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Jammu News: किसान मुआवजे के लिए काट रहे कृषि विभाग के चक्कर

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अरनिया। कृषि विभाग की तरफ से दर्ज किए गए धान की फसल के नुकसान के बावजूद बीमा कंपनी किसानों को मुआवजा जारी करने में असहयोग कर रही है। किसान मुआवजे के लिए कृषि विभाग के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। विभाग के पास मुआवजे की कोई संतोषजनक जानकारी या लिस्ट उपलब्ध नहीं है।
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जिला कृषि एक्सटेंशन अधिकारी विनोद खजूरिया ने बीमा कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीमा कंपनी किसानों के हित में कार्य नहीं कर रही है। मुआवजे को लेकर पूछे जाने पर भी वे उचित जवाब नहीं दे रही। उन्होंने बीमा कंपनी के असहयोग पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि निरंतर किसान दफ्तर पहुंचकर मुआवजा जारी करने के लिए कह रहे हैं।
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सबडिवीजन ऑफिस आरएस पुरा के अंतर्गत लगभग सभी ब्लॉक में क्रॉप कट के दौरान प्रति कनाल औसतन मात्र डेढ़ क्विंटल से नीचे पैदावार दर्ज की गई थी। इसमें 30 से 40 फीसदी तक फसल का नुकसान दर्ज किया गया था, जो सामान्य से काफी कम है, फिर भी किसानों को राहत नहीं मिल पा रही।

सब डिविजनल एग्रीकल्चर ऑफिसर आरएस पुरा अरुण जाराल ने कहा कि कृषि विभाग की तरफ से बीमा कंपनी को सारी औपचारिकताएं पूरी कर दस्तावेज सौंप दिए गए हैं। आगे की कार्यवाही बीमा कंपनी पर निर्भर है। किसानों को कृषि विभाग की बजाय बीमा कंपनी के अधिकारियों से मुआवजे की बात करनी चाहिए।

अरनिया ब्लॉक के एईओ अनिल कुमार ने बताया कि क्रॉप कट के दौरान एक क्विंटल के आसपास पैदावार दर्ज की गई थी। इस बार मौसम की मार के चलते किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। बीमा कंपनी को शिकायत दर्ज कर किसानों को जल्द मुआवजा जारी करना चाहिए।

किसान रिंकू कुमार ने बताया कि प्रीमियम की कटौती के समय बीमा कंपनी मुआवजे के मापदंड के बारे में नहीं बताती है। किसान समय पर प्रीमियम अदा कर देता है। किसानों के लिए फसल का नुकसान किसी भी कारण से होने पर मुआवजा देना चाहिए।

किसान लवली सिंह ने कहा कि उनके क्षेत्र में बारिश, ओलावृष्टि और जलभराव के अलावा फसल का नुकसान नहीं होता है। ऐसे में मुआवजे के मापदंड इन्हीं आपदाओं के अंतर्गत तय होने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। कृषि विभाग को किसानों के हितों में संज्ञान लेते हुए बीमा कंपनी पर सख्ती बरतनी चाहिए।
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