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Jammu News: बाढ़ के बाद बाग-ए-भौर पार्क बहा रहा बदहाली के आंसू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 25 Jan 2026 02:15 AM IST
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मीरा साहिब बाढ के बाद बागे भौर पार्क की हालत में नही किया सुधारस्रोत संवाद
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6.52 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 200 कनाल जमीन पर बने पार्क से लोगों ने फेरा मुंह
अगस्त 2025 में आई बाढ़ ने मचाई थी तबाही इसके बाद विभाग ने नहीं करवाया ठीक
मीरां साहिब। मीरां साहिब कस्बे से दो किलोमीटर की दूरी पर भौर कैंप के पास बिलोल किनारे स्थित बाग-ए-भौर बदहाली के आंसू बहा रहा है। 6.52 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 200 कनाल जमीन पर बना पार्क लोगों के लिए बंद हो गया है।
अगस्त 2025 में आई भीषण बाढ़ ने यहां पर तबाही मचाई थी इसके बाद विभाग ने इसे ठीक करने के लिए कोई गंभीर कदम नहीं उठाए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ से पार्क को बचाने के लिए प्रोटेक्शन वॉल का काम शुरू किया जाएगा। इसकी डीपीआर तैयार हो गई है। अब सवाल यह है कि पैसा मंजूर होने, टेंडरिंग और दीवार तैयार होने में जितना समय लगेगा तब तक पार्क के भीतर कोई भी मरम्मत नहीं की जाएगी। तब तक यह पार्क लोगों के लिए बंद ही रहेगा।
झील में फैला कचरा, म्यूजिकल फाउंटेन खराब
पार्क के बीचोबीच एक घुमावदार झील बनी हुई है जिसके किनारे बैठने की व्यवस्था और व्यू प्वाइंट है। शाम के समय यहां पर म्यूजिकल फाउंटेन शो चलता था जिसका लोग खूब आनंद लेते थे। फिर म्यूजिकल फाउंटेन का टेंडर खत्म हो गया और शो बंद हो गया। बाढ़ के बाद इस झील में अब पूरी तरह से मिट्टी और कचरा फैला हुआ है। होना तो चाहिए था कि यहां पर मशीनें में लगाकर पार्क को साफ बनाने का काम शुरू किया जाता लेकिन चंद कर्मचारी पार्क को साफ कर रहे हैं जिससे यह काम जल्द पूरा होने की उम्मीद भी नहीं है।
डॉ. मनोहर शर्मा का कहना कि जम्मू संभाग में पहले ही पर्यटन स्थल कम है जो कुछ बनाए गए हैं उनका भी रखरखाव सही तरीके से नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि पांच माह बीतने के बाद भी पहले जैसे हालत होने पर अब यहां आने वाले लोगों का मोह भंग हो गया है।
ओम प्रकाश शर्मा का कहना है कि पहले सुबह व शाम को यहां पर आसपास के लोग सैर करने आते थे पर अब नहीं आ रहे। सरकार की गलत नीतियों के चलते जिस पार्क को बाग-ए-भौर नाम दिया गया था उसकी अनदेखी की जा रही है।
झूले टूटे, हर तरफ फैली गंदगी
पार्क अब बंजर और उजड़ा हुआ नजर आ रहा है। यहां पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों की रौनक हुआ करती थी लेकिन यहां कुछ भी नहीं है। पार्क में फूल और पौधे खराब हो चुके हैं। चहारदिवारी टूट चुकी है। जगह-जगह मिट्टी और गाद जमा है। बच्चों के खेलने के लिए लगाए गए झूले टूट चुके हैं। अब यहां पर पिकनिक मनाने के लिए बच्चे अभिभावकों के साथ आते हैं और मायूस होकर लौट जाते हैं।
कोट
