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Jammu News: पाडल-राजुल गांवों में जल जीवन मिशन की परियोजना अधूरी
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 25 Jan 2026 02:14 AM IST
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पाडल राजुल परियोजना के अंतर्गत पाड़ल गांव में बनने वाले अधर में लटके टैंक दृश्यस्रोत पाठक
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चार साल से लटकी योजना, 700 से अधिक लोग नालों का अशुद्ध पानी पीने को मजबूर
पुरमंडल। पुरमंडल क्षेत्र के पाडल गांव में जल जीवन मिशन के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चार वर्ष पहले शुरू की गई महत्वाकांक्षी परियोजना आज भी अधूरी पड़ी है। साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई इस योजना से पाडल, राजुल और तलेड गांवों के लोगों को नियमित और सुरक्षित पेयजल सुविधा मिलनी थी। काम पूरा न होने के कारण ग्रामीण आज भी पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
परियोजना अधूरी रहने के चलते हालात यह हैं कि ग्रामीणों को मीलों दूर पैदल चलकर नालों से अशुद्ध पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति न केवल परेशानी भरी है बल्कि इससे गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। पूर्व सरपंच पूर्ण चंद और पूर्व पंच जोगिंदर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि योजना की शुरुआत के समय लोगों में शुद्ध पेयजल मिलने की बड़ी उम्मीद जगी थी लेकिन चार साल बीत जाने के बावजूद कार्य अधूरा पड़ा है। इससे ग्रामीणों में भारी रोष और निराशा है।
ग्रामीणों के अनुसार इस परियोजना से पाडल और राजुल गांवों की 700 से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलना था लेकिन आज भी लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। लोगों का आरोप है कि धन की कमी और ठेकेदारों को समय पर भुगतान न होने के कारण निर्माण कार्य बीच में ही रोक दिया गया।
ग्रामीणों ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से मांग की है कि जल जीवन मिशन की इस रुकी हुई परियोजना के लिए जल्द से जल्द आवश्यक धनराशि जारी की जाए। लोगों का कहना है कि परियोजनाओं को लंबे समय तक लटकाए रखने से लागत बढ़ती है और आम जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का निर्माण कार्य अधूरा रहने का मुख्य कारण धनराशि की कमी है। समय पर बजट जारी न होने के कारण ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे कार्य प्रभावित हुआ है।
कोट
विभाग की ओर से किसी प्रकार की देरी नहीं की जा रही है। धनराशि स्वीकृत होते ही ठेकेदारों का बकाया भुगतान किया जाएगा। इसके बाद सभी अधूरी परियोजनाओं का कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इन परियोजनाओं का निर्माण पूर्ण करने की समय-सीमा को बढ़ाकर अब वर्ष 2028 तक कर दिया गया है। तब तक लोगों को प्रतीक्षा करनी पड़ेगी, लेकिन विभाग प्रयासरत है कि जैसे ही फंड उपलब्ध हो, कार्य को गति दी जाए और लोगों को शुद्ध पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
- गौरव जारंगल, एईई लोक निर्माण विभाग
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पुरमंडल। पुरमंडल क्षेत्र के पाडल गांव में जल जीवन मिशन के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चार वर्ष पहले शुरू की गई महत्वाकांक्षी परियोजना आज भी अधूरी पड़ी है। साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई इस योजना से पाडल, राजुल और तलेड गांवों के लोगों को नियमित और सुरक्षित पेयजल सुविधा मिलनी थी। काम पूरा न होने के कारण ग्रामीण आज भी पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
परियोजना अधूरी रहने के चलते हालात यह हैं कि ग्रामीणों को मीलों दूर पैदल चलकर नालों से अशुद्ध पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति न केवल परेशानी भरी है बल्कि इससे गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। पूर्व सरपंच पूर्ण चंद और पूर्व पंच जोगिंदर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि योजना की शुरुआत के समय लोगों में शुद्ध पेयजल मिलने की बड़ी उम्मीद जगी थी लेकिन चार साल बीत जाने के बावजूद कार्य अधूरा पड़ा है। इससे ग्रामीणों में भारी रोष और निराशा है।
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ग्रामीणों के अनुसार इस परियोजना से पाडल और राजुल गांवों की 700 से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलना था लेकिन आज भी लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। लोगों का आरोप है कि धन की कमी और ठेकेदारों को समय पर भुगतान न होने के कारण निर्माण कार्य बीच में ही रोक दिया गया।
ग्रामीणों ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से मांग की है कि जल जीवन मिशन की इस रुकी हुई परियोजना के लिए जल्द से जल्द आवश्यक धनराशि जारी की जाए। लोगों का कहना है कि परियोजनाओं को लंबे समय तक लटकाए रखने से लागत बढ़ती है और आम जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का निर्माण कार्य अधूरा रहने का मुख्य कारण धनराशि की कमी है। समय पर बजट जारी न होने के कारण ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे कार्य प्रभावित हुआ है।
कोट
विभाग की ओर से किसी प्रकार की देरी नहीं की जा रही है। धनराशि स्वीकृत होते ही ठेकेदारों का बकाया भुगतान किया जाएगा। इसके बाद सभी अधूरी परियोजनाओं का कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इन परियोजनाओं का निर्माण पूर्ण करने की समय-सीमा को बढ़ाकर अब वर्ष 2028 तक कर दिया गया है। तब तक लोगों को प्रतीक्षा करनी पड़ेगी, लेकिन विभाग प्रयासरत है कि जैसे ही फंड उपलब्ध हो, कार्य को गति दी जाए और लोगों को शुद्ध पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
- गौरव जारंगल, एईई लोक निर्माण विभाग