दो सीसीटीवी कैमरे तोड़ने के मामले की अलग जांच जारी।
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आंदोलन के बाद जंतर-मंतर बना सेल्फी पॉइंट
36 दिन के छात्र आंदोलन के खत्म होने के बाद गतिविधियां हुईं सामान्य
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। छात्र आंदोलन के समाप्त होने के बाद जंतर-मंतर का माहौल धीरे-धीरे सामान्य होता नजर आ रहा है। हालांकि, आंदोलन खत्म होने के बावजूद यहां आने वालों की संख्या कम नहीं हुई है।
सोमवार को दिल्ली और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा जंतर-मंतर सिर्फ यह देखने पहुंचे कि जिस स्थान की तस्वीरें और वीडियो उन्होंने पिछले एक महीने से अधिक समय तक सोशल मीडिया पर देखी थीं, वह अब कैसा दिखता है। कई युवाओं ने बैरिकेड्स के बाहर खड़े होकर सेल्फी ली और आंदोलन स्थल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
जयपुर, लखनऊ, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से आए छात्रों का कहना था कि उन्होंने आंदोलन को केवल मोबाइल स्क्रीन पर देखा था। सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो ने उनके मन में इस जगह को करीब से देखने की उत्सुकता पैदा कर दी थी। उनका कहना था कि कुछ दिन पहले तक जहां हजारों छात्रों की भीड़, नारेबाजी और पुलिस की मौजूदगी दिखाई देती थी, वहीं अब उसी सड़क पर सन्नाटा और सामान्य गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। उनके अनुसार, यह बदलाव अपने आप में एक अलग अनुभव है।
धरना स्थल से प्रदर्शनकारी भले ही लौट गए हों, लेकिन आंदोलन के निशान अभी भी पूरी तरह मिटे नहीं हैं। सड़क किनारे कई स्थानों पर पुराने पोस्टर, प्लास्टिक की कुर्सियां, बर्तन और अन्य सामान अब भी पड़े दिखाई दिए। दिल्ली पुलिस की ओर से बैरिकेड्स की मरम्मत और रंगाई का काम जारी है, जबकि डिवाइडरों को भी दोबारा व्यवस्थित किया जा रहा है। पूरे इलाके में सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया जारी है।
सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह नहीं हटाई गई है। रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवान अब भी इलाके में तैनात हैं और कई स्थानों पर बैरिकेड्स लगे हुए हैं। पुलिस की निगरानी पहले की तुलना में कम जरूर हुई है, लेकिन सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरकरार है। इसी बीच, जंतर-मंतर पर एक आंदोलन समाप्त हुआ तो दूसरे प्रदर्शनों ने उसकी जगह ले ली।
सोशल मीडिया से प्रेरित होकर पहुंचे जंतर-मंतर
हरियाणा से आईं आंदोलन समर्थक प्रीति लांबा ने कहा कि उन्होंने छात्रों का समर्थन इसलिए किया क्योंकि यह युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा था। वहीं, जयपुर के छात्र विशाल ने बताया कि सोशल मीडिया पर आंदोलन की लगातार तस्वीरें देखने के बाद उन्होंने यहां आने का फैसला किया। जयपुर के विशाल, लखनऊ के मनोज कुमार समेत कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने आंदोलन केवल सोशल मीडिया पर देखा था। इसलिए वे उस स्थान को अपनी आंखों से देखने और वहां का बदला हुआ माहौल महसूस करने पहुंचे। लखनऊ से आए मनोज कुमार ने कहा कि आंदोलन समाप्त होने के बावजूद वह इस जगह का बदला हुआ माहौल अपनी आंखों से देखना चाहते थे। सोनीपत से पहुंचे एक छात्र का कहना था कि मोबाइल पर वीडियो देखकर किसी आंदोलन का वास्तविक माहौल समझ में नहीं आता। इसलिए वह खुद यहां आकर उस स्थान को महसूस करना चाहते थे।
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घायल छात्रा साक्षी की हालत में सुधार, प्रशांत की आज होगी सर्जरी
पैलेट गन के इस्तेमाल पर अब भी पुलिस की पुष्टि नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन में घायल छात्रों का दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है। डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में भर्ती 21 वर्षीय छात्रा साक्षी की हालत में सुधार हुआ है। अस्पताल के अनुसार, पांच दिन पहले उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया था।
अब उसकी स्थिति स्थिर है और उसने स्वयं खाना-पीना शुरू कर दिया है। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के छर्रों से घायल हुए 25 वर्षीय छात्र प्रशांत की मंगलवार को दिल्ली सरकार के एक अस्पताल में सर्जरी होगी। प्रशांत ने बताया कि घटना के दिन उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसी दिन छुट्टी दे दी गई थी। उनके दाहिने हाथ, कमर और छाती में छर्रे लगे हैं।
उन्होंने बताया कि कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के दौरान वह घायल हुए थे। प्रशांत दिल्ली के एक विश्वविद्यालय में विजुअल आर्ट के छात्र हैं। इससे पहले भी प्रदर्शन के दौरान तीन लोगों के पैलेट गन के छर्रों से घायल होने के मामले सामने आ चुके हैं। जबलपुर निवासी शेख इरशाद के चेहरे, गर्दन और छाती सहित शरीर के कई हिस्सों में छर्रे लगे थे।
वहीं, नजफगढ़ निवासी 19 वर्षीय साहिल की दाहिनी आंख में छर्रा लगने से कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो गया था। एम्स ट्रॉमा सेंटर में उसकी सर्जरी के बाद उसे छुट्टी दे दी गई है। एक पत्रिका के पत्रकार विकास के घायल होने का मामला भी सामने आया है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की पुलिस ने अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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नीट के बाद अब आरक्षण पर जेन-जी की मोर्चाबंदी इंस्टाग्राम पेज पर फॉलोअर्स 48 घंटे में 53 लाख पार
हिमांशु अरविंद मिश्र
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले में आंदोलन के बाद अब जेन-जी ने आरक्षण पर मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। इसके िलए इंस्टाग्राम पर आरक्षण हटाओ आंदोलन (आरएचए) नाम से पेज भी बन गया है। महज 48 घंटे में इससे 53 लाख से अधिक लोग जुड़ भी चुके हैं। यानी औसतन हर घंटे 93,750 नए फॉलोअर्स जुड़े। यही रफ्तार रही तो दो दिन में आंकड़ा एक करोड़ तक पहुंच सकता है।
आरक्षण हटाओ आंदोलन नाम से पेज वेदांश त्यागी नाम के यूजर ने शुरू किया है, जो पोर्टफोलियो मैनेजर हैं और स्टॉक मार्केट में निवेश के तरीके बताते हैं। संगठन ने अपनी वेबसाइट, ऑनलाइन सदस्यता और डिजिटल नेटवर्किंग से अभियान को अगले चरण में ले जाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। आंदोलन से जुड़े लोग जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन की योजना बता रहे हैं। इस पेज पर आए कई कमेंट्स में अलग-अलग राज्यों के युवा खुद को सामान्य वर्ग, ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और अन्य वर्ग का बताते हुए अपनी राय रखते दिख रहे हैं।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
n जाति आधारित आरक्षण खत्म हो। n शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मेरिट आधारित चयन। n विद्यार्थियों के लिए समान शिक्षा व्यवस्था। n सरकारी फॉर्म और प्रक्रियाओं में जाति आधारित पहचान की भूमिका कम हो। n समान मौके और प्रतिस्पर्धा पर जोर।
आरक्षण समर्थक
भी दे रहे प्रतिक्रिया
इस पेज पर आरक्षण के पक्ष में खड़े रहने वाले लोग भी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है, आरक्षण खत्म करने से पहले जाति को खत्म करना चाहिए। आरक्षण के समर्थन में भी कई पेज बन गए हैं।
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हत्या के बाद भी अंकित शर्मा पर क्रूरता करते रहे...ताहिर और पांच दरिंदों को फांसी की मांग
