JKAS Exam Result: मेहनत और हौसले की जीत, छोटे कस्बों और गांवों से निकलकर जेकेएएस में युवाओं ने दिखाई प्रतिभा
जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक जेकेएएस परीक्षा 2024 के नतीजों से जम्मू-कश्मीर के कई घरों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए युवाओं ने मेहनत और हौसले के दम पर प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई। इस बार टॉप से लेकर अंतिम चयन तक कई ऐसी कहानियां सामने आईं, जो संघर्ष और लगन की मिसाल बन गई हैं। कहीं पूर्व सैनिक की बेटी ने प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया तो कहीं दूरदराज गांव की बेटी ने सीमित साधनों के बावजूद सफलता पाई। छोटे गांवों और कस्बों से निकलकर इन युवाओं ने दिखा दिया कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत लगातार हो तो बड़ी से बड़ी परीक्षा भी जीती जा सकती है।
विस्तार
कठुआ के वार्ड-2 निवासी अब्श्यू शर्मा ने जेकेएएस परीक्षा में पहला स्थान हासिल कर पूरे प्रदेश में टॉप किया है। उनकी इस उपलब्धि से जिले में खुशी का माहौल है और लोग लगातार उन्हें बधाई दे रहे हैं।
अब्श्यू के पिता रमनीश शर्मा जम्मू-कश्मीर पुलिस में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के पद पर तैनात हैं जबकि उनकी माता रितू शर्मा शिक्षिका हैं। घर में पढ़ाई का माहौल था। माता-पिता ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई कठुआ में हुई जबकि आगे की पढ़ाई जम्मू और सांबा में पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ से इंजीनियरिंग में स्नातक किया।
अब्श्यू बताते हैं कि सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य उन्होंने पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था। लगातार तैयारी के बाद दूसरे प्रयास में उन्हें यह सफलता मिली।
शोपियां के आमिर ने पाई 26वीं रैंक
शोपियां में चित्रगाम इलाके के आमिर हसन ने 26वीं रैंक हासिल कर अपने इलाके का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है। इलाके के लोगों का कहना है कि आमिर शुरू से ही पढ़ाई में मेहनती रहे हैं और उनकी लगन ने उन्हें यह सफलता दिलाई है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सिविल सेवाओं में जाने का सपना देखते हैं। लोगों ने आमिर के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
11वीं में असफलता के बाद भी नहीं मानी हार, वसीम बने अधिकारी
रियासी जिले के गोसुआ ग्रा मोड़ निवासी वसीम अली ने जेकेएएस परीक्षा में 33वीं रैंक हासिल की है। उनकी कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल बन गई है क्योंकि वह कभी 11वीं कक्षा में असफल हो गए थे। वसीम बताते हैं कि उस असफलता ने उन्हें निराश नहीं किया। उन्होंने दोबारा मेहनत की और 12वीं में अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। वसीम का कहना है कि परिवार, दोस्तों और शिक्षकों का सहयोग उन्हें हमेशा मिलता रहा। ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया गया।
खालिद का गांव से प्रशासनिक सेवा का सफर
रियासी जिले के बठोई माहौर गांव के रहने वाले खालिद बशीर ने जेकेएएस परीक्षा में 70वां स्थान हासिल किया है। उनकी सफलता के बाद गांव में जश्न का माहौल है। उनके पिता बशीर अहमद और माता हाजरा बेगम हैं। परिवार और ग्रामीणों ने उनकी इस उपलब्धि पर खुशी जताई और उन्हें बधाई दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि दूरदराज इलाके से निकलकर इस तरह की सफलता हासिल करना अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा है।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बेटे ने भी टाॅप-10 में बनाई जगह
कठुआ जिले के बसोहली के रहने वाले सोहन सिंह ने जेकेएएस परीक्षा में नौवां स्थान हासिल कर इलाके का नाम रोशन किया है। उन्होंने दूसरे प्रयास में यह सफलता प्राप्त की है। सोहन सिंह इससे पहले वर्ष 2023 की जेकेएएस परीक्षा में मेन्स परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके थे। इस बार उन्होंने बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा दी और मेरिट सूची में जगह बना ली।
उनके पिता करनैल सिंह बिजली विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। परिवार के अनुसार सोहन ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था और उसी दिशा में लगातार मेहनत करते रहे। सोहन की प्रारंभिक पढ़ाई बसोहली के एक निजी स्कूल में हुई।
इसके बाद उन्होंने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल बसोहली से की। स्नातक की डिग्री जीजीएम साइंस कॉलेज जम्मू से और स्नातकोत्तर जम्मू विश्वविद्यालय से किया। सोहन सिंह का कहना है कि पहले प्रयास से मिली सीख ने उन्हें दूसरे प्रयास में बेहतर तैयारी करने में मदद की। उन्होंने कहा कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेना जरूरी है।
