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किरायेदार को मकान मालिक के मालिकाना हक को चुनौती देने का अधिकार नहीं : उच्च न्यायालय
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने राजोरी जिले की थन्नामंडी तहसील के दोडासन बाला स्थित भूमि से संबंधित दो रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत किरायेदार को अपने भू-स्वामी के मालिकाना हक पर सवाल उठाने का कोई वैध अधिकार नहीं है।
न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल ने ओडब्ल्यूपी नंबर 930/2018 और ओडब्ल्यूपी नंबर 1807/2014 पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। पीठ ने माना कि याचिकाकर्ता खानकाह शरीफ पीर बाबा जीवन शाह के तहत किराएदार थे, इसलिए वे इस विवादित भूमि पर दरगाह/श्राइन के स्वामित्व को चुनौती नहीं दे सकते। यह फैसला 29 अगस्त को सुनाया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके पूर्वज मूल भू-स्वामियों के तहत किराएदार के रूप में जमीन पर खेती कर रहे थे और खानकाह के पक्ष में किया गया म्यूटेशन पूरी तरह से अवैध है। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि मूल मालिक हिंदू थे, इसलिए वे श्राइन के पक्ष में वक्फ नहीं बना सकते थे। औकाफ की ओर से पेश वकीलों ने राजस्व रिकॉर्ड, किराया की रसीदें और पूर्व की कार्यवाहियों में दर्ज बयानों का हवाला देते हुए साबित किया कि याचिकाकर्ता और उनके पूर्वज हमेशा से खानकाह के किरायेदार रहे हैं। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज दर्शाते हैं कि याचिकाकर्ताओं ने खुद को खानकाह शरीफ का किराएदार स्वीकार किया था। औकाफ को किराया देने की रसीदें भी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। जेएनएफ
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न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल ने ओडब्ल्यूपी नंबर 930/2018 और ओडब्ल्यूपी नंबर 1807/2014 पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। पीठ ने माना कि याचिकाकर्ता खानकाह शरीफ पीर बाबा जीवन शाह के तहत किराएदार थे, इसलिए वे इस विवादित भूमि पर दरगाह/श्राइन के स्वामित्व को चुनौती नहीं दे सकते। यह फैसला 29 अगस्त को सुनाया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके पूर्वज मूल भू-स्वामियों के तहत किराएदार के रूप में जमीन पर खेती कर रहे थे और खानकाह के पक्ष में किया गया म्यूटेशन पूरी तरह से अवैध है। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि मूल मालिक हिंदू थे, इसलिए वे श्राइन के पक्ष में वक्फ नहीं बना सकते थे। औकाफ की ओर से पेश वकीलों ने राजस्व रिकॉर्ड, किराया की रसीदें और पूर्व की कार्यवाहियों में दर्ज बयानों का हवाला देते हुए साबित किया कि याचिकाकर्ता और उनके पूर्वज हमेशा से खानकाह के किरायेदार रहे हैं। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज दर्शाते हैं कि याचिकाकर्ताओं ने खुद को खानकाह शरीफ का किराएदार स्वीकार किया था। औकाफ को किराया देने की रसीदें भी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। जेएनएफ
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