नई दिल्ली। वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों में मारे गए आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या में दोषी ठहराए गए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांचों दोषियों के लिए दिल्ली पुलिस ने मौत की सजा मांगी है।
अभियोजन पक्ष ने हत्याकांड को दुर्लभ से दुर्लभतम करार देते हुए कहा कि दोषियों ने ऐसी बर्बरता दिखाई, जिसकी मिसाल कम ही मिलती है। वे हत्या के बाद भी अंकित पर क्रूरता करते रहे। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब 31 जुलाई को सजा सुनाई जाएगी।
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडेय ने कोर्ट में कहा कि अंकित का पहले अपहरण किया गया, फिर बेरहमी से पीटकर हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं, मौत के बाद भी उनके शरीर पर हमला जारी रखा गया। अंकित के शरीर पर कुल 51 चोटें थीं, जिनमें 18 घाव धारदार हथियारों से किए गए थे। इन घावों की प्रकृति साफ बताती है कि हमलावरों की मंशा सिर्फ हत्या करना नहीं, बल्कि अमानवीय क्रूरता का प्रदर्शन करना था। दोषी पशुता की हद तक गिर गए थे। इसलिए दोषी ताहिर, नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को अधिकतम सजा यानी फांसी दी जाए। वहीं, बचाव पक्ष ने कहा, ताहिर की भूमिका साबित नहीं हुई। ब्यूरो
>> हमले के तरीके से साफ है, कितनी भयावह थी दोषियों की मंशा : पेज 9
सुनियोजित साजिश...भीड़ ने बनाया निशाना
लोक अभियोजक ने हत्या को निर्मम बताते हुए कहा, वारदात के समय अंकित के शरीर पर अंडरवियर के अलावा कोई कपड़ा नहीं था। उनके साथ किया गया व्यवहार किसी भी सभ्य समाज को झकझोर देने वाला है। दोषियों ने पूरी साजिश के साथ हत्या को जघन्य तरीके से अंजाम दिया। इससे समाज में भय और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई। दोषियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगी।
n अभियोजन पक्ष ने कहा, घटना को केवल एक व्यक्ति की हत्या के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह 2020 के दिल्ली दंगों में हुई 53 मौतों के व्यापक संदर्भ का हिस्सा है। अंकित ने किसी को उकसाया नहीं था, फिर भी उन्हें भीड़ ने निशाना बनाया।
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पश्चिम दिल्ली में कल 16 घंटे बाधित रहेगी जल आपूर्ति
पाइपलाइन संबंधी कार्य के चलते 25 से अधिक इलाके रहेंगे प्रभावित
नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड ने वेस्ट दिल्ली में पाइपलाइन जोड़ने के कार्य के कारण 29 जुलाई को 16 घंटे के लिए जल आपूर्ति बाधित रहने की सूचना जारी की है। इस दौरान 25 से अधिक कॉलोनियों में पानी नहीं आएगा या कम दबाव पर उपलब्ध होगा।
जल बोर्ड के अनुसार नई बिछाई गई 1100 मिमी व्यास की वेस्ट दिल्ली मेन लाइन का इंटरकनेक्शन कार्य 4 स्थानों पर किया जाएगा। यह कार्य खयाला बीपीएस के अंदर, खयाला बीपीएस के गेट पर और शिवाजी कॉलेज के पास रिंग रोड पर दो स्थानों पर होगा। इसके चलते 29 जुलाई 2026 को सुबह 10:00 बजे से रात 02:00 बजे तक जल आपूर्ति प्रभावित रहेगी। इस दौरान 25 से अधिक कालोनियों में जल आपूर्ति बाधित रहेगी या कम प्रेशर से पानी आएगा। जल बोर्ड ने निवासियों से अपील की है कि वे असुविधा से बचने के लिए पहले से पर्याप्त पानी का भंडारण कर लें।
ये क्षेत्र रहेंगे प्रभावित
राजा गार्डन, रमेश नगर, खयाला, रानी बाग, मोती नगर, शारदा पुरी, टैगोर गार्डन, तिहाड़ विलेज, तिलक नगर, वरुण निकेतन, राजौरी गार्डन, करमपुरा, सरस्वती गार्डन, हरि नगर व आसपास, मानसरोवर गार्डन, विष्णु गार्डन, सुभाष नगर, उत्तम नगर का कुछ भाग, मोहन गार्डन का कुछ भाग, गणेश नगर, कृष्णा पुरी, जे.जे. कॉलोनी खयाला, रवि नगर, चंद नगर तथा आसपास के क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित रहेगी।
टैंकर के लिए इन नंबरों पर करें संपर्क
g सेंट्रल कंट्रोल रूम : 1916, 23527679, 23538495, 23634469
g पंजाबी बाग : 25223658
g शिवाजी एन्क्लेव : 25193140, 25174140
g पश्चिम विहार : 25281197
येलो और ग्रीन लाइन के सात स्टेशनों पर एस्केलेटर बंद रहेंगे
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने यात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए येलो और ग्रीन लाइन के सात मेट्रो स्टेशनों पर चुनिंदा एस्केलेटरों की प्रमुख ओवरहॉलिंग शुरू की है। इस दौरान संबंधित एस्केलेटर अस्थायी रूप से बंद रहेंगे। ग्रीन लाइन के पीरागढ़ी स्टेशन पर ग्राउंड से लोअर कॉनकोर्स तक जाने वाला एस्केलेटर बंद रहेगा। वहीं येलो लाइन के अर्जनगढ़, गुरु द्रोणाचार्य और सिकंदरपुर स्टेशनों पर कॉनकोर्स से प्लेटफॉर्म तक जाने वाले एस्केलेटर पर कार्य चल रहा है। इसके अलावा एमजी रोड, आईएफएफसीओ चौक और मिलेनियम सिटी सेंटर गुरुग्राम स्टेशनों पर ग्राउंड से कॉनकोर्स तक जाने वाले एस्केलेटर की भी ओवरहॉलिंग की जा रही है। डीएमआरसी ने यात्रियों से उपलब्ध लिफ्ट का उपयोग करने, स्टेशन कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करने और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की अपील की है।
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जांच रिपोर्ट : मालवीय नगर अग्निकांड में हादसे के बाद भी सच छिपाने की कोशिश
मजििस् ट्रयल जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों पर तथ्य छिपाने और भ्रामक जानकारी देने के आरोप
धनंजय मिश्रा
नई दिल्ली। मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट ने प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही और हादसे के बाद उसे छिपाने की कोशिशों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम (एमसीडी) के कुछ इंजीनियरों और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने जांच के दौरान ऐसे जवाब दिए, जो उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे जांच को गुमराह करने का प्रयास हुआ और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश दिखाई देती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी जोन के सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार राय ने अपने लिखित जवाब में दावा किया कि होटल भवन को कभी अवैध निर्माण के मामले में बुक नहीं किया गया और न ही उसके खिलाफ कोई ध्वस्तीकरण कार्रवाई शुरू हुई। हालांकि, कार्यकारी अभियंता के रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि इसी भवन को वर्ष 2019 और 2020 में अवैध निर्माण के लिए दो बार बुक किया गया था और उसके खिलाफ डिमोलिशन ऑर्डर भी जारी किए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध अभिलेखों के बावजूद यह जानकारी जांच टीम से छिपाई गई।
देरी से पहुंची थी दमकल : जांच रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने होटल के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थ ट्रेड लाइसेंस जय मिश्रा के नाम पर जारी था, जबकि होटल का वास्तविक संचालन लोकेश बजाज कर रहा था। स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आग सुबह करीब 8:15 बजे लगी, जबकि दमकल की पहली गाड़ियां लगभग 9:30 बजे मौके पर पहुंचीं। इस समय अंतराल की भी जांच की सिफारिश की गई है।
वहीं पर्यटन विभाग ने होटल को सिल्वर कैटेगरी का दर्जा दे दिया, जबकि कई कमरों में न तो खिड़कियां थीं और न ही पर्याप्त वेंटिलेशन। घटनास्थल से बरामद दो जले हुए डीवीआर को डेटा रिकवरी के लिए एफएसएल, रोहिणी भेजा गया है, जिनसे हादसे से पहले और उसके दौरान की गतिविधियों के अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
पुलिस के जवाब भी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए...
