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Jammu News: शराब और तंबाकू पर प्रतिबंध के प्रस्ताव का समर्थन भी और विरोध भी
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सांबा। जम्मू-कश्मीर में शराब, तंबाकू और सिगरेट जैसे नशीले उत्पादों पर संभावित प्रतिबंध को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। कुछ इसके समर्थन में और कुछ विरोध में दिखाई दे रहे हैं। जानकारी के अनुसार आगामी विधानसभा सत्र में इन उत्पादों की बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने से संबंधित प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए जाने की तैयारी है।
इस प्रस्ताव को लेकर आम लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है, जबकि कई लोगों ने इसके संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। सांबा निवासी सुग्रीव सिंह का कहना है कि यदि सरकार शराब और तंबाकू पर प्रतिबंध लगाती है तो इससे युवाओं को नशे की लत से बचाने में मदद मिलेगी और समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा।
स्थानीय निवासी रिशु गुप्ता का कहना है कि समाज में बढ़ते नशे के प्रसार को देखते हुए ऐसे कदम की आवश्यकता है और सरकार को इस दिशा में ठोस निर्णय लेना चाहिए।
दूसरी ओर स्थानीय व्यापारी राजकुमार ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि इससे सरकार के राजस्व और कई लोगों के रोजगार पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि यदि प्रतिबंध लगाया जाता है तो अवैध कारोबार बढ़ने की भी आशंका रहती है।
फिलहाल प्रस्तावित विधेयक को लेकर लोगों में बहस तेज हो गई है और अब सभी की नजरें 27 मार्च को विधानसभा में होने वाली चर्चा और सरकार के रुख पर टिकी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार कई विधायकों ने विधानसभा सचिवालय में इस संबंध में प्रस्ताव जमा कराए हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और विधायक अली मोहम्मद सागर ने जम्मू-कश्मीर में शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। वहीं मीर मोहम्मद फयाज ने भी शराब के निर्माण, बिक्री, प्रचार और उपभोग पर रोक लगाने के लिए विधेयक लाने की बात कही है।
इसके अलावा विधायक शेख खुर्शीद अहमद ने कश्मीर घाटी में शराब की बिक्री, भंडारण और परिवहन पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के निर्माण, बिक्री और विज्ञापन पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। वहीं एहसान परदेसी ने लाल चौक क्षेत्र में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव रखा है।
हालांकि फिलहाल ये सभी प्रस्ताव प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में पेश किए जाने की प्रक्रिया में हैं। जब तक विधानसभा में इस पर चर्चा कर विधेयक पारित नहीं किया जाता, तब तक किसी भी प्रकार का प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
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इस प्रस्ताव को लेकर आम लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है, जबकि कई लोगों ने इसके संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। सांबा निवासी सुग्रीव सिंह का कहना है कि यदि सरकार शराब और तंबाकू पर प्रतिबंध लगाती है तो इससे युवाओं को नशे की लत से बचाने में मदद मिलेगी और समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा।
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स्थानीय निवासी रिशु गुप्ता का कहना है कि समाज में बढ़ते नशे के प्रसार को देखते हुए ऐसे कदम की आवश्यकता है और सरकार को इस दिशा में ठोस निर्णय लेना चाहिए।
दूसरी ओर स्थानीय व्यापारी राजकुमार ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि इससे सरकार के राजस्व और कई लोगों के रोजगार पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि यदि प्रतिबंध लगाया जाता है तो अवैध कारोबार बढ़ने की भी आशंका रहती है।
फिलहाल प्रस्तावित विधेयक को लेकर लोगों में बहस तेज हो गई है और अब सभी की नजरें 27 मार्च को विधानसभा में होने वाली चर्चा और सरकार के रुख पर टिकी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार कई विधायकों ने विधानसभा सचिवालय में इस संबंध में प्रस्ताव जमा कराए हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और विधायक अली मोहम्मद सागर ने जम्मू-कश्मीर में शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। वहीं मीर मोहम्मद फयाज ने भी शराब के निर्माण, बिक्री, प्रचार और उपभोग पर रोक लगाने के लिए विधेयक लाने की बात कही है।
इसके अलावा विधायक शेख खुर्शीद अहमद ने कश्मीर घाटी में शराब की बिक्री, भंडारण और परिवहन पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के निर्माण, बिक्री और विज्ञापन पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। वहीं एहसान परदेसी ने लाल चौक क्षेत्र में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव रखा है।
हालांकि फिलहाल ये सभी प्रस्ताव प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में पेश किए जाने की प्रक्रिया में हैं। जब तक विधानसभा में इस पर चर्चा कर विधेयक पारित नहीं किया जाता, तब तक किसी भी प्रकार का प्रतिबंध लागू नहीं होगा।