{"_id":"6ad8798b3137f6912e0990fd","slug":"jammu-and-kashmir-news-preparations-for-a-major-protest-in-pojk-on-october-24-2026-10-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीओजेके: 24 अक्तूबर को फिर बड़े आंदोलन की तैयारी, पाक सेना पर 150 की हत्या और 200 महिला अगवा करने का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीओजेके: 24 अक्तूबर को फिर बड़े आंदोलन की तैयारी, पाक सेना पर 150 की हत्या और 200 महिला अगवा करने का आरोप
Wed, 21 Oct 2026 02:13 PM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Wed, 21 Oct 2026 02:13 PM IST
सार
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के पुंछ डिवीजन में जेएएसी ने फिर बड़े आंदोलन की तैयारी की है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार कोटली को आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाया गया है, जहां विशाल जनसभा बुलाई गई है।
विज्ञापन
पीओजेके में 24 अक्तूबर को बड़े आंदोलन की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के पुंछ डिवीजन में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 24 अक्तूबर से फिर बड़े आंदोलन की तैयारी की है। क्षेत्र में अभी इंटरनेट पाबंदियों, बाजारों की आंशिक बंदी, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर तनाव बना हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार कोटली को आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाया गया है, जहां विशाल जनसभा बुलाई गई है। इसी दिन रावलाकोट और अब्बासपुर में चल रहे धरने कोटली की मुख्य जनसभा में शामिल हो जाएंगे। मुजफ्फराबाद और मीरपुर में चक्का जाम की तैयारी है।
विज्ञापन
पीओजेके में इंटरनेट बहाल, लेकिन पुंछ में अभी पाबंदी बरकरार
क्षेत्र में संचार सेवाओं की स्थिति अब भी सामान्य नहीं है। मुजफ्फराबाद में करीब 136 दिन बाद इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई। पुंछ और कोटली के कुछ हिस्सों में मोबाइल-इंटरनेट पर प्रतिबंध अब भी जारी है। इससे छात्रों, कारोबारियों और आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आंदोलनकारियों ने नागरिक सुविधाओं की बहाली और सुरक्षा प्रतिबंध हटाने की मांग दोहराई है।
विज्ञापन
सस्ते आटे-बिजली से शुरू हुआ मुद्दा, अब राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक पहुंचा
जेएएसी का आंदोलन महंगे बिजली बिल, गेहूं के आटे की कीमत और आर्थिक राहत की मांगों से उभरा था। बाद में इसके मांगपत्र में शासन-प्रशासन की जवाबदेही, नागरिक अधिकार, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और विधानसभा में राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे भी प्रमुख हो गए। पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग विवाद के प्रमुख बिंदुओं में शामिल है। जेएएसी का तर्क है कि इन सीटों की मौजूदा व्यवस्था क्षेत्र के स्थानीय मतदाताओं के प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती है। इसे लेकर जुलाई से सितंबर तक चले बड़े आंदोलन में पाकिस्तानी सेना ने 150 आंदोलनकारियों की हत्या कर दी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने करीब 200 महिलाओं व युवतियों का अपहरण भी कर लिया, जिनका अब तक पता नहीं चला है। आंदोलनकारियों को आतंकी घोषित कर दिया। नरसंहार के लिए प्रभावित क्षेत्रों में रेंजर भी उतारे।
विज्ञापन
यदि 24 अक्तूबर की लामबंदी से पहले स्थानीय कठपुतली सरकार और पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों ने जेएएसी नेतृत्व के साथ कोई ठोस और सम्मानजनक राजनीतिक समझौता नहीं किया, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। जेएएसी पहले ही साफ कर चुकी है कि यदि इस बार भी धोखा हुआ, तो वे फिर बड़े आंदोलन को शुरू कर सकते हैं। -ब्रिगेडियर डॉ. विजय सागर धीमान (सेवानिवृत्त)