जांच रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। तत्कालीन एसएचओ वीरेंद्र दलाल ने जांच में कहा कि होटल के खिलाफ पहले कभी कोई शिकायत नहीं मिली थी। लेकिन रिकॉर्ड के अनुसार, 14 अक्तूबर 2019 को मालवीय नगर थाने से ही होटल के संबंध में शिकायत एमसीडी को भेजी गई थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि वर्तमान एसएचओ विनय यादव ने वर्ष 2020 में होटल संचालक के खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 296/2020 का उल्लेख अपने जवाब में नहीं किया। जांच अधिकारी ने इसे गंभीर चूक माना है। रिपोर्ट के अनुसार होटल का हेल्थ ट्रेड लाइसेंस करीब पांच महीने तक लंबित रहने के बाद दो जून को, यानी आग लगने से ठीक एक दिन पहले, मंजूर कर दिया गया। जांच रिपोर्ट में इस पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की सिफारिश की गई है।
इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश
n एमसीडी : कार्यकारी अभियंता जेएस यादव, सहायक अभियंता सुनील चौहान, सहायक अभियंता यशवंत सिंह और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार राय।
n दिल्ली पुलिस : तत्कालीन एसएचओ वीरेंद्र दलाल, युद्धवीर सिंह, सतीश राणा तथा वर्तमान एसएचओ विनय यादव।
n अन्य विभाग : बीएसईएस के अधिकारी रजनेश कुमार रेखी तथा पर्यटन विभाग की निरीक्षण समिति के संबंधित सदस्य।
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मासूम बच्ची को बिना कपड़े के पीटती और देती थी गालियां, स्कूल में पुलिस कराएगी दाखिला
जब मां ही बन गई डर की वजह...पुलिस ने दिया सहारा
ज्योति सिंह
नई दिल्ली। पुलिस अपराधियों को पकड़ती है, लेकिन उस दिन हमें एक मां से उसकी बेटी को बचाना पड़ा..। यकीन मानिए, यह हमारे लिए भी आसान नहीं था। लेकिन क्या करते.. वो मां अपनी छह साल की मासूम बच्ची को बिना कपड़े के बाहर खड़ा कर देती थी।
उसे मारा करती थी। हमने जैसे ही वीडियो देखा, हम बच्ची को रेस्क्यू करने पहुंच गए। ये बातें जीटीबी एंक्लेव थाना पुलिस टीम बता रही थी। उनके सामने छह साल की एक सहमी हुई बच्ची थी, जो अपनी मां से प्यार भी करती थी और उसी से डरती भी थी।
जीटीबी एंक्लेव थाना पुलिस को शुरुआत में पड़ोसियों से शिकायत मिली कि एक महिला देर रात गाली-गलौज कर इलाके का माहौल खराब करती है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत करा दिया लेकिन कुछ दिन बाद फिर शिकायत आई कि महिला अपनी छह वर्षीय बेटी को भी बुरी तरह प्रताड़ित करती है। पड़ोसियों ने बताया कि बच्ची को कई बार पर्याप्त खाना नहीं दिया जाता, सजा के तौर पर बिना कपड़ों के बाहर खड़ा कर दिया जाता है और घर से अक्सर उसके रोने-चीखने की आवाजें आती हैं। एसएचओ बृजेश मिश्रा ने बताया, कि पुलिस दूसरी दफा वहां पहुंची और बच्ची से बातचीत करने की
कोशिश की। वह बेहद डरी-सहमी हुई थी। पूछने पर पता चला कि वह स्कूल भी नहीं जाती। पुलिस ने स्कूल में दाखिले की बात की, लेकिन बच्ची मां को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुई। उस समय पुलिस के पास कार्रवाई के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे। इसके बाद पुलिस ने जांच में पड़ोसियों को भी शामिल किया। वीडियो साक्ष्य जुटाने के लिए कहा गया। कुछ दिनों के बाद ही पड़ोसियों ने एक वीडियो दिया।
इलाज के बाद सामने आई दर्दभरी कहानी
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, कि इहबास में जब महिला को काउंसिलिंग के लिए लाया गया, वह काफी डरी हुई थी। उसे हम पर विश्वास नहीं था। काफी समझाने पर जब उसने देखा कि यहां काउंसिलिंग के लिए उसके जैसी कई महिलाएं हैं, तो वह शांत हो गई। काउंसिलिंग के बाद महिला जोर-जोर से रोने लगी। इस दौरान महिला ने बताया कि उसका पति उसके साथ नहीं है। मायके और ससुराल, दोनों जगह से कोई सहयोग नहीं मिलता। लंबे समय से अकेलेपन और अवसाद से जूझ रही महिला का गुस्सा उसी की बेटी पर निकल रहा था।
मां से बच्चे को अलग करना किसी भी पुलिसकर्मी के लिए आसान फैसला नहीं होता। लेकिन जब बच्चे की सुरक्षा खतरे में हो, तब उसकी जान और भविष्य को बचाना हमारी पहली जिम्मेदारी बन जाती है। हमारा उद्देश्य सिर्फ बच्ची को बचाना नहीं, बल्कि मां का इलाज कराकर इस परिवार को फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटाना भी है। -आरपी मीणा, शाहदरा पुलिस उपायुक्त
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एनसीआर में बढ़ेगा रैपिड रेल नेटवर्क, जोया-गजरौला में बन सकते हैं स्टेशन
दिल्ली-मुरादाबाद कॉरिडोर ः 10 हजार करोड़ की परियोजना से अमरोहा, हापुड़ और गाजियाबाद जिलों को मिलेगी नई रफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली/अमरोहा। मुरादाबाद से दिल्ली तक प्रस्तावित रैपिड रेल परियोजना दिल्ली-एनसीआर समेत अमरोहा जिले के लिए विकास की नई संभावनाएं लेकर आ सकती है। परियोजना के तहत जोया और गजरौला में रैपिड रेल स्टेशन बनाए जाने की संभावना है।
इससे जिले के लोगों को सीधे रैपिड रेल सेवा का लाभ मिलेगा और दिल्ली तक की यात्रा करीब 90 मिनट में पूरी हो सकेगी। लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विजन रिपोर्ट अंतिम चरण में है और जल्द ही शासन स्तर पर आगे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। ्प्रस्तावित रैपिड रेल कॉरिडोर मुरादाबाद, अमरोहा, हापुड़ और गाजियाबाद होते हुए दिल्ली तक जाएगा। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन सुविधा मिलेगी। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी। परियोजना से पहले कराए गए सर्वे में सामने आया कि दिल्ली रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में दिल्ली रोड से प्रति घंटे करीब 16 हजार वाहन गुजरते हैं, जबकि भविष्य में यह संख्या 25 हजार तक पहुंचने का अनुमान है।
वहीं जोया और ब्रजघाट टोल से प्रतिदिन लगभग 40 हजार वाहन गुजरते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में केवल फ्लाईओवर जैसी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं होंगी, इसलिए रैपिड रेल को दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
व्यापार और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार ः परियोजना के लागू होने पर अमरोहा जिले को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। जोया और गजरौला में प्रस्तावित स्टेशनों से दिल्ली-एनसीआर तक आवागमन आसान होगा। इससे व्यापार, उद्योग, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
चौथे चरण में हापुड़ से गाजियाबाद तक विकास
परियोजना के तहत गजरौला के जीरो प्वाइंट पर आधुनिक इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) विकसित करने की भी योजना है। इससे बस और रैपिड रेल के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी और यात्रियों को निर्बाध परिवहन सुविधा मिल सकेगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार रैपिड रेल कॉरिडोर का निर्माण चार चरणों में होगा। पहले चरण में पाकबड़ा से जोया, दूसरे में जोया से गजरौला, तीसरे में गजरौला से हापुड़ और चौथे चरण में हापुड़ से गाजियाबाद तक कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। अधिकांश ट्रैक राष्ट्रीय राजमार्ग के ऊपर बनाया जाएगा, जिससे सड़क और रेल यातायात दोनों सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