छोटे गांव से निकलकर पारुल ने ओपन मेरिट में बनाई जगह
उधमपुर जिले के रामनगर के किरमू गांव की रहने वाली पारुल शर्मा ने जेकेएएस परीक्षा में ओपन मेरिट में 16वां स्थान हासिल किया है। उनकी इस सफलता से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। पारुल के पिता जोगिंदर लाल शर्मा हैं। पिता बताते हैं कि वह शुरू से ही पढ़ाई में गंभीर रही हैं और बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखकर मेहनत करती रही हैं। पारुल का कहना है कि गांव में रहकर पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन परिवार के सहयोग और अपने लक्ष्य ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
विस्थापित परिवार की बेटी पर्ल ने बनाई प्रशासनिक सेवा तक की राह
उधमपुर में रहने वाली पर्ल पंडिता ने जेकेएएस परीक्षा में 19वीं रैंक हासिल की है। वह कश्मीर विस्थापित परिवार से संबंध रखती हैं। पर्ल के पिता जेएल पंडिता हैं। उनकी इस सफलता के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है। कई लोग उन्हें बधाई देने उनके घर पहुंचे। पर्ल का कहना है कि लगातार पढ़ाई और धैर्य इस परीक्षा की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने युवाओं से कहा कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो परिस्थितियां रास्ता नहीं रोक सकतीं।
पूर्व सैनिक की बेटी ने हासिल किया दूसरा स्थान
सांबा जिले के विजयपुर की रहने वाली सिमरनजीत कौर ने जेकेएएस परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता से परिवार और पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। सिमरनजीत के पिता लखवींदर सिंह पूर्व सैनिक हैं जबकि उनकी माता नरेंद्र कौर हाउसिंग विभाग में कार्यरत हैं। परिवार के अनुसार सिमरनजीत शुरू से ही पढ़ाई में मेहनती रही हैं।
उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई आर्मी स्कूल बाड़ी ब्राह्मण, जम्मू से की। इसके बाद वह दिल्ली चली गईं और वहीं से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2024 में उन्होंने जेकेएएस परीक्षा की तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में दूसरा स्थान हासिल कर लिया। सिमरनजीत का कहना है कि परिवार का सहयोग और नियमित मेहनत उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह रही। उनका मानना है कि अगर लक्ष्य तय कर लगातार मेहनत की जाए तो कोई भी परीक्षा कठिन नहीं होती।
बिना कोचिंग के घर से पढ़ाई, पहले प्रयास में मिली बड़ी सफलता
कठुआ जिले के हीरानगर की रहने वाली कोमल शर्मा ने जेकेएएस परीक्षा में सातवां स्थान हासिल किया है। खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के घर पर रहकर ही तैयारी की और पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त की। कोमल की शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय हीरानगर से हुई। इसके बाद उन्होंने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज हीरानगर से स्नातक किया। आगे उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।
कोमल बताती हैं कि नौवीं कक्षा में उनकी एक अध्यापिका ने उन्हें प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने की सलाह दी थी। उसी समय उन्होंने अपना लक्ष्य तय कर लिया था। इसके बाद उन्होंने लगातार पढ़ाई पर ध्यान दिया और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली। कोमल का कहना है कि अगर समय का सही उपयोग किया जाए और लगातार पढ़ाई की जाए तो बिना कोचिंग के भी सफलता हासिल की जा सकती है।
केबीसी में दिखा चुकीं प्रतिभा, ननिता बनीं जेकेएएस अधिकारी
हीरानगर के गुडा मुंडियां गांव की रहने वाली ननिता शर्मा ने जेकेएएस परीक्षा में 71वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय हीरानगर से पढ़ाई की। इसके बाद गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज फॉर वूमेन, गांधीनगर से स्नातक और जम्मू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया। ननिता हाल ही में टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में भाग लेने के कारण भी चर्चा में रही थीं। उनका कहना है कि उनके पिता के राजस्व विभाग में कार्यरत होने से उन्हें सरकारी सेवा में जाने की प्रेरणा मिली।
सेना में प्रशिक्षण ले रहे पवन भी हुए सफल
उधमपुर जिले के सत्यालता के रहने वाले लेफ्टिनेंट पवन सत्याल ने भी जेकेएएस परीक्षा पास की है। पवन इस समय भारतीय सेना में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनके पिता मास्टर शमशेर सिंह हैं। पवन की इस उपलब्धि से परिवार और पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि सेना में रहते हुए प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास करना बड़ी उपलब्धि है। पल्लवी का कहना है कि सीमावर्ती इलाके में रहकर पढ़ाई करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।