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जैसे देश के हालात हैं, प्रधानमंत्री मोदी को त्यागपत्र दे देना चाहिए : कर्रा

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मीरां साहिब। पंचायत मखनपुर में कांग्रेस के माइनियोरिटी सेल के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में सभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए पार्टी के राज्य प्रधान तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि जिस प्रकार देश के हालत हैं, उसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को त्यागपत्र देना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दुनिया में चल रहा है, उससे लगता है कि प्रधानमंत्री कही देश छोड़ कर न चले जाएं। ईरान का समुद्री जहाज प्रशांत हिन्द महासागर में अमेरिका की ओर निशाना बनाया गया पर प्रधानमंत्री ने कोई बयान तक नहीं दिया। दूसरी और किसानों की अनदेखी कर अमेरिका के साथ समझौता किया गया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के किसानों के फल, ड्राईफु्ट बासमती, डेयरी आदि आदि का कारोबार प्रभावित होने पर मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब इजराइल वजूद में नहीं आया था तब से ईरान से संबंध हैं। पाकिस्तान के खिलाफ खड़े रहने वाले ईरान के राष्ट्रपति के मारे जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुप्पी साध रखी है।
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कार्यकारी प्रधान रमण भल्ला ने कहा कि राहुल गांधी ने हमेशा देश के लोगों के लिए सच्चाई की लडाई लडी है। आज तक रिफ्यूजियों व वेस्ट पाकिस्तान के लोगों को जमीन का मालिकाना हक नही दिया गया। कांग्रेस ने हमेशा देश के मजदूर, किसान व युवा वर्ग के लोगों की आवाज उठाकर उन्हें हक दिया है। उन्होंने कहा कि गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में प्रस्तावित बदलाव जनविरोधी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना ग्रामीण मजदूरों तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन था पर सरकार ने इसमें परिवर्तन कर उसे कमजोर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि इन बदलावों को लागू किया गया तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और बेरोजगारों की समस्या और बढ़ जाएगी। उन्होंने केंद्र सरकार से इन प्रस्तावित परिवर्तनों को तत्काल वापस लेने की मांग की।

पूर्व सांसद तरलोक सिंह बाजवा, तरनजीत सिंह टोनी, नीरज कुंदन आदि नेताओं अपने संबोधन में भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय समझौते से देश के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे कृषि क्षेत्र पर बाहरी दबाव बढ़ेगा और स्थानीय किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य प्राप्त करने में कठिनाई होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों को सुनिश्चित किया जाए।
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