शटडाउन में कैसे चालू हुई बिजली?: करंट लगने से डेलीवेजर की मौत, सड़क पर शव रखकर परिजनों ने किया प्रदर्शन
ड्यूटी के दौरान जानीपुर में खंभे पर तार बदलते समय करंट लगने से डेलीवेजर लाइनमैन जोगिंद्र सिंह की मौत के बाद परिजनों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव रखकर प्रदर्शन किया।
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जानीपुर में खंभे पर तार बदलते समय करंट लगने से डेलीवेजर लाइनमैन जोगिंद्र सिंह (35) की मौत के बाद परिजन ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव जानीपुर चौक पर रखकर प्रदर्शन किया।
परिजन का आरोप है कि बिना सेफ्टी किट के जोगिंद्र को खंभे पर चढ़ा दिया गया। किसी ने बिजली सप्लाई बहाल कर दी जिससे यह हादसा हुआ। हाईटेंशन तार की चपेट में आने से जोगिंद्र पोल से सीधे सड़क पर गिरा जिससे उसकी जान चली गई।
गुस्साए परिजन और सहयोगियों ने जानीपुर एसडीएम कार्यालय के बाहर शव रखकर इंसाफ की मांग की। जेएंडके पीडीएल-टीडीएल एंड अदर्स वर्कर यूनियन के पदाधिकारी भी अध्यक्ष अखिल शर्मा के नेतृत्व में मौके पर पहुंचे। पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और सरकार से परिजन के लिए मुआवजे की मांग की।
विरोध बढ़ाता देख जिला प्रशासन, पुलिस व जेपीडीसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजन को शांत कराया। अखिल शर्मा ने बताया कि डेलीवेजर की ड्यूटी के दौरान मौत पहली घटना नहीं है। पहले भी अन्य लोगों की लापरवाही से कई कर्मी जान गवां चुके हैं। बावजूद इसके पीड़ित परिवारों को मुआवजा नहीं मिला है।
जब शटडाउन चल रहा था और मरम्मत कार्य के लिए कर्मी खंभे पर चढ़ा था तो किसने किसके आदेश से बिजली चालू कर दी। इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। दैनिक वेतनभोगियों का न तो बीमा किया गया है और न ही अन्य सुविधा दी जाती है। मामले की उच्च स्तरीय जांच व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ मृतक की पत्नी को जेपीडीसीएल में नौकरी देने के आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए।
नाॅर्दनी से जानीपुर हुआ था ट्रांसफर
जोगिंद्र पहले गांव नाॅर्दनी में तैनात थे। हाल में उनका तबादला जानीपुर स्टेशन पर हुआ था। परिजन ने सवाल उठाया कि विभाग नियमित कर्मियों का तबादला करने के बजाय किस नियम के आधार पर दैनिक वेतनभोगियोंं का तबादला कर रहा है। पूर्व सरपंच कुलजीत जम्वाल ने कहा, जोगिंद्र नाॅर्दनी में अच्छा काम कर रहा था। वह पहली दफा हाईटेंशन तार पर काम कर रहा था। उसके पास सेफ्टी किट तक नहीं थी, न ही दस्ताने थे। विभाग का लापरवाह रवैया उसकी मौत का कारण बना है।