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हमले के तरीके से साफ है, कितनी भयावह थी दोषियों की मंशा : पुलिस
बचाव पक्ष अदालत में बोला केवल भीड़ का हिस्सा होना मौत की सजा का आधार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली दंगों के दौरान हुए अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषियों की फांसी की मांग करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि घावों की प्रकृति साफ बताती है कि हमलावरों की मंशा कितनी भयावह थी।
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडेय ने कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत में कहा कि दंड का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि समाज में यह स्पष्ट संदेश देना भी है कि इस तरह के जघन्य अपराधों के लिए कठोरतम दंड दिया जाएगा। उन्होंने दलील दी कि अपराध की प्रकृति, दोषियों के आचरण और समाज पर उसके प्रभाव को देखते हुए इस मामले में सजा का संतुलन मौत की सजा की ओर झुकता है। वहीं, बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव मोहन ने कहा कि अदालत के फैसले में ताहिर हुसैन की कोई विशिष्ट भूमिका स्थापित नहीं हुई है। 11 आरोपियों में से छह बरी हुए हैं और 91 गवाहों के बावजूद किसी ने हुसैन के घातक वार करने की पुष्टि नहीं की। केवल भीड़ का हिस्सा होना मौत की सजा का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने 91 गवाहों के बयान दर्ज किए, लेकिन किसी गवाह ने हुसैन द्वारा घातक वार किए जाने की विशिष्ट भूमिका नहीं बताई। वकीलों ने यह भी कहा कि दंगों के दौरान पुलिस स्वयं हिंसक भीड़ को नियंत्रित नहीं कर सकी थी, इसलिए पूरी घटना का दायित्व किसी एक व्यक्ति पर नहीं डाला जा सकता। बता दें कि 13 जुलाई को अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य को अंकित शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था।
फैसले में कहा गया था कि हुसैन हथियारों से लैस उस भीड़ का हिस्सा था, जिसने दंगों के दौरान हिंसा, आगजनी और लूटपाट की तथा अंकित शर्मा की क्रूर हत्या की। अदालत ने माना था कि गैरकानूनी सभा के सदस्यों को यह पता था कि उनके साझा उद्देश्य को पूरा करने के दौरान किसी की हत्या हो सकती है। हुसैन को हत्या, अपहरण, दंगा, घातक हथियार से दंगा, विद्वेष फैलाने और गैरकानूनी सभा सहित विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया है। अब 31 जुलाई को अदालत यह तय करेगी कि दोषियों को मौत की सजा मिलेगी या आजीवन कारावास।
राहत की अपील : अधिवक्ता तारा नरूला ने कोर्ट से कहा ताहिर हुसैन अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। उनकी पत्नी व तीन बच्चों का भविष्य उनसे जुड़ा है। उन्होंने आत्मसमर्पण की कोशिश की थी और जेल में उनका आचरण भी अच्छा रहा है। इन परिस्थितियों को सजा तय करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया निगरानी टीम चौबीसों घंटे विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर रख रही है नजर
पुरुषोत्तम वर्मा
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली पुलिस समेत देश की सुरक्षा एजेंसियों ने तकनीक-आधारित निगरानी और कार्रवाई का एक खास अभियान शुरू किया।
इसमें बड़े पैमाने पर ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी), मेटाडेटा की जांच, व्यवहार का विश्लेषण और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रहे एआई-जनरेटेड और डीपफेक सामग्री की फोरेंसिक जांच शामिल थी।
इस निगरानी प्रक्रिया के दौरान महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया खातों के एक ऐसे सुनियोजित नेटवर्क की पहचान की जो गलत, भ्रामक और एआई-जनरेटेड सामग्री फैला रहे थे।
इनका मकसद लोगों की राय को प्रभावित करना, भ्रम पैदा करना, अशांति भड़काना और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना था। तकनीकी विश्लेषण से यह भी पता चला कि इसमें भारत के बाहर से (खासकर पाकिस्तान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों से) काम करने वाले असामाजिक तत्व शामिल थे, जो भारतीय दर्शकों को निशाना बनाकर भ्रामक कथानक को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे थे।
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था-एक) देवेश चंद श्रीवास्तव ने कहा कि भ्रामक वीडियो डालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि आपत्तिजनक पोस्ट को हटाया जा रहा है। पुलिस विभिन्न मंचों पर साझा किए गए पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों की जांच कर रही है ।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आपत्तिजनक और अवैध सामग्री को हटाने की कार्रवाई एक सतत प्रक्रिया है। प्रदर्शन की निगरानी के दौरान दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े 480 से अधिक सोशल मीडिया खातों की पहचान की है, जो प्रदर्शन से संबंधित फर्जी कथानक, अफवाहें और एआई से तैयार किए गए फर्जी वीडियो प्रसारित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से जुड़े ये वही सोशल मीडिया खाते हैं जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी सक्रिय थे। हमारी टीमें इन खातों से जुड़े आईपी पते की भी जांच कर रही हैं।
विशेष टीमें ऐसे सोशल मीडिया खातों की पहचान कर रही हैं, जिन्होंने कथित रूप से अपमानजनक भाषा, भ्रामक जानकारी या संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली सामग्री साझा की है।
अधिकारी ने कहा कि हमारी टीमें प्रत्येक वीडियो की बारीकी से निगरानी कर रही हैं और फर्जी, डीपफेक तथा अवैध सामग्री साझा करने वाले सोशल मीडिया खातों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
डीसीपी के इस्तीफे
वाली खबर फर्जी
दिल्ली पुलिस ने हाल में प्रसारित एक डीपफेक वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सुमित झा के छात्र प्रदर्शन के कारण इस्तीफा देने का दावा करने वाला वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी है और एआई से तैयार किया गया है। पुलिस ने अधिकारी का वास्तविक वीडियो भी साझा किया।
100 खाते भारत के बाहर से चल रहे थे-तकनीकी जांच से पता चला कि लगभग 100 खाते भारत के बाहर से संचालित हो रहे थे। आगे के विश्लेषण से यह स्थापित हुआ कि 140 से अधिक पोस्ट और प्रोफाइल में एआई-जनरेटेड या एआई-सहायता प्राप्त सामग्री शामिल था, जिसकी पहचान और पुष्टि महाराष्ट्र साइबर के अत्याधुनिक ऑडियो-वीडियो फोरेंसिक विश्लेषण टूल का उपयोग करके वैज्ञानिक रूप से की गई।
बढ़ा-चढ़ाकर
दिखाए गए दृश्य
पहचाने गए एआई-जनरेटेड सामग्री की विस्तृत तकनीकी जांच से पता चला कि इसमें भीड़ के डिजिटल रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए दृश्य, सिंथेटिक आवाज बनाना, क्लोन किया गया ऑडियो और सार्वजनिक हस्तियों से गलत तरीके से जोड़े गए हेरफेर किए गए वीडियो शामिल थे। प्रतिनिधि सोशल मीडिया खाते और उनसे संबंधित एआई-जनरेटेड सामग्री नीचे दिए गए हैं।
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जंतर-मंतर आंदोलन : सभी नहीं... सिर्फ सरकारी एफआईआर ही होंगी वापस
निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज छेड़छाड़, मारपीट व पत्रकारों से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल वे मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं।
निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज एफआईआर, जिनमें महिला पत्रकारों से छेड़छाड़, मारपीट और अन्य आपराधिक आरोप शामिल हैं, वापस नहीं ली जाएंगी। इन मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
केंद्र सरकार ने पहले ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए भरोसा दिया था कि ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी के तहत दिल्ली पुलिस अपनी ओर से दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। हालांकि सोमवार शाम तक इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी नहीं हुए।
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त देवेश चंद श्रीवास्तव के अनुसार, आंदोलन के दौरान दिल्ली में करीब 20 एफआईआर दर्ज हुईं। इनमें अधिकांश मामले प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और हिंसा से जुड़े हैं। वहीं करीब पांच एफआईआर निजी शिकायतों पर दर्ज की गई हैं। इनमें दो महिला पत्रकारों द्वारा छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं।
चूंकि ये निजी शिकायतों पर आधारित मामले हैं, इसलिए इन्हें सरकार या पुलिस अपने स्तर पर वापस नहीं ले सकती। इन मामलों में आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में दिल्ली पुलिस स्वयं शिकायतकर्ता है, केवल उन्हीं में अभियोजन पक्ष अदालत से मुकदमा वापस लेने का अनुरोध करेगा। इसके लिए पहले दिल्ली के उपराज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होगी। एलजी की अनुमति मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत में अभियोजन आगे न चलाने का आवेदन देगी। अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी कि मुकदमा वापस लिया जाए या नहीं।
ऐसे होगी सरकारी एफआईआर वापसी की प्रक्रिया
n केंद्र या सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक आदेश जारी होगा।
n दिल्ली पुलिस अभियोजन की ओर से उपराज्यपाल को मुकदमे वापस लेने का प्रस्ताव भेजेगी।
n एलजी की मंजूरी मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत में अभियोजन आगे न चलाने का आवेदन देगी।
n अदालत आवेदन पर सुनवाई के बाद अंतिम फैसला सुनाएगी। अदालत की अनुमति के बिना कोई भी मुकदमा स्वतः समाप्त नहीं होगा।
केस खत्म करने के तीन वैकल्पिक कानूनी रास्ते
n क्लोजर रिपोर्ट: यदि चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते, तो पुलिस अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। मजिस्ट्रेट की मंजूरी के बाद मामला समाप्त हो
सकता है।
n हाईकोर्ट की शरण: गंभीर मामलों या राहत न मिलने की स्थिति में बीएनएसएस की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट एफआईआर निरस्त करने पर विचार कर सकता है।
n लोक अदालत का विकल्प: बिना अनुमति प्रदर्शन, रास्ता जाम या धारा 163 के उल्लंघन जैसे अपेक्षाकृत छोटे मामलों का निस्तारण आपसी सहमति से लोक अदालत में किया जा सकता है।
आंदोलन से जुड़े मामले एक नजर में
n करीब 20 एफआईआर
दर्ज हैं।
n 14 मामले प्रदर्शन और हिंसा से जुड़े।
n एक मामला बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने का।
n पांच निजी शिकायतों वाले मामले, जिनमें पत्रकारों से मारपीट और छेड़छाड़ के आरोप शामिल।
n टॉलस्टॉय मार्ग और जंतर-मंतर पर दो सीसीटीवी कैमरे तोड़ने के मामले की अलग जांच जारी।
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आंदोलन के बाद जंतर-मंतर बना सेल्फी पॉइंट
36 दिन के छात्र आंदोलन के खत्म होने के बाद गतिविधियां हुईं सामान्य
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। छात्र आंदोलन के समाप्त होने के बाद जंतर-मंतर का माहौल धीरे-धीरे सामान्य होता नजर आ रहा है। हालांकि, आंदोलन खत्म होने के बावजूद यहां आने वालों की संख्या कम नहीं हुई है।
सोमवार को दिल्ली और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा जंतर-मंतर सिर्फ यह देखने पहुंचे कि जिस स्थान की तस्वीरें और वीडियो उन्होंने पिछले एक महीने से अधिक समय तक सोशल मीडिया पर देखी थीं, वह अब कैसा दिखता है। कई युवाओं ने बैरिकेड्स के बाहर खड़े होकर सेल्फी ली और आंदोलन स्थल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
जयपुर, लखनऊ, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से आए छात्रों का कहना था कि उन्होंने आंदोलन को केवल मोबाइल स्क्रीन पर देखा था। सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो ने उनके मन में इस जगह को करीब से देखने की उत्सुकता पैदा कर दी थी। उनका कहना था कि कुछ दिन पहले तक जहां हजारों छात्रों की भीड़, नारेबाजी और पुलिस की मौजूदगी दिखाई देती थी, वहीं अब उसी सड़क पर सन्नाटा और सामान्य गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। उनके अनुसार, यह बदलाव अपने आप में एक अलग अनुभव है।
धरना स्थल से प्रदर्शनकारी भले ही लौट गए हों, लेकिन आंदोलन के निशान अभी भी पूरी तरह मिटे नहीं हैं। सड़क किनारे कई स्थानों पर पुराने पोस्टर, प्लास्टिक की कुर्सियां, बर्तन और अन्य सामान अब भी पड़े दिखाई दिए। दिल्ली पुलिस की ओर से बैरिकेड्स की मरम्मत और रंगाई का काम जारी है, जबकि डिवाइडरों को भी दोबारा व्यवस्थित किया जा रहा है। पूरे इलाके में सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया जारी है।
सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह नहीं हटाई गई है। रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवान अब भी इलाके में तैनात हैं और कई स्थानों पर बैरिकेड्स लगे हुए हैं। पुलिस की निगरानी पहले की तुलना में कम जरूर हुई है, लेकिन सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरकरार है। इसी बीच, जंतर-मंतर पर एक आंदोलन समाप्त हुआ तो दूसरे प्रदर्शनों ने उसकी जगह ले ली।
सोशल मीडिया से प्रेरित होकर पहुंचे जंतर-मंतर
हरियाणा से आईं आंदोलन समर्थक प्रीति लांबा ने कहा कि उन्होंने छात्रों का समर्थन इसलिए किया क्योंकि यह युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा था। वहीं, जयपुर के छात्र विशाल ने बताया कि सोशल मीडिया पर आंदोलन की लगातार तस्वीरें देखने के बाद उन्होंने यहां आने का फैसला किया। जयपुर के विशाल, लखनऊ के मनोज कुमार समेत कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने आंदोलन केवल सोशल मीडिया पर देखा था। इसलिए वे उस स्थान को अपनी आंखों से देखने और वहां का बदला हुआ माहौल महसूस करने पहुंचे। लखनऊ से आए मनोज कुमार ने कहा कि आंदोलन समाप्त होने के बावजूद वह इस जगह का बदला हुआ माहौल अपनी आंखों से देखना चाहते थे। सोनीपत से पहुंचे एक छात्र का कहना था कि मोबाइल पर वीडियो देखकर किसी आंदोलन का वास्तविक माहौल समझ में नहीं आता। इसलिए वह खुद यहां आकर उस स्थान को महसूस करना चाहते थे।
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घायल छात्रा साक्षी की हालत में सुधार, प्रशांत की आज होगी सर्जरी
