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Jammu News: वन भूमि पर कब्जे के मामले में तालिब की पीएसए में हिरासत रद्द
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- जस्टिस राजेश सेखरी ने याचिकाकर्ता को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिए
- कहा कि जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पारित आदेश गलत और अस्पष्ट थे
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने वन भूमि पर कब्जे के मामले में तालिब हुसैन के खिलाफ लोक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हिरासत में लेने वाली एजेंसी किसी नागरिक की निजी आजादी में दखल देते हुए किसी अधिकरण के रबर स्टैंप की तरह काम नहीं कर सकती।
जस्टिस राजेश सेखरी ने पाया कि जम्मू के जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पारित आदेश गलत, अस्पष्ट और कानूनी तौर पर टिकने लायक नहीं थे। याचिकाकर्ता ने दो हिरासत आदेशों को चुनौती दी थी। हिरासत जम्मू वन प्रभाग के डीएफओ की ओर से जमा किए गए एक डोजियर पर आधारित था। इसमें हुसैन पर एक आदतन जमीन हड़पने वाला व्यक्ति होने का आरोप था। उसका नाम वन विभाग की अतिक्रमण लिस्ट में बाहु फॉरेस्ट रेंज के कुछ हिस्सों में जंगल की जमीन पर कब्जे के लिए दर्ज था। यह बाहु कंजर्वेशन रिजर्व का हिस्सा है।
डोजियर में आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता ने डिमार्केशन की कार्रवाई में रुकावट डाली। उसने जमीन तोड़ने के साथ ही गैर-कानूनी लेवलिंग की कोशिश की। वन भूमि पर गैर-कानूनी माइनिंग की और रिहायशी प्लॉट काटे। हाईकोर्ट ने देखा कि हिरासत संबंधी रिकॉर्ड में जिन दो और एंट्री पर भरोसा किया गया था, वे सात कनाल और 150 कनाल वन भूमि पर कब्जे से जुड़ी थीं। वे खास तौर पर याचिकाकर्ता के पिता, सैन डिट्टा के नाम थीं। जेएनएफ
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- कहा कि जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पारित आदेश गलत और अस्पष्ट थे
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने वन भूमि पर कब्जे के मामले में तालिब हुसैन के खिलाफ लोक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हिरासत में लेने वाली एजेंसी किसी नागरिक की निजी आजादी में दखल देते हुए किसी अधिकरण के रबर स्टैंप की तरह काम नहीं कर सकती।
जस्टिस राजेश सेखरी ने पाया कि जम्मू के जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पारित आदेश गलत, अस्पष्ट और कानूनी तौर पर टिकने लायक नहीं थे। याचिकाकर्ता ने दो हिरासत आदेशों को चुनौती दी थी। हिरासत जम्मू वन प्रभाग के डीएफओ की ओर से जमा किए गए एक डोजियर पर आधारित था। इसमें हुसैन पर एक आदतन जमीन हड़पने वाला व्यक्ति होने का आरोप था। उसका नाम वन विभाग की अतिक्रमण लिस्ट में बाहु फॉरेस्ट रेंज के कुछ हिस्सों में जंगल की जमीन पर कब्जे के लिए दर्ज था। यह बाहु कंजर्वेशन रिजर्व का हिस्सा है।
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डोजियर में आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता ने डिमार्केशन की कार्रवाई में रुकावट डाली। उसने जमीन तोड़ने के साथ ही गैर-कानूनी लेवलिंग की कोशिश की। वन भूमि पर गैर-कानूनी माइनिंग की और रिहायशी प्लॉट काटे। हाईकोर्ट ने देखा कि हिरासत संबंधी रिकॉर्ड में जिन दो और एंट्री पर भरोसा किया गया था, वे सात कनाल और 150 कनाल वन भूमि पर कब्जे से जुड़ी थीं। वे खास तौर पर याचिकाकर्ता के पिता, सैन डिट्टा के नाम थीं। जेएनएफ