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एयरस्पेस बंद, एयर स्ट्राइक का खतरा: ईरान-खाड़ी तनाव में जम्मू-कश्मीर के आठ हजार लोग फंसे, वतन वापसी का इंतजार

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Tue, 03 Mar 2026 12:41 PM IST
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सार

जम्मू-कश्मीर के लगभग आठ हजार लोग ईरान और खाड़ी देशों में फंसे हैं, जिनमें हज-उमरा के तीर्थयात्री और मेडिकल छात्र शामिल हैं, और वे वतन वापसी का इंतजार कर रहे हैं। सरकार संकट को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने और मदद पहुंचाने की योजना बना रही है।

Eight thousand people from the state are stranded in Gulf countries including Iran.
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

इस्राइल-अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने खाड़ी मुल्कों को निशाना बनाया है। वहां के कई प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान हुआ है। इस बीच ज्यादातर देशों ने अपने एयर स्पेस बंद कर दिए हैं। दूसरे देशों के लोग वहां हवाई अड्डों पर किसी तरह सुरक्षित वतन वापसी की आस लगाए इंतजार कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के भी आठ हजार से अधिक लोग ईरान समेत खाड़ी देशों में फंसे हैं।

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इसमें अकेले जेद्दा एयरपोर्ट पर पांच हजार से ज्यादा लोग फंसे हैं। ये वे लोग हैं, जो हज और उमरा के लिए गए थे और अब वतन वापसी का इंतजार कर रहे हैं। यूनाइटेड हज उमरा एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद हारिस बताते हैं कि इस बार बीते वर्षों के मुकाबले ज्यादा लोग उमरा के लिए गए थे।
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वहीं, ईरान में जम्मू-कश्मीर के करीब तीन हजार छात्र फंसे हैं। इनमें से 95 प्रतिशत के करीब मेडिकल की पढ़ाई के लिए वहां गए थे। ऑल जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नासिर बताते हैं कि वे इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिख रहे हैं। वहां विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को हॉस्टल खाली करने को कहा जा रहा है। दिक्कत यह है कि वहां हर वक्त एयर स्ट्राइक का खतरा है। सरकार के लिए एकदम से सभी वतन वापस लाना संभव नहीं लेकिन उन्हें वहीं किसी सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सकता है। जैसे उन्हें आर्मीनिया बॉर्डर या अजर बैजान बॉर्डर की ओर से शिफ्ट किया जा सकता है।

एक अनुमान के अनुसार, फंसे हुए लोगों की दोगुनी हो सकती है। हजार से अधिक लोग खाड़ी देशों में फंसे हो सकते हैं। इसके अलावा खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, यूएई में यहां से जाकर काम करने वाले भी बड़ी संख्या में हैं। ये भी अपने देश, अपने घर-परिवार के पास सुरक्षित लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

माता-पिता ने की अपील ईरान से बच्चों को सुरक्षित निकासी यकीनी बनाए केंद्र
बारामुला जिले के सोपोर इलाके में उन परिवारों ने केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई के लिए अपील की है जिनके बच्चे ईरान में पढ़ाई कर रहे हैं। ईरान में बढ़ते तनाव, हवाई हमलों और अशांति के बीच माता-पिता ने अपने बेटे-बेटियों की सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। परिवारों ने बताया कि ईरान की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति ने उन्हें गहरी चिंता में डाल दिया है। छात्रों से नियमित संपर्क मुश्किल हो गया है क्योंकि इंटरनेट बंदी और सेवाओं में बार-बार व्यवधान आ रहे हैं। माता-पिता के अनुसार, ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने और यात्रा विकल्पों के बेहद सीमित होने से स्वतंत्र रूप से वापसी लगभग असंभव हो गई है।

मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार ने कहा, गृहमंत्रालय से साध रहे संपर्क
युद्ध के बीच ईरान में पढ़ाई करने गए जम्मू-कश्मीर के मेडिकल छात्र फंसे हुए हैं। काउंसिल के रजिस्ट्रार का कहना है कि गृह मंत्रालय की जारी होने वाली एडवाइजरी का इंतजार है। इसके बाद स्पष्ट होगा कि वहां कितने मेडिकल छात्र फंसे हैं। जम्मू कश्मीर मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. संदीप डोगरा ने बताया कि कुछ छात्र युद्ध से पहले आए हैं। युद्ध के बाद की स्थितियों में अभी कोई मेडिकल छात्र ईरान से नहीं लौटा है। 

छात्रों को सुरक्षित जगह भेजने के लिए दखल दें पीएम
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने ईरान में बढ़तीं एयर स्ट्राइक के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से तुरंत दखल देने और भारतीय छात्रों खासकर प्रदेश से आए छात्रों को सुरक्षित जगहों पर भेजने में मदद करने की अपील की है।

बड़ी संख्या में काम करने गए हैं लोग:
ईरान समेत खाड़ी देशों में जम्मू-कश्मीर के लोग बड़ी संख्या में काम करने गए हैं। इनमें से बहुत से ऐसे हैं, जिन्होंने मेडिकल से संबंधित कोर्स करके वहीं काम शुरू कर दिया है। इनकी जानकारी जुटाई जा रही है।

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