पैलेट गन के इस्तेमाल पर अब भी पुलिस की पुष्टि नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन में घायल छात्रों का दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है। डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में भर्ती 21 वर्षीय छात्रा साक्षी की हालत में सुधार हुआ है। अस्पताल के अनुसार, पांच दिन पहले उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया था।
अब उसकी स्थिति स्थिर है और उसने स्वयं खाना-पीना शुरू कर दिया है। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के छर्रों से घायल हुए 25 वर्षीय छात्र प्रशांत की मंगलवार को दिल्ली सरकार के एक अस्पताल में सर्जरी होगी। प्रशांत ने बताया कि घटना के दिन उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसी दिन छुट्टी दे दी गई थी। उनके दाहिने हाथ, कमर और छाती में छर्रे लगे हैं।
उन्होंने बताया कि कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के दौरान वह घायल हुए थे। प्रशांत दिल्ली के एक विश्वविद्यालय में विजुअल आर्ट के छात्र हैं। इससे पहले भी प्रदर्शन के दौरान तीन लोगों के पैलेट गन के छर्रों से घायल होने के मामले सामने आ चुके हैं। जबलपुर निवासी शेख इरशाद के चेहरे, गर्दन और छाती सहित शरीर के कई हिस्सों में छर्रे लगे थे।
वहीं, नजफगढ़ निवासी 19 वर्षीय साहिल की दाहिनी आंख में छर्रा लगने से कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो गया था। एम्स ट्रॉमा सेंटर में उसकी सर्जरी के बाद उसे छुट्टी दे दी गई है। एक पत्रिका के पत्रकार विकास के घायल होने का मामला भी सामने आया है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की पुलिस ने अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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नीट के बाद अब आरक्षण पर जेन-जी की मोर्चाबंदी इंस्टाग्राम पेज पर फॉलोअर्स 48 घंटे में 53 लाख पार
हिमांशु अरविंद मिश्र
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले में आंदोलन के बाद अब जेन-जी ने आरक्षण पर मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। इसके िलए इंस्टाग्राम पर आरक्षण हटाओ आंदोलन (आरएचए) नाम से पेज भी बन गया है। महज 48 घंटे में इससे 53 लाख से अधिक लोग जुड़ भी चुके हैं। यानी औसतन हर घंटे 93,750 नए फॉलोअर्स जुड़े। यही रफ्तार रही तो दो दिन में आंकड़ा एक करोड़ तक पहुंच सकता है।
आरक्षण हटाओ आंदोलन नाम से पेज वेदांश त्यागी नाम के यूजर ने शुरू किया है, जो पोर्टफोलियो मैनेजर हैं और स्टॉक मार्केट में निवेश के तरीके बताते हैं। संगठन ने अपनी वेबसाइट, ऑनलाइन सदस्यता और डिजिटल नेटवर्किंग से अभियान को अगले चरण में ले जाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। आंदोलन से जुड़े लोग जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन की योजना बता रहे हैं। इस पेज पर आए कई कमेंट्स में अलग-अलग राज्यों के युवा खुद को सामान्य वर्ग, ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और अन्य वर्ग का बताते हुए अपनी राय रखते दिख रहे हैं।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
n जाति आधारित आरक्षण खत्म हो। n शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मेरिट आधारित चयन। n विद्यार्थियों के लिए समान शिक्षा व्यवस्था। n सरकारी फॉर्म और प्रक्रियाओं में जाति आधारित पहचान की भूमिका कम हो। n समान मौके और प्रतिस्पर्धा पर जोर।
आरक्षण समर्थक
भी दे रहे प्रतिक्रिया
इस पेज पर आरक्षण के पक्ष में खड़े रहने वाले लोग भी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है, आरक्षण खत्म करने से पहले जाति को खत्म करना चाहिए। आरक्षण के समर्थन में भी कई पेज बन गए हैं।
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हत्या के बाद भी अंकित शर्मा पर क्रूरता करते रहे...ताहिर और पांच दरिंदों को फांसी की मांग
नई दिल्ली। वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों में मारे गए आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या में दोषी ठहराए गए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांचों दोषियों के लिए दिल्ली पुलिस ने मौत की सजा मांगी है।
अभियोजन पक्ष ने हत्याकांड को दुर्लभ से दुर्लभतम करार देते हुए कहा कि दोषियों ने ऐसी बर्बरता दिखाई, जिसकी मिसाल कम ही मिलती है। वे हत्या के बाद भी अंकित पर क्रूरता करते रहे। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब 31 जुलाई को सजा सुनाई जाएगी।
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडेय ने कोर्ट में कहा कि अंकित का पहले अपहरण किया गया, फिर बेरहमी से पीटकर हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं, मौत के बाद भी उनके शरीर पर हमला जारी रखा गया। अंकित के शरीर पर कुल 51 चोटें थीं, जिनमें 18 घाव धारदार हथियारों से किए गए थे। इन घावों की प्रकृति साफ बताती है कि हमलावरों की मंशा सिर्फ हत्या करना नहीं, बल्कि अमानवीय क्रूरता का प्रदर्शन करना था। दोषी पशुता की हद तक गिर गए थे। इसलिए दोषी ताहिर, नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को अधिकतम सजा यानी फांसी दी जाए। वहीं, बचाव पक्ष ने कहा, ताहिर की भूमिका साबित नहीं हुई। ब्यूरो
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सुनियोजित साजिश...भीड़ ने बनाया निशाना
लोक अभियोजक ने हत्या को निर्मम बताते हुए कहा, वारदात के समय अंकित के शरीर पर अंडरवियर के अलावा कोई कपड़ा नहीं था। उनके साथ किया गया व्यवहार किसी भी सभ्य समाज को झकझोर देने वाला है। दोषियों ने पूरी साजिश के साथ हत्या को जघन्य तरीके से अंजाम दिया। इससे समाज में भय और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई। दोषियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगी।
n अभियोजन पक्ष ने कहा, घटना को केवल एक व्यक्ति की हत्या के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह 2020 के दिल्ली दंगों में हुई 53 मौतों के व्यापक संदर्भ का हिस्सा है। अंकित ने किसी को उकसाया नहीं था, फिर भी उन्हें भीड़ ने निशाना बनाया।
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पश्चिम दिल्ली में कल 16 घंटे बाधित रहेगी जल आपूर्ति
पाइपलाइन संबंधी कार्य के चलते 25 से अधिक इलाके रहेंगे प्रभावित
नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड ने वेस्ट दिल्ली में पाइपलाइन जोड़ने के कार्य के कारण 29 जुलाई को 16 घंटे के लिए जल आपूर्ति बाधित रहने की सूचना जारी की है। इस दौरान 25 से अधिक कॉलोनियों में पानी नहीं आएगा या कम दबाव पर उपलब्ध होगा।
जल बोर्ड के अनुसार नई बिछाई गई 1100 मिमी व्यास की वेस्ट दिल्ली मेन लाइन का इंटरकनेक्शन कार्य 4 स्थानों पर किया जाएगा। यह कार्य खयाला बीपीएस के अंदर, खयाला बीपीएस के गेट पर और शिवाजी कॉलेज के पास रिंग रोड पर दो स्थानों पर होगा। इसके चलते 29 जुलाई 2026 को सुबह 10:00 बजे से रात 02:00 बजे तक जल आपूर्ति प्रभावित रहेगी। इस दौरान 25 से अधिक कालोनियों में जल आपूर्ति बाधित रहेगी या कम प्रेशर से पानी आएगा। जल बोर्ड ने निवासियों से अपील की है कि वे असुविधा से बचने के लिए पहले से पर्याप्त पानी का भंडारण कर लें।
ये क्षेत्र रहेंगे प्रभावित
