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Jammu News: क्षेत्र में बारिश से गेंदे की फसल पर फंगस का आक्रमण
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पत्तियों पर नीले बैंगनी रंग की बीमारी के धब्बे।
- फोटो : arnia news
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अरनिया। भारी बारिश ने क्षेत्र के गेंदे की फसलों को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। किसानों के अनुसार पौधों की पत्तियों पर गहरे नीले से काले-बैंगनी रंग के गोल धब्बे नजर आ रहे हैं जो कवक जनित पत्ती धब्बा रोग के लक्षण हैं। कुछ मामलों में ये धब्बे फैलकर आपस में मिल गए हैं, जिससे पत्तियों को हल्का नुकसान पहुंचा है।
कृषि विशेषज्ञों ने तत्काल सावधानियां बरतने की हिदायत दी है। सबसे पहले संक्रमित पत्तियों को पौधों से अलग कर खेत से बाहर नष्ट कर दें। खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करें ताकि नमी कम हो। रासायनिक नियंत्रण के लिए कार्बेंडाजिम 12% + मैनकोजेब 63% डब्ल्यूपी (2-3 ग्राम प्रति लीटर पानी) या क्लोरोथैलोनिल (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव करें। यह छिड़काव साफ मौसम में दोपहर बाद करें और 7-10 दिनों के अंतराल पर दोहराएं।
जैविक उपाय के रूप में किसानों को एक लीटर पानी में एक छोटा चम्मच नीम का तेल और कुछ बूंदें तरल साबुन मिलाकर शाम को पत्तियों के दोनों ओर स्प्रे करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते उपचार न करने पर फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
गांव रेहाल कलांदरिया के गेंदा किसान सनी कुमार ने बताया कि चार कनाल में गेंदे की खेती की है परंतु बेमौसम बारिश से गेंदा बीमारियों की जद में आ गया है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते मौसम ठीक नहीं हुआ तो उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।
गांव रेहाल कलांदरिया के कृषि फील्ड अफसर विवेक शर्मा ने बताया कि गेंदा किसानों की फसल को लेकर शिकायतें निरंतर आ रही हैं। फील्ड विजिट के बाद किसानों को दवाई का छिड़काव करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि मौसम अनुकूल होना जरूरी है अन्यथा इस बार गंदे की फसल का प्रभावित होना लाजिमी है। क्षेत्रीय किसान संगठनों ने सरकार से प्रभावित फसलों के लिए मुआवजा और बीमा दावों की तेज प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
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कृषि विशेषज्ञों ने तत्काल सावधानियां बरतने की हिदायत दी है। सबसे पहले संक्रमित पत्तियों को पौधों से अलग कर खेत से बाहर नष्ट कर दें। खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करें ताकि नमी कम हो। रासायनिक नियंत्रण के लिए कार्बेंडाजिम 12% + मैनकोजेब 63% डब्ल्यूपी (2-3 ग्राम प्रति लीटर पानी) या क्लोरोथैलोनिल (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव करें। यह छिड़काव साफ मौसम में दोपहर बाद करें और 7-10 दिनों के अंतराल पर दोहराएं।
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जैविक उपाय के रूप में किसानों को एक लीटर पानी में एक छोटा चम्मच नीम का तेल और कुछ बूंदें तरल साबुन मिलाकर शाम को पत्तियों के दोनों ओर स्प्रे करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते उपचार न करने पर फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
गांव रेहाल कलांदरिया के गेंदा किसान सनी कुमार ने बताया कि चार कनाल में गेंदे की खेती की है परंतु बेमौसम बारिश से गेंदा बीमारियों की जद में आ गया है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते मौसम ठीक नहीं हुआ तो उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।
गांव रेहाल कलांदरिया के कृषि फील्ड अफसर विवेक शर्मा ने बताया कि गेंदा किसानों की फसल को लेकर शिकायतें निरंतर आ रही हैं। फील्ड विजिट के बाद किसानों को दवाई का छिड़काव करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि मौसम अनुकूल होना जरूरी है अन्यथा इस बार गंदे की फसल का प्रभावित होना लाजिमी है। क्षेत्रीय किसान संगठनों ने सरकार से प्रभावित फसलों के लिए मुआवजा और बीमा दावों की तेज प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।