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Jammu News: सिंचाई विभाग ने टूटी नहर की करवाई मरम्मत
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आरएस पुरा नहर की सफाई करते हुए सिंचाई कर्मी स्रोत संवाद
- फोटो : Police
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संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। सीमावर्ती क्षेत्र में क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत सिंचाई विभाग ने मंगलवार को करा दी। इससे किसानों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। किसान धर्मपाल चौधरी का कहना है कि नहर में अधिक मात्रा में पानी छोड़ने के चलते नहर में टूट-फूट और रिसाव पर सिंचाई विभाग को ध्यान देना चाहिए। सिंचाई के लिए खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचे, इसके लिए नहरों की सफाई करवानी चाहिए।
30 जून के अंक में पेज दो पर सिंचाई के लिए पानी नहीं तो कहीं हो रहा बर्बाद शीर्षक से खबर लगाई गई थी। इसे संज्ञान में लेते हुए विभाग ने नहर की मरम्मत कराई। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नहर के टूटने का एक बड़ा कारण इसमें प्लास्टिक के लिफाफे, बोतलें तथा अन्य कूड़ा-करकट फेंकना है। मंगलवार को विभाग के कर्मचारियों ने प्लास्टिक, पॉलिथीन व अन्य कूड़ा निकाले जाने के साथ टूटे किनारों को ठीक किया। विभाग के एईई विनोद मेहरा ने कहा कि नहर में जमा होने वाले कचरे के कारण पानी का बहाव बाधित हो जाता है। जब नहर में अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जाता है तो पानी का दबाव बढ़ने से नहर टूट जाती है। इससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है और किसानों के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सिंचाई विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे नहरों में किसी प्रकार का कूड़ा-करकट या प्लास्टिक का सामान न फेंकें। नहरों की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जनसहयोग से ही नहरों को सुरक्षित रखा जा सकता है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता है।
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आरएस पुरा। सीमावर्ती क्षेत्र में क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत सिंचाई विभाग ने मंगलवार को करा दी। इससे किसानों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। किसान धर्मपाल चौधरी का कहना है कि नहर में अधिक मात्रा में पानी छोड़ने के चलते नहर में टूट-फूट और रिसाव पर सिंचाई विभाग को ध्यान देना चाहिए। सिंचाई के लिए खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचे, इसके लिए नहरों की सफाई करवानी चाहिए।
30 जून के अंक में पेज दो पर सिंचाई के लिए पानी नहीं तो कहीं हो रहा बर्बाद शीर्षक से खबर लगाई गई थी। इसे संज्ञान में लेते हुए विभाग ने नहर की मरम्मत कराई। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नहर के टूटने का एक बड़ा कारण इसमें प्लास्टिक के लिफाफे, बोतलें तथा अन्य कूड़ा-करकट फेंकना है। मंगलवार को विभाग के कर्मचारियों ने प्लास्टिक, पॉलिथीन व अन्य कूड़ा निकाले जाने के साथ टूटे किनारों को ठीक किया। विभाग के एईई विनोद मेहरा ने कहा कि नहर में जमा होने वाले कचरे के कारण पानी का बहाव बाधित हो जाता है। जब नहर में अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जाता है तो पानी का दबाव बढ़ने से नहर टूट जाती है। इससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है और किसानों के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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सिंचाई विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे नहरों में किसी प्रकार का कूड़ा-करकट या प्लास्टिक का सामान न फेंकें। नहरों की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जनसहयोग से ही नहरों को सुरक्षित रखा जा सकता है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता है।
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