फ्लड प्रोटेक्शन वॉल का डीपीआर तैयार कर लिया है। 3.30 करोड़ रुपये की लागत से यह काम पूरा होगा। पार्क की प्रोटेक्शन वॉल के बिना कार्य करना ठीक नहीं है। अगर फिर से बाढ़ आती है तो नुकसान होगा। ऐसे में बनाई योजना के लिए समय लग रहा है।
- इश्तियाक मलिक, अधिकारी फ्लोरीकल्चर विभाग
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अगस्त 2025 में आई बाढ़ ने मचाई थी तबाही इसके बाद विभाग ने नहीं करवाया ठीक
मीरां साहिब। मीरां साहिब कस्बे से दो किलोमीटर की दूरी पर भौर कैंप के पास बिलोल किनारे स्थित बाग-ए-भौर बदहाली के आंसू बहा रहा है। 6.52 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 200 कनाल जमीन पर बना पार्क लोगों के लिए बंद हो गया है।
अगस्त 2025 में आई भीषण बाढ़ ने यहां पर तबाही मचाई थी इसके बाद विभाग ने इसे ठीक करने के लिए कोई गंभीर कदम नहीं उठाए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ से पार्क को बचाने के लिए प्रोटेक्शन वॉल का काम शुरू किया जाएगा। इसकी डीपीआर तैयार हो गई है। अब सवाल यह है कि पैसा मंजूर होने, टेंडरिंग और दीवार तैयार होने में जितना समय लगेगा तब तक पार्क के भीतर कोई भी मरम्मत नहीं की जाएगी। तब तक यह पार्क लोगों के लिए बंद ही रहेगा।
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झील में फैला कचरा, म्यूजिकल फाउंटेन खराब
पार्क के बीचोबीच एक घुमावदार झील बनी हुई है जिसके किनारे बैठने की व्यवस्था और व्यू प्वाइंट है। शाम के समय यहां पर म्यूजिकल फाउंटेन शो चलता था जिसका लोग खूब आनंद लेते थे। फिर म्यूजिकल फाउंटेन का टेंडर खत्म हो गया और शो बंद हो गया। बाढ़ के बाद इस झील में अब पूरी तरह से मिट्टी और कचरा फैला हुआ है। होना तो चाहिए था कि यहां पर मशीनें में लगाकर पार्क को साफ बनाने का काम शुरू किया जाता लेकिन चंद कर्मचारी पार्क को साफ कर रहे हैं जिससे यह काम जल्द पूरा होने की उम्मीद भी नहीं है।
डॉ. मनोहर शर्मा का कहना कि जम्मू संभाग में पहले ही पर्यटन स्थल कम है जो कुछ बनाए गए हैं उनका भी रखरखाव सही तरीके से नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि पांच माह बीतने के बाद भी पहले जैसे हालत होने पर अब यहां आने वाले लोगों का मोह भंग हो गया है।
ओम प्रकाश शर्मा का कहना है कि पहले सुबह व शाम को यहां पर आसपास के लोग सैर करने आते थे पर अब नहीं आ रहे। सरकार की गलत नीतियों के चलते जिस पार्क को बाग-ए-भौर नाम दिया गया था उसकी अनदेखी की जा रही है।
झूले टूटे, हर तरफ फैली गंदगी
पार्क अब बंजर और उजड़ा हुआ नजर आ रहा है। यहां पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों की रौनक हुआ करती थी लेकिन यहां कुछ भी नहीं है। पार्क में फूल और पौधे खराब हो चुके हैं। चहारदिवारी टूट चुकी है। जगह-जगह मिट्टी और गाद जमा है। बच्चों के खेलने के लिए लगाए गए झूले टूट चुके हैं। अब यहां पर पिकनिक मनाने के लिए बच्चे अभिभावकों के साथ आते हैं और मायूस होकर लौट जाते हैं।
कोट
फ्लड प्रोटेक्शन वॉल का डीपीआर तैयार कर लिया है। 3.30 करोड़ रुपये की लागत से यह काम पूरा होगा। पार्क की प्रोटेक्शन वॉल के बिना कार्य करना ठीक नहीं है। अगर फिर से बाढ़ आती है तो नुकसान होगा। ऐसे में बनाई योजना के लिए समय लग रहा है।
- इश्तियाक मलिक, अधिकारी फ्लोरीकल्चर विभाग