घुसपैठ की आशंका: आईबी की सुरक्षा के लिए खतरा बने अतिक्रमण से सभी चिंतित, अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर
गृह मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के 15 किलोमीटर दायरे में हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए हैं, ताकि सीमावर्ती इलाकों में एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार किया जा सके।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के 15 किलोमीटर के दायरे में हुए अवैध निर्माणों और अतिक्रमण को ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री की योजना के अनुसार सीमावर्ती जिले में नागरिकों, पुलिस और सेना को शामिल कर एक आधुनिक सुरक्षा ग्रिड तैयार करना है। जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान के साथ संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा साझा करता है। इस फैसले का जम्मू, सांबा व कठुआ जिले पर व्यापक भू-राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षात्मक असर पड़ेगा।
अखनूर : कार्रवाई की जद में आएगा गड़खाल क्षेत्र
अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर दायरे में अवैध निर्माण हटाने की प्रशासनिक तैयारी के बीच अखनूर की गड़खाल पंचायत चर्चा में है। सीमा से सटे इस संवेदनशील क्षेत्र में पिछले करीब एक दशक में कच्चे ढांचों की जगह बड़ी संख्या में पक्के निर्माण हो गए। स्थानीय स्तर पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। राजस्व विभाग के अनुसार सरकारी जमानों पर अवैध अतिक्रमणकारियों की गिरदावरी रिकॉर्ड से काटी जा चुकी है, लेकिन जमीन पर बड़ी संख्या में पक्के व कच्चे निर्माण अब भी मौजूद हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार गड़खाल और आसपास का क्षेत्र पहले भी घुसपैठ की कोशिशों के कारण संवेदनशील रहा है। वर्ष 2012 सहित कई बार पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी फेंसिंग काटकर घुसपैठ कराने के प्रयास हुए, जिन्हें सीमा सुरक्षा बल ने नाकाम किया। दिसंबर 2025 में गड़खाल से कुछ किलोमीटर दूर परगवाल सेक्टर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अब्दुल खालिक को एमजी-5 राइफल सहित बीएसएफ ने गिरफ्तार किया था। हाल ही में सीमा पार से संदिग्ध सेटेलाइट सिग्नल मिलने के बाद तलाशी अभियान भी चलाया गया।
कार्रवाई के फैसले पर स्थानीय लोगों की राय बंटी हुई है। एक वर्ग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संभावित डेमोग्राफी बदलाव से जोड़कर देख रहा है। उनका कहना है कि सीमा क्षेत्र में अवैध कब्जे भविष्य में सुरक्षा चुनौतियां बढ़ा सकते हैं। वहीं, एक पक्ष का कहना है कि वे वर्षों से यहां रहकर पशुपालन और खेती-बाड़ी से गुजारा कर रहे हैं। बाढ़ के दौरान वह विस्थापित होकर अखनूर चले गए थे लेकिन प्रशासन ने उन्हें दोबारा इसी क्षेत्र में भेज दिया। ऐसे में किसी भी कार्रवाई से उनके जीवन और रोजगार पर गंभीर असर पड़ेगा।
अरनिया: सीमा सुरक्षित, नार्को टेररिज्म का भी खात्मा
अरनिया सेक्टर के सीमावर्ती गांवों के लोगों ने गृहमंत्री की घोषणा का गर्मजोशी से स्वागत किया है। गांव चंगिया के पूर्व सरपंच रघुवीर सिंह के अनुसार इससे नार्को टेररिज्म का खात्मा होगा, बॉर्डर की सुरक्षा पुख्ता होगी। ड्रोन ड्रॉपिंग व आतंकियों को पनाह देने के रास्ते भी बंद हो जाएंगे। यहां ज्यादातर अतिक्रमण नदी-नालों के किनारे किया गया है। इसका सीधा लाभ घुसपैठियों को मिलता है। यहां पाकिस्तान की ओर से ड्रोन ड्रॉपिंग बढ़ा दी गई है। गांव में बड़ी मात्रा में हेरोइन की खेप इसी रास्ते पहुंच रही है। ऐसे में 15 किलोमीटर के दायरे में अवैध निर्माण हटाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता हो जाएगी।
गांव निकोवाल के पूर्व सरपंच विजय चौधरी ने बताया कि वर्ष 1990 से पहले अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ अवैध निर्माण नहीं थे। समय बीतने के साथ प्रदेश सरकार ने अवैध निर्माण पर ध्यान नहीं दिया। इससे अंतरराष्ट्रीय सीमा के सटे गांवों में अवैध निर्माण होते चले गए। बाद में वहीं से घुसपैठ और ड्रोन ड्रॉपिंग की गतिविधियां शुरू हो गईं।
कठुआ: बढ़ी चिंता, अतिक्रमण को परिभाषित करने की मांग
सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों में असमंजस है। उन्हें चिंता अवैध निर्माण के चिहि्नकरण और कार्रवाई को लेकर है। खास तौर से कठुआ जिले के जीरो लाइन से पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोग वीरवार को इसे लेकर चर्चा करते रहे। बीएसएफ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रहने वाले सीमावर्ती किसानों ने दशकों गोलाबारी का दंश झेला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में लगभग 2500 लोग हैं जो सरकारी जमीन पर आबादी हैं।
