संडे मार्केट ग्रेनेड हमला: अफनान को हाईकोर्ट से राहत, 74 दिन की देरी माफ; 20 नवंबर को अगली सुनवाई
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने श्रीनगर के संडे मार्केट ग्रेनेड हमले की साजिश के आरोपी अफनान मंजूर की अपील दायर करने में हुई 74 दिन की देरी माफ करने की अर्जी मंजूर कर ली। एनआईए की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। मामले में अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।
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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने श्रीनगर के संडे मार्केट में हुए ग्रेनेड हमले की साजिश के आरोपी अफनान मंजूर की 74 दिन की देरी माफी की अपील मंजूर कर ली। कई मौके दिए जाने के बावजूद एनआईए से कोई जवाब न आने पर हाईकोर्ट ने माना कि उसे आवेदन पर कोई आपत्ति नहीं है। मामले में अगली सुनवाई आगामी 20 नवंबर को होगी। संबंधित याचिका अफनान मंजूर नाइक के पिता मोहम्मद मंजूर नाइक की ओर से दाखिल की गई थी। मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए प्रतिवादी है। जस्टिस संजय धर और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने आवेदन पर सुनवाई की।
आवेदन में आरोपी ने इसी साल एक जून के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने में हुई देरी को माफ करने की मांग की थी। इसके तहत निचली अदालत ने अपीलकर्ता की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। आवेदन में कहा गया है कि अपीलकर्ता की माता की लंबी बीमारी के कारण तय समय सीमा के भीतर अपील दायर नहीं की जा सकी। साथ ही यह भी बताया गया है कि इसी वजह से अपीलकर्ता के पिता भी तय समय के भीतर वकील से ठीक से संपर्क नहीं कर पाए। जस्टिस संजय धर और जस्टिस शहजाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि कई मौके दिए जाने के बावजूद एनआईए की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। पिछली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम मौका दिया गया था, लेकिन प्रतिवादी ने फिर भी कोई जवाब नहीं दिया। ऐसे में कोर्ट ने माना कि एनआईए को आवेदन पर कोई आपत्ति नहीं है। ऐसे में उसने आवेदन मंजूर कर लिया।
श्रीनगर संडे मार्केट में हुआ था ग्रेनेड हमला
एनआईए और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार अफनान मंजूर नाइक और उसके साथियों पर श्रीनगर के संडे मार्केट में हुए एक ग्रेनेड हमले की आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोप है। अफनान को प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट जम्मू-कश्मीर यानी आईएसजेके से जुड़े होने का बताते हुए हमले की साजिश रचने के आरोप तय किए गए हैं। एनआईए की विशेष अदालत में उन पर सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की गई थी।
वकील न होने से दर्ज नहीं हो सके गवाह के बयान, आरोपी पर 500 रुपये जुर्माना
महिला से दुष्कर्म और धमकी के मामले में आरोपी का वकील उपलब्ध न होने से गवाह के बयान दर्ज नहीं हो सके। इस पर कोर्ट ने आरोपी पर 500 रुपये जुर्माना लगाया। इस राशि का भुगतान खुली कोर्ट में आरोपी की ओर से गवाह को किया गया। मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट जम्मू से जुड़ा है। इस कोर्ट के पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह लंगेह केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर (एसएचओ, पुलिस थाना अरनिया, जम्मू) बनाम गोविंद कंगोत्रा निवासी सांबा मामले की सुनवाई कर रहे थे। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376/366/506 के तहत अपराध दर्ज हैं। सुनवाई में अभियोजन पक्ष की गवाह चंपा देवी मौजूद थीं।
गवाह के होने के बावजूद अभियुक्त के वकील के उपलब्ध न होने के कारण उनके बयान दर्ज नहीं किए जा सके। अभियुक्त ने कहा कि उसे कोई अन्य वकील नियुक्त करना है। ऐसे में अदालत ने अभियुक्त पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया। गवाह को राशि देकर जाने की इजाजत देते हुए अदालत ने आरोपी को अगली तारीख पर अपने वकील की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अभियोजन पक्ष के साक्ष्य के लिए मामला आगामी तीन दिसंबर को अधिसूचित किया गया है।