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Jammu: मूक-बधिर लड़की से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 10 साल का कठोर कारावास, अदालत ने ठुकराई रहम की फरियाद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 01 Apr 2026 01:30 AM IST
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सार

मामले में बचाव पक्ष के वकील ने आरोपी की उम्र, गरीबी, बीमारी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के आधार पर नरमी बरतने की गुहार लगाई लेकिन कोर्ट ने माना कि अपराध नरमी बरतने योग्य नहीं।

Jammu: Accused sentenced to 10 years rigorous imprisonment for misdemeanor a deaf and mute girl
demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मूक-बधिर लड़की से दुष्कर्म के एक छह साल पुराने चर्चित मामले में रामबन की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) प्रदीप के संधू की अदालत ने रामबन के रहने वाले अब्दुल कयूम के खिलाफ यह आदेश पारित किया।

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आरोपी पर रामबन पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 376 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़ित के गर्भवती होने के बाद यह मामला खुला था। आरोपी ने उसे किसी को इस घटना के बारे में बताने पर उसे जान से मारने की धमकी दी थी। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क कर मामला दर्ज कराया था।
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पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल करवाने के बाद एक दुभाषिए के माध्यम से उसका बयान दर्ज किया। एक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में आरोपी की पहचान परेड करवाई गई। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ ही अन्य सबूत जुटाए गए। निचली अदालत ने अभियोजन पक्ष के सबूतों की जांच और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया।

सजा पर बहस करते हुए अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी ने एक मूक-बधिर लड़की की लाचारी का फायदा उठाया है। दुष्कर्म के जरिये उसे गर्भवती कर जघन्य अपराध किया है। अदालत ने अब्दुल कयूम को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ ही उस पर आईपीसी की धारा 376(2)(आई) के तहत अपराध के लिए 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।

इसके अतिरिक्त दोषी पर आईपीसी की धारा 506(1) के तहत एक साल की साधारण सजा के साथ ही एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। कहा कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।अदालत ने आरोपी की न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि को भी इसमें शामिल करने के निर्देश दिए। 

उम्र और गरीबी के आधार पर नरमी बरतने की अपील

मामले में बचाव पक्ष के वकील ने आरोपी की उम्र, गरीबी, बीमारी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के आधार पर नरमी बरतने की गुहार लगाई लेकिन कोर्ट ने माना कि अपराध नरमी बरतने योग्य नहीं।

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