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आतंकियों के 'सपोर्ट सिस्टम' पर वार: सैफुल्लाह आतंकी ग्रुप के सफाए के बाद मददगारों पर शिकंजा, तीन OGW गिरफ्तार

Wed, 29 Jul 2026 01:55 PM IST
Nikita Gupta अरुण रोशन, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अरुण रोशन, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 29 Jul 2026 01:55 PM IST
सार

सैफुल्लाह आतंकी ग्रुप के खात्मे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसके मददगारों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स के नेटवर्क पर कार्रवाई तेज कर दी है, जिसमें पांच महीनों में तीन सहयोगी गिरफ्तार किए गए हैं।

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Crackdown on accomplices following the elimination of the Saifullah Group.
जम्मू कश्मीर पुलिस - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

कठुआ से लेकर किश्तवाड़ जिले तक 18 महीने सक्रिय रहे सैफुल्लाह आतंकी ग्रुप का सफाया करने के बाद सुरक्षाबल अब उसके ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और मददगारों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गए हैं।

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बीते पांच महीनों में किश्तवाड़ पुलिस ने तीन ऐसे मददगारों को गिरफ्तार किया है जो आतंकियों को पनाह, राशन, कपड़े और अन्य रसद उपलब्ध कराते थे। स्थानीय मददगारों के सहारे ही सैफुल्लाह ग्रुप लंबे समय तक सक्रिय रहा और लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। सुरक्षाबलों ने इस ग्रुप को इस्राइल ग्रुप का नाम दिया था। इसमें सात सदस्य थे। पिछले डेढ़ साल के दौरान सुरक्षाबलों का 17 अलग-अलग मौकों पर इन आतंकियों से आमना-सामना हुआ था। इन आतंकियों का किश्तवाड़ में स्पोर्ट सिस्टम इतना मजबूत था कि जिले के सिंहपोरा (छात्रू) के घने जंगलों में लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर ठिकाना बनाया था, जो हमास स्टाइल भूमिगत ठिकाना था। निकासी की भी जगह थी।

ठिकाने में गैस सिलिंडर, गैस चूल्हा, खाना बनाने के बर्तन, दो से तीन महीने का राशन और पानी के लिए प्लास्टिक का बड़ा ड्रम मिला था। इतनी ऊंचाई पर आतंकियों तक यह सामान इन मददगारों ने पहुंचाया था। स्थानीय स्तर पर मिली सहायता के कारण ही सुरक्षाबलों का ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना रहा। अब इन मददगारों की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आतंकियों को किन-किन लोगों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग दिया। किश्तवाड़ के एसएसपी नरेश सिंह के अनुसार आतंकवादियों को मदद और सुविधाएं मुहैया कराने वालों पर कार्रवाई जारी है।
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ये हैं गिरफ्तार मददगार
तारिक अहमद गीनू और मोहम्मद इकबाल : किश्तवाड़ पुलिस ने 19 जून 2026 को दच्छन के टंडर क्षेत्र से दोनों को गिरफ्तार किया था। तारिक अहमद गीनू वन विभाग का कर्मचारी है और सक्रिय हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी मुदस्सिर हुसैन का पिता है। पुलिस के अनुसार दोनों ने आतंकियों को भोजन, कपड़े और अन्य रसद उपलब्ध कराया था।

मुनीर अहमद : बंदेयान नैडगाम, छात्रू-सिंहपोरा निवासी मुनीर अहमद ने विदेशी आतंकियों के लिए ठिकाने तैयार किए। सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखी। आतंकियों के लिए राशन की व्यवस्था की। पुलिस का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी से नेटवर्क के कई अहम सुराग मिले हैं।

मशकूर अहमद : बेगपोरा, सिंहपोरा निवासी और स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षक मशकूर अहमद ने आतंकियों के ठिकानों की व्यवस्था में भूमिका निभाई। पुलिस के अनुसार उसकी गिरफ्तारी से आतंकियों की रसद व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है।
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