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प्रदेश में भूमि डिजिटलीकरण देश की सफल डिजिटल क्रांति होगी : डुल्लू
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मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने रविवार को अधिकारियों संग प्रमुख भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण पहलों की प्रगत
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- मुख्य सचिव ने प्रमुख भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण पहलों की समीक्षा की
- प्रदेश के 98 प्रतिशत खसरा का डिजिटलीकरण और अनुमोदन हो चुका : रंजन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने भूमि डिजिटलीकरण पहलों की परिवर्तनकारी क्षमता पर कहा कि यह देश की कुछ सबसे सफल डिजिटल क्रांतियों से एक होगी। यह पहल यूपीआई और एग्रीस्टैक जैसे अन्य महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की सफलता की तरह ही शासन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। हम एक तकनीकी क्रांति देख रहे हैं और जम्मू-कश्मीर को इसमें सक्रिय और अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने यह बातें रविवार को डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी), ग्राम क्षेत्रों में उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ ग्राम सर्वेक्षण और मानचित्रण (एसवीएमआईटीवीए), विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन) और शहरी बस्तियों के राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान आधारित भूमि सर्वेक्षण की समीक्षा बैठक करते हुए कही।
अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व शालीन काबरा ने भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससेे भूमि अभिलेखों की सुलभता, सटीकता और विश्वसनीयता में काफी सुधार होगा। डीआईएलआरएमपी के तहत हुई प्रगति के बारे में राजस्व प्रशासनिक सचिव कुमार राजीव रंजन ने बताया कि प्रदेश के 98 प्रतिशत खसरा का डिजिटलीकरण और अनुमोदन हो चुका है। 97 प्रतिशत गांवों ने प्रथम स्तर की फ्रीजिंग प्रक्रिया पूरी कर ली है। ग्राम स्तर पर जमाबंदियों के सार्वजनिक पठन के लिए 5,401 से अधिक शिकायत शिविर में 52,000 से अधिक गैर न्यायिक और 5,700 से अधिक अर्ध न्यायिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। जमाबंदियों 2026 को अंतिम रूप देने का कार्य 31 मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।
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प्रदेश के 3,320 गांवों के लिए यूएलपीआईएन जारी
यूएलपीआईएन या भू-आधार के संबंध में बताया गया कि अब तक 3,320 गांवों के लिए 20.56 लाख से अधिक विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर) जारी की जा चुकी हैं। मानचित्रों के डिजिटलीकरण के तहत, 6,857 गांवों में से 6,518 गांवों (95.2 प्रतिशत) को भौगोलिक रूप से चिह्नित किया गया है। जमाबंदियों और गिरदावरी अभिलेखों सहित 7.28 करोड़ राजस्व दस्तावेजों को स्कैन करके भूमि अभिलेख सूचना प्रणाली पर अपलोड किया गया है। शहरी बस्तियों में भूमि अभिलेख तैयार करने का नक्शा कार्यक्रम भी प्रगति पर है। बिश्नाह के लिए हवाई सर्वेक्षण, ओआरआई (भूमि अभिलेख) तैयार करना और जमीनी सत्यापन का कार्य पूरा हो चुका है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने भूमि डिजिटलीकरण पहलों की परिवर्तनकारी क्षमता पर कहा कि यह देश की कुछ सबसे सफल डिजिटल क्रांतियों से एक होगी। यह पहल यूपीआई और एग्रीस्टैक जैसे अन्य महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की सफलता की तरह ही शासन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। हम एक तकनीकी क्रांति देख रहे हैं और जम्मू-कश्मीर को इसमें सक्रिय और अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने यह बातें रविवार को डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी), ग्राम क्षेत्रों में उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ ग्राम सर्वेक्षण और मानचित्रण (एसवीएमआईटीवीए), विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन) और शहरी बस्तियों के राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान आधारित भूमि सर्वेक्षण की समीक्षा बैठक करते हुए कही।
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अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व शालीन काबरा ने भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससेे भूमि अभिलेखों की सुलभता, सटीकता और विश्वसनीयता में काफी सुधार होगा। डीआईएलआरएमपी के तहत हुई प्रगति के बारे में राजस्व प्रशासनिक सचिव कुमार राजीव रंजन ने बताया कि प्रदेश के 98 प्रतिशत खसरा का डिजिटलीकरण और अनुमोदन हो चुका है। 97 प्रतिशत गांवों ने प्रथम स्तर की फ्रीजिंग प्रक्रिया पूरी कर ली है। ग्राम स्तर पर जमाबंदियों के सार्वजनिक पठन के लिए 5,401 से अधिक शिकायत शिविर में 52,000 से अधिक गैर न्यायिक और 5,700 से अधिक अर्ध न्यायिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। जमाबंदियों 2026 को अंतिम रूप देने का कार्य 31 मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।
प्रदेश के 3,320 गांवों के लिए यूएलपीआईएन जारी
यूएलपीआईएन या भू-आधार के संबंध में बताया गया कि अब तक 3,320 गांवों के लिए 20.56 लाख से अधिक विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर) जारी की जा चुकी हैं। मानचित्रों के डिजिटलीकरण के तहत, 6,857 गांवों में से 6,518 गांवों (95.2 प्रतिशत) को भौगोलिक रूप से चिह्नित किया गया है। जमाबंदियों और गिरदावरी अभिलेखों सहित 7.28 करोड़ राजस्व दस्तावेजों को स्कैन करके भूमि अभिलेख सूचना प्रणाली पर अपलोड किया गया है। शहरी बस्तियों में भूमि अभिलेख तैयार करने का नक्शा कार्यक्रम भी प्रगति पर है। बिश्नाह के लिए हवाई सर्वेक्षण, ओआरआई (भूमि अभिलेख) तैयार करना और जमीनी सत्यापन का कार्य पूरा हो चुका है।