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Jammu News: एनडीपीएस मामले में सबूतों के अभाव में तीन आरोपी बरी
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सांबा। मादक पदार्थ तस्करी के एक मामले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया। यह मामला 24 दिसंबर 2024 को बाड़ी ब्राह्मणा क्षेत्र में एक स्कूटी से लगभग 989 ग्राम हेरोइन जैसे पदार्थ की बरामदगी से संबंधित था।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर स्कूटी को रोककर तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान डिक्की से दो पैकेट बरामद किए गए थे। इस मामले में रामगढ़ निवासी अनुज कुमार और जम्मू निवासी विक्रम सिंह को मौके से गिरफ्तार किया गया था, जबकि जांच के दौरान कथित आपूर्तिकर्ता पपिंदर सिंह उर्फ रव उर्फ सेठी को भी गिरफ्तार किया गया।
जांच के दौरान बरामद नमूनों को केंद्रीय राजस्व नियंत्रण प्रयोगशाला (सीआरसीएल), नई दिल्ली भेजा गया, जहां प्राप्त रिपोर्ट में नमूनों में हेरोइन की पुष्टि नहीं हुई। इसके पश्चात एनसीबी ने पुनः परीक्षण के लिए नमूनों को चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा, जिसमें हेरोइन की पुष्टि दर्शाई गई।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पुनः परीक्षण की अनुमति देने के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा कोई ठोस एवं असाधारण कारण प्रस्तुत नहीं किया गया। साथ ही प्रथम प्रयोगशाला की रिपोर्ट में नमूने सुरक्षित एवं सीलबंद पाए गए थे और उनमें हेरोइन की पुष्टि नहीं हुई थी।
अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को आरोपों से मुक्त करने का आदेश दिया।
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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर स्कूटी को रोककर तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान डिक्की से दो पैकेट बरामद किए गए थे। इस मामले में रामगढ़ निवासी अनुज कुमार और जम्मू निवासी विक्रम सिंह को मौके से गिरफ्तार किया गया था, जबकि जांच के दौरान कथित आपूर्तिकर्ता पपिंदर सिंह उर्फ रव उर्फ सेठी को भी गिरफ्तार किया गया।
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जांच के दौरान बरामद नमूनों को केंद्रीय राजस्व नियंत्रण प्रयोगशाला (सीआरसीएल), नई दिल्ली भेजा गया, जहां प्राप्त रिपोर्ट में नमूनों में हेरोइन की पुष्टि नहीं हुई। इसके पश्चात एनसीबी ने पुनः परीक्षण के लिए नमूनों को चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा, जिसमें हेरोइन की पुष्टि दर्शाई गई।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पुनः परीक्षण की अनुमति देने के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा कोई ठोस एवं असाधारण कारण प्रस्तुत नहीं किया गया। साथ ही प्रथम प्रयोगशाला की रिपोर्ट में नमूने सुरक्षित एवं सीलबंद पाए गए थे और उनमें हेरोइन की पुष्टि नहीं हुई थी।
अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को आरोपों से मुक्त करने का आदेश दिया।