बॉर्डर यूनियन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांव में 80 फीसदी जमीनें सरकारी हैं। इनपर अस्थायी बस्तियां हैं। लगभग छह हजार कनाल जमीन पर बॉर्डर के किसान खेती कर रहे हैं। 2018 में उन्हें हटाने के लिए नोटिस दिया गया। जमीनों की गिरदावरियां भी काटी जा चुकी हैं, लेकिन लोग आज भी वहीं पर हैं। ऐसे में अब केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देश से इन परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
बॉर्डर यूनियन के भारत भूषण कहते हैं कि केंद्र सरकार को पहले अतिक्रमण को परिभाषित करना चाहिए। 1947 से पहले जम्मू-कश्मीर की सारी जमीनों पर लोगों के मालिकाना हक थे। कृषि सुधार एक्ट से जमीन सरकार के हाथों में चली गई। सीमा पर बसे हर धर्म के लोगों के पास ऐसी जमीन है। नए आदेश से हाईवे को पार करते हुए कंडी के इलाके तक कार्रवाई हो सकती है।
सांबा: कार्रवाई की घोषणा का स्वागत
अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के 15 किमी दायरे से अतिक्रमण हटाने की घोषणा का सांबा के लोगों ने स्वागत किया। स्थानीय निवासी रंजीत सिंह, सोहन सिंह, कुलभूषण सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में लंबे समय से नदी-नालों और सरकारी भूमि पर कब्जे हुए हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अतिक्रमण की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व घुसपैठियों और नशा तस्करों को संरक्षण देने का काम भी करते हैं। ऐसे में अब जरूरी है कि कार्रवाई निष्पक्ष हो और केवल अवैध कब्जेदारों को ही दायरे में लाया जाए। कार्रवाई से बबर नाला, बसंतर व देविका के किनारे से अतिक्रमण हटाना आसान होगा।
आरएस पुरा: नए आदेश को लेकर दिखी चिंता
पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट रहने वाले प्रीतम सिंह चिब ने कहा कि कई परिवारों के मकान और अन्य निर्माण इस कार्रवाई से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों की स्थिति को ध्यान में रखा जाए। इस सब के बीच देश की सुरक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। आरएस पुरा के बाजार सहित कुलियां के पास तक 15 किलोमीटर का क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के दायरे में आता है। यहां अधिकतर लोगों के पास जमीन व मकान का मालिकाना हक नहीं है। ऐसे में लोग नए आदेश से चिंतित हैं।
दोमाना: मकवाल में खेती वाली जमीन
मढ़ विधानसभा के मकवाल और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में वीरवार को केंद्रीय गृह मंत्री के आदेश की चर्चा होती रही। सुरक्षा एजेंसियां इसे सीमा क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रही हैं। मकवाल मुख्य रूप से कृषि भूमि वाला क्षेत्र है। तहसीलदार फ्लांय मंडाल अथिरा जम्वाल का कहना है कि मकवाल में फिलहाल भूमि अतिक्रमण के मामले सामने नहीं आए हैं। अधिकतर जमीन खेती के लिए इस्तेमाल हो रही है। प्रशासन सीमावर्ती क्षेत्रों में होने वाले निर्माण पर नजर बनाए हुए है।
मिश्रीवाला: यहां के हालात अन्य से जुदा
जम्मू के सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिक्रमण की बात समय-समय पर सामने आती रही है। कुछ गांवों में अवैध ढांचों को हटाया भी गया। मढ़ विधानसभा क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों से अभी तक अवैध निर्माण की बात सामने नहीं आई। मढ़ के तहसीलदार के अनुसार सीमावर्ती गांवों में अधिकतर लोग अपनी जमीन पर दशकों से बने पुश्तैनी मकानों में रह रहे हैं। यहां 1947 व 1971 के बाद विस्थापित होकर आए परिवारों के घर हैं। सभी को सरकार ने ही बसाया था। ये निर्माण अवैध नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
सुरक्षा एजेंसियां कार्रवाई को मानती हैं जरूरी
घुसपैठ के लिए छिपने की जगह सीमा के पास बने अवैध ढांचे, गोदाम, खाली कमरे या खेतों में बने शेड घुसपैठियों और तस्करों के अस्थायी ठिकाने बन सकते हैं।
ड्रोन गतिविधियों को बढ़ावा
जम्मू सीमा पर हाल के वर्षों में ड्रोन से हथियार और हेरोइन गिराने के कई मामले सामने आए हैं। घनी और अनियोजित बस्तियों में ड्रॉप पॉइंट छिपाना आसान हो जाता है।
बीएसएफ की निगरानी में बाधा
बीएसएफ को निगरानी और गश्त के लिए सीमा पर सब साफ दिखना चाहिए। अवैध निर्माणों से निगरानी उपकरणों, कैमरों और पेट्रोलिंग में रुकावट आती है।
सुरंग और तस्करी नेटवर्क
जम्मू सेक्टर में पहले कई बार सुरंगें मिलने के मामले सामने आए हैं। अनियंत्रित निर्माण गतिविधियां ऐसे नेटवर्क को छिपाने में मदद कर सकती हैं।
जनसांख्यिकीय बदलाव
अनधिकृत बस्तियां और रोहिंग्या जैसे अवैध प्रवासियों के सीमा के पास बसने से स्थानीय जनसांख्यिकी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इससे आंतरिक सुरक्षा को खतरा बढ़ गया है।