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Jammu News: खुले में शौच से दूषित हो रही बसंतर नदी
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Thu, 18 Jun 2026 02:00 AM IST
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लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने नदी के संरक्षण के लिए प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। बसंतर नदी खुले में शौच की बढ़ती समस्या के कारण प्रदूषण की चपेट में आती जा रही है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने नदी के संरक्षण के लिए प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
सांबा के औद्योगिक क्षेत्र, स्पोर्ट्स स्टेडियम के आसपास और विभिन्न निर्माण स्थलों पर कार्यरत हजारों प्रवासी श्रमिक और वाहन चालक खुले में शौच के लिए नदी किनारे का रुख कर रहे हैं। इससे नदी का जल प्रदूषित होने के साथ-साथ पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, लेकिन कई मकान मालिक किरायेदारों के लिए पर्याप्त शौचालय सुविधा उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। इसके चलते अनेक लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
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खुले में शौच को लेकर नियम भी काफी स्पष्ट हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सार्वजनिक स्थानों, जल स्रोतों और नदी-नालों के किनारे खुले में शौच करना स्वच्छता मानकों के विरुद्ध माना जाता है। स्थानीय निकायों को सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रकृति प्रेमी दीदार सिंह, कपिल सिंह, सुग्रीव सिंह और सुशील सिंह ने कहा, बसंतर नदी हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है। इसके संरक्षण के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए। उनका कहना है कि नदी के आसपास और औद्योगिक क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालयों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। नदी में बढ़ता प्रदूषण भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए ताकि बसंतर नदी को प्रदूषण से बचाया जा सके। लोगों ने प्रशासन और नगर परिषद से नदी संरक्षण, सार्वजनिक शौचालयों की स्थापना और स्वच्छता नियमों के सख्ती से पालन की मांग की है।
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। बसंतर नदी खुले में शौच की बढ़ती समस्या के कारण प्रदूषण की चपेट में आती जा रही है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने नदी के संरक्षण के लिए प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
सांबा के औद्योगिक क्षेत्र, स्पोर्ट्स स्टेडियम के आसपास और विभिन्न निर्माण स्थलों पर कार्यरत हजारों प्रवासी श्रमिक और वाहन चालक खुले में शौच के लिए नदी किनारे का रुख कर रहे हैं। इससे नदी का जल प्रदूषित होने के साथ-साथ पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, लेकिन कई मकान मालिक किरायेदारों के लिए पर्याप्त शौचालय सुविधा उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। इसके चलते अनेक लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
खुले में शौच को लेकर नियम भी काफी स्पष्ट हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सार्वजनिक स्थानों, जल स्रोतों और नदी-नालों के किनारे खुले में शौच करना स्वच्छता मानकों के विरुद्ध माना जाता है। स्थानीय निकायों को सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रकृति प्रेमी दीदार सिंह, कपिल सिंह, सुग्रीव सिंह और सुशील सिंह ने कहा, बसंतर नदी हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है। इसके संरक्षण के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए। उनका कहना है कि नदी के आसपास और औद्योगिक क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालयों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। नदी में बढ़ता प्रदूषण भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए ताकि बसंतर नदी को प्रदूषण से बचाया जा सके। लोगों ने प्रशासन और नगर परिषद से नदी संरक्षण, सार्वजनिक शौचालयों की स्थापना और स्वच्छता नियमों के सख्ती से पालन की मांग की है।