राजा गार्डन, रमेश नगर, खयाला, रानी बाग, मोती नगर, शारदा पुरी, टैगोर गार्डन, तिहाड़ विलेज, तिलक नगर, वरुण निकेतन, राजौरी गार्डन, करमपुरा, सरस्वती गार्डन, हरि नगर व आसपास, मानसरोवर गार्डन, विष्णु गार्डन, सुभाष नगर, उत्तम नगर का कुछ भाग, मोहन गार्डन का कुछ भाग, गणेश नगर, कृष्णा पुरी, जे.जे. कॉलोनी खयाला, रवि नगर, चंद नगर तथा आसपास के क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित रहेगी।
टैंकर के लिए इन नंबरों पर करें संपर्क
g सेंट्रल कंट्रोल रूम : 1916, 23527679, 23538495, 23634469
g पंजाबी बाग : 25223658
g शिवाजी एन्क्लेव : 25193140, 25174140
g पश्चिम विहार : 25281197
येलो और ग्रीन लाइन के सात स्टेशनों पर एस्केलेटर बंद रहेंगे
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने यात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए येलो और ग्रीन लाइन के सात मेट्रो स्टेशनों पर चुनिंदा एस्केलेटरों की प्रमुख ओवरहॉलिंग शुरू की है। इस दौरान संबंधित एस्केलेटर अस्थायी रूप से बंद रहेंगे। ग्रीन लाइन के पीरागढ़ी स्टेशन पर ग्राउंड से लोअर कॉनकोर्स तक जाने वाला एस्केलेटर बंद रहेगा। वहीं येलो लाइन के अर्जनगढ़, गुरु द्रोणाचार्य और सिकंदरपुर स्टेशनों पर कॉनकोर्स से प्लेटफॉर्म तक जाने वाले एस्केलेटर पर कार्य चल रहा है। इसके अलावा एमजी रोड, आईएफएफसीओ चौक और मिलेनियम सिटी सेंटर गुरुग्राम स्टेशनों पर ग्राउंड से कॉनकोर्स तक जाने वाले एस्केलेटर की भी ओवरहॉलिंग की जा रही है। डीएमआरसी ने यात्रियों से उपलब्ध लिफ्ट का उपयोग करने, स्टेशन कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करने और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की अपील की है।
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जांच रिपोर्ट : मालवीय नगर अग्निकांड में हादसे के बाद भी सच छिपाने की कोशिश
मजििस् ट्रयल जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों पर तथ्य छिपाने और भ्रामक जानकारी देने के आरोप
धनंजय मिश्रा
नई दिल्ली। मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट ने प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही और हादसे के बाद उसे छिपाने की कोशिशों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम (एमसीडी) के कुछ इंजीनियरों और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने जांच के दौरान ऐसे जवाब दिए, जो उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे जांच को गुमराह करने का प्रयास हुआ और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश दिखाई देती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी जोन के सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार राय ने अपने लिखित जवाब में दावा किया कि होटल भवन को कभी अवैध निर्माण के मामले में बुक नहीं किया गया और न ही उसके खिलाफ कोई ध्वस्तीकरण कार्रवाई शुरू हुई। हालांकि, कार्यकारी अभियंता के रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि इसी भवन को वर्ष 2019 और 2020 में अवैध निर्माण के लिए दो बार बुक किया गया था और उसके खिलाफ डिमोलिशन ऑर्डर भी जारी किए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध अभिलेखों के बावजूद यह जानकारी जांच टीम से छिपाई गई।
देरी से पहुंची थी दमकल : जांच रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने होटल के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थ ट्रेड लाइसेंस जय मिश्रा के नाम पर जारी था, जबकि होटल का वास्तविक संचालन लोकेश बजाज कर रहा था। स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आग सुबह करीब 8:15 बजे लगी, जबकि दमकल की पहली गाड़ियां लगभग 9:30 बजे मौके पर पहुंचीं। इस समय अंतराल की भी जांच की सिफारिश की गई है।
वहीं पर्यटन विभाग ने होटल को सिल्वर कैटेगरी का दर्जा दे दिया, जबकि कई कमरों में न तो खिड़कियां थीं और न ही पर्याप्त वेंटिलेशन। घटनास्थल से बरामद दो जले हुए डीवीआर को डेटा रिकवरी के लिए एफएसएल, रोहिणी भेजा गया है, जिनसे हादसे से पहले और उसके दौरान की गतिविधियों के अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
पुलिस के जवाब भी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए...
जांच रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। तत्कालीन एसएचओ वीरेंद्र दलाल ने जांच में कहा कि होटल के खिलाफ पहले कभी कोई शिकायत नहीं मिली थी। लेकिन रिकॉर्ड के अनुसार, 14 अक्तूबर 2019 को मालवीय नगर थाने से ही होटल के संबंध में शिकायत एमसीडी को भेजी गई थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि वर्तमान एसएचओ विनय यादव ने वर्ष 2020 में होटल संचालक के खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 296/2020 का उल्लेख अपने जवाब में नहीं किया। जांच अधिकारी ने इसे गंभीर चूक माना है। रिपोर्ट के अनुसार होटल का हेल्थ ट्रेड लाइसेंस करीब पांच महीने तक लंबित रहने के बाद दो जून को, यानी आग लगने से ठीक एक दिन पहले, मंजूर कर दिया गया। जांच रिपोर्ट में इस पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की सिफारिश की गई है।
इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश
n एमसीडी : कार्यकारी अभियंता जेएस यादव, सहायक अभियंता सुनील चौहान, सहायक अभियंता यशवंत सिंह और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार राय।
n दिल्ली पुलिस : तत्कालीन एसएचओ वीरेंद्र दलाल, युद्धवीर सिंह, सतीश राणा तथा वर्तमान एसएचओ विनय यादव।
n अन्य विभाग : बीएसईएस के अधिकारी रजनेश कुमार रेखी तथा पर्यटन विभाग की निरीक्षण समिति के संबंधित सदस्य।
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मासूम बच्ची को बिना कपड़े के पीटती और देती थी गालियां, स्कूल में पुलिस कराएगी दाखिला
जब मां ही बन गई डर की वजह...पुलिस ने दिया सहारा
ज्योति सिंह
नई दिल्ली। पुलिस अपराधियों को पकड़ती है, लेकिन उस दिन हमें एक मां से उसकी बेटी को बचाना पड़ा..। यकीन मानिए, यह हमारे लिए भी आसान नहीं था। लेकिन क्या करते.. वो मां अपनी छह साल की मासूम बच्ची को बिना कपड़े के बाहर खड़ा कर देती थी।
उसे मारा करती थी। हमने जैसे ही वीडियो देखा, हम बच्ची को रेस्क्यू करने पहुंच गए। ये बातें जीटीबी एंक्लेव थाना पुलिस टीम बता रही थी। उनके सामने छह साल की एक सहमी हुई बच्ची थी, जो अपनी मां से प्यार भी करती थी और उसी से डरती भी थी।
जीटीबी एंक्लेव थाना पुलिस को शुरुआत में पड़ोसियों से शिकायत मिली कि एक महिला देर रात गाली-गलौज कर इलाके का माहौल खराब करती है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत करा दिया लेकिन कुछ दिन बाद फिर शिकायत आई कि महिला अपनी छह वर्षीय बेटी को भी बुरी तरह प्रताड़ित करती है। पड़ोसियों ने बताया कि बच्ची को कई बार पर्याप्त खाना नहीं दिया जाता, सजा के तौर पर बिना कपड़ों के बाहर खड़ा कर दिया जाता है और घर से अक्सर उसके रोने-चीखने की आवाजें आती हैं। एसएचओ बृजेश मिश्रा ने बताया, कि पुलिस दूसरी दफा वहां पहुंची और बच्ची से बातचीत करने की
