Interview: 2011 की जनगणना पर तय नहीं कर सकते आरक्षण, जाति आधारित गणना जरूरी, बोले- गुलाम अहमद मीर
कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर जम्मू-कश्मीर में आरक्षण तय करना अतार्किक है और इसके लिए पहले जाति आधारित नई गणना जरूरी है। उन्होंने डुप्लीकेसी और आंकड़ों की कमी को लेकर उमर सरकार के आरक्षण प्रस्ताव पर सवाल उठाए और सामाजिक सुरक्षा पर तार्किक फैसले का सुझाव दिया।
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कांग्रेस विधायक दल के नेता और पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने उमर सरकार के आरक्षण प्रस्तावों पर सवाल उठाते हुए इसे अतार्किक बताया है। उन्होंने कहा कि बिना सही तथ्यों के हम आरक्षण के लिए प्रतिशत नहीं तय कर सकते। तकनीकी, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर उमर सरकार के आरक्षण प्रस्ताव सही नहीं है। सोमवार को जीए मीर ने आरक्षण के अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ कांग्रेस के रिश्तों और पश्चिमी बंगाल चुनाव की तैयारियों पर भी अमर उजाला की रोली खन्ना के साथ विशेष बातचीत में चर्चा की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।
तकनीकी, सामाजिक व राजनीतिक तौर पर उमर कैबिनेट के आरक्षण प्रस्ताव सही नहीं
मीर ने आरक्षण पर कैबिनेट प्रस्ताव को जल्दबाजी में तैयार किया बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा पसमांदा समाज, पिछड़े तबके को सुरक्षा देने की जरूरत पर बल दिया है। इसके लिए आलोचना भी झेलते हैं और चुनावों में भी मात खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादा संख्या एसटी-एससी, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर तबके की है। हम या तो एकदम मेरिट को ही आधार बना लें पर निजाम ने कमजोर तबके के लिए सामाजिक सुरक्षा देने का एक सिस्टम बनाया है। कांग्रेस का मानना है कि सबसे बड़ी आबादी चाहे किसी भी वर्ग की हो, उसे तार्किक आधार पर आरक्षण का सामाजिक सुरक्षा कवच देना चाहिए। तार्किक आधार पर फैसला होगा तो किसी का हक नहीं मारा जाएगा। जिन लोगों के आरक्षण प्रतिशत को लेकर हम लड़ रहे हैं, हम ये तो देखें कि ऐसे लोगों की आबादी कितनी है। ये लोग कितना प्रतिशत हैं। पुरानी जनगणना के आधार पर हम फैसला नहीं कर सकते हैं। हम कल्पनाओं के आधार पर आरक्षण का प्रतिशत तय नहीं कर सकते हैं।
प्रदेश में डुप्लीकेसी ज्यादा है
मीर ने कहा कि मैंने खुद पिछली बार उपराज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में इस ओर ध्यान दिलाया था कि इस प्रदेश में पहले जाति आधारित जनगणना करनी चाहिए। यहां डुप्लीकेसी ज्यादा है। उदाहरण के लिए एक ही व्यक्ति ओबीसी भी है, ईडब्ल्यूएस में भी है, एससी-एसटी में भी है। आदमी एक है, नाम चार जगह है। ऐसे में आप खुद सोचिए कि हम लाभार्थियों का प्रतिशत किस हद तक तार्किक ठहरा सकते हैं?
बजट के लिए एनसी को दिए 10 में से 8.5 नंबर
उमर सरकार के दूसरे बजट को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रयासों को सराहा। कहा कि हितधारकों के साथ लंबा मंथन करके बजट तैयार किया गया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। इसलिए मैं उमर सरकार को 10 में से 8.5 नंबर दूंगा।
पश्चिम बंगाल चुनाव पर बोले-तृणमूल साथ मांगने आई ही नहीं तो गठबंधन कैसा
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के साथ गठबंधन को लेकर जीए मीर ने कहा कि जीत का हर कोई बाप होता है पर हार की मां बनने को कई तैयार नहीं होता है। हमें बीते 20 वर्षों का अनुभव है। हमने देखा कि गठबंधन में न हमें फायदा हुआ न हमारे पार्टनर को। दोनों ही शून्य पर ठहर गए। 2021 में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद रणनीतिक बदलाव का फैसला लिया गया। हो सकता है कि हमें अकेले लड़ने पर इस बार कुछ हासिल न हो पर हम भविष्य के लिए अपने आधार को मजबूत बना रहे हैं। हमारे पास खोने को कुछ नहीं है इसलिए जोखिम क्यों न उठाया जाए। रही बात टीएमसी की तो उनसे पूछा जाना चाहिए कि क्या वो हमारा साथ मांगने आए थे। नहीं आए तो फिर गठबंधन कैसा? बड़ी चुनौतियों के बीच अन्य दलों को साथ लेकर उन्हें जीतने की रणनीति बनानी चाहिए थी पर उन्होंने यह नहीं किया।
जो मैदान में लड़ता दिखेगा उसे जिम्मेदारी देने पर करेंगे विचार
पश्चिमी बंगाल चुनाव में पार्टी का चेहरा कौन होगा, इस सवाल के जवाब में मीर ने कहा कि हमारा चेहरा राहुल गांधी ही हैं। हम नहीं चाहते कि लोग लड़ें भी नहीं और उन्हें हम मैदान में उतार दें। ऐसे लोगों को अवाम नकार देती है। मीर ने कहा कि अभी चुनाव होने दें जो मैदान में लड़ता दिखेगा उसे जिम्मेदारी देने पर भी विचार किया जाएगा।
चुनाव के बाद कैबिनेट में शामिल न होना, राज्यसभा चुनाव के दौरान सुरक्षित सीट की मांग पूरी न होना जैसे उदाहरण कांग्रेस और नेकां के रिश्तों को असहज साबित करते रहे हैं। मीर ने कहा कि एक कहावत है दोस्ती पक्की, खर्च अपना-अपना। हां, सोनिया गांधी और डॉ. फारूक अब्दुल्ला के बीच राज्यसभा चुनाव में सीटों को लेकर सहमति बनी थी। उसी दौरान डॉ. फारूक की तबीयत खराब हो गई। दो वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई बातचीत को अंतिम समय में किस तरह से कोड किया गया, क्या से क्या हुआ, ये बड़ी लंबी बात है। फिर भी मैं यही कहूंगा कि कांग्रेस और नेकां का गठबंधन एक बड़े मुद्दे पर हुआ और उस चुनौती को जीतने के लिए हमारा साथ बना हुआ है।