कोशिश की। वह बेहद डरी-सहमी हुई थी। पूछने पर पता चला कि वह स्कूल भी नहीं जाती। पुलिस ने स्कूल में दाखिले की बात की, लेकिन बच्ची मां को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुई। उस समय पुलिस के पास कार्रवाई के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे। इसके बाद पुलिस ने जांच में पड़ोसियों को भी शामिल किया। वीडियो साक्ष्य जुटाने के लिए कहा गया। कुछ दिनों के बाद ही पड़ोसियों ने एक वीडियो दिया।
इलाज के बाद सामने आई दर्दभरी कहानी
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, कि इहबास में जब महिला को काउंसिलिंग के लिए लाया गया, वह काफी डरी हुई थी। उसे हम पर विश्वास नहीं था। काफी समझाने पर जब उसने देखा कि यहां काउंसिलिंग के लिए उसके जैसी कई महिलाएं हैं, तो वह शांत हो गई। काउंसिलिंग के बाद महिला जोर-जोर से रोने लगी। इस दौरान महिला ने बताया कि उसका पति उसके साथ नहीं है। मायके और ससुराल, दोनों जगह से कोई सहयोग नहीं मिलता। लंबे समय से अकेलेपन और अवसाद से जूझ रही महिला का गुस्सा उसी की बेटी पर निकल रहा था।
मां से बच्चे को अलग करना किसी भी पुलिसकर्मी के लिए आसान फैसला नहीं होता। लेकिन जब बच्चे की सुरक्षा खतरे में हो, तब उसकी जान और भविष्य को बचाना हमारी पहली जिम्मेदारी बन जाती है। हमारा उद्देश्य सिर्फ बच्ची को बचाना नहीं, बल्कि मां का इलाज कराकर इस परिवार को फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटाना भी है। -आरपी मीणा, शाहदरा पुलिस उपायुक्त
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एनसीआर में बढ़ेगा रैपिड रेल नेटवर्क, जोया-गजरौला में बन सकते हैं स्टेशन
दिल्ली-मुरादाबाद कॉरिडोर ः 10 हजार करोड़ की परियोजना से अमरोहा, हापुड़ और गाजियाबाद जिलों को मिलेगी नई रफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली/अमरोहा। मुरादाबाद से दिल्ली तक प्रस्तावित रैपिड रेल परियोजना दिल्ली-एनसीआर समेत अमरोहा जिले के लिए विकास की नई संभावनाएं लेकर आ सकती है। परियोजना के तहत जोया और गजरौला में रैपिड रेल स्टेशन बनाए जाने की संभावना है।
इससे जिले के लोगों को सीधे रैपिड रेल सेवा का लाभ मिलेगा और दिल्ली तक की यात्रा करीब 90 मिनट में पूरी हो सकेगी। लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विजन रिपोर्ट अंतिम चरण में है और जल्द ही शासन स्तर पर आगे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। ्प्रस्तावित रैपिड रेल कॉरिडोर मुरादाबाद, अमरोहा, हापुड़ और गाजियाबाद होते हुए दिल्ली तक जाएगा। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन सुविधा मिलेगी। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी। परियोजना से पहले कराए गए सर्वे में सामने आया कि दिल्ली रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में दिल्ली रोड से प्रति घंटे करीब 16 हजार वाहन गुजरते हैं, जबकि भविष्य में यह संख्या 25 हजार तक पहुंचने का अनुमान है।
वहीं जोया और ब्रजघाट टोल से प्रतिदिन लगभग 40 हजार वाहन गुजरते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में केवल फ्लाईओवर जैसी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं होंगी, इसलिए रैपिड रेल को दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
व्यापार और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार ः परियोजना के लागू होने पर अमरोहा जिले को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। जोया और गजरौला में प्रस्तावित स्टेशनों से दिल्ली-एनसीआर तक आवागमन आसान होगा। इससे व्यापार, उद्योग, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
चौथे चरण में हापुड़ से गाजियाबाद तक विकास
परियोजना के तहत गजरौला के जीरो प्वाइंट पर आधुनिक इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) विकसित करने की भी योजना है। इससे बस और रैपिड रेल के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी और यात्रियों को निर्बाध परिवहन सुविधा मिल सकेगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार रैपिड रेल कॉरिडोर का निर्माण चार चरणों में होगा। पहले चरण में पाकबड़ा से जोया, दूसरे में जोया से गजरौला, तीसरे में गजरौला से हापुड़ और चौथे चरण में हापुड़ से गाजियाबाद तक कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। अधिकांश ट्रैक राष्ट्रीय राजमार्ग के ऊपर बनाया जाएगा, जिससे सड़क और रेल यातायात दोनों सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
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हमले के तरीके से साफ है, कितनी भयावह थी दोषियों की मंशा : पुलिस
बचाव पक्ष अदालत में बोला केवल भीड़ का हिस्सा होना मौत की सजा का आधार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली दंगों के दौरान हुए अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषियों की फांसी की मांग करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि घावों की प्रकृति साफ बताती है कि हमलावरों की मंशा कितनी भयावह थी।
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडेय ने कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत में कहा कि दंड का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि समाज में यह स्पष्ट संदेश देना भी है कि इस तरह के जघन्य अपराधों के लिए कठोरतम दंड दिया जाएगा। उन्होंने दलील दी कि अपराध की प्रकृति, दोषियों के आचरण और समाज पर उसके प्रभाव को देखते हुए इस मामले में सजा का संतुलन मौत की सजा की ओर झुकता है। वहीं, बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव मोहन ने कहा कि अदालत के फैसले में ताहिर हुसैन की कोई विशिष्ट भूमिका स्थापित नहीं हुई है। 11 आरोपियों में से छह बरी हुए हैं और 91 गवाहों के बावजूद किसी ने हुसैन के घातक वार करने की पुष्टि नहीं की। केवल भीड़ का हिस्सा होना मौत की सजा का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने 91 गवाहों के बयान दर्ज किए, लेकिन किसी गवाह ने हुसैन द्वारा घातक वार किए जाने की विशिष्ट भूमिका नहीं बताई। वकीलों ने यह भी कहा कि दंगों के दौरान पुलिस स्वयं हिंसक भीड़ को नियंत्रित नहीं कर सकी थी, इसलिए पूरी घटना का दायित्व किसी एक व्यक्ति पर नहीं डाला जा सकता। बता दें कि 13 जुलाई को अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य को अंकित शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था।
फैसले में कहा गया था कि हुसैन हथियारों से लैस उस भीड़ का हिस्सा था, जिसने दंगों के दौरान हिंसा, आगजनी और लूटपाट की तथा अंकित शर्मा की क्रूर हत्या की। अदालत ने माना था कि गैरकानूनी सभा के सदस्यों को यह पता था कि उनके साझा उद्देश्य को पूरा करने के दौरान किसी की हत्या हो सकती है। हुसैन को हत्या, अपहरण, दंगा, घातक हथियार से दंगा, विद्वेष फैलाने और गैरकानूनी सभा सहित विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया है। अब 31 जुलाई को अदालत यह तय करेगी कि दोषियों को मौत की सजा मिलेगी या आजीवन कारावास।
राहत की अपील : अधिवक्ता तारा नरूला ने कोर्ट से कहा ताहिर हुसैन अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। उनकी पत्नी व तीन बच्चों का भविष्य उनसे जुड़ा है। उन्होंने आत्मसमर्पण की कोशिश की थी और जेल में उनका आचरण भी अच्छा रहा है। इन परिस्थितियों को सजा तय करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।