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Jammu News: 16 साल पुराने गाय चोरी के मामले में तीन आरोपी बरी
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सांबा। वर्ष 2010 में दर्ज गाय चोरी के मामले में अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद तीन आरोपियों को बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद शर्मा की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में यह फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा है।
जानकारी के अनुसार 26 जुलाई 2010 की रात चक मंगा क्षेत्र निवासी अनिल सिंह ने थाना सांबा में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनके घर के आंगन में बंधी गाय और बछड़े को कुछ लोग खोलकर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। शोर मचाने पर आरोपी गाय-बछड़े को छोड़कर मौके से फरार हो गए। इस संबंध में थाना सांबा में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने मुख्तियार अली, नजीर अहमद और मोहम्मद इकबाल समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश किया। हालांकि सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एफआईआर दर्ज करते समय शिकायतकर्ता ने किसी आरोपी का नाम नहीं बताया था। इसके अलावा आरोपियों की पहचान के लिए कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड भी नहीं करवाई गई और न ही आरोपियों से कोई बरामदगी हुई। गवाहों के बयानों में भी कई विरोधाभास सामने आए।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है। इसके चलते अदालत ने शेष तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और उनके जमानती बांड भी मुक्त करने के आदेश दिए।
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जानकारी के अनुसार 26 जुलाई 2010 की रात चक मंगा क्षेत्र निवासी अनिल सिंह ने थाना सांबा में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनके घर के आंगन में बंधी गाय और बछड़े को कुछ लोग खोलकर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। शोर मचाने पर आरोपी गाय-बछड़े को छोड़कर मौके से फरार हो गए। इस संबंध में थाना सांबा में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।
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जांच के दौरान पुलिस ने मुख्तियार अली, नजीर अहमद और मोहम्मद इकबाल समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश किया। हालांकि सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एफआईआर दर्ज करते समय शिकायतकर्ता ने किसी आरोपी का नाम नहीं बताया था। इसके अलावा आरोपियों की पहचान के लिए कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड भी नहीं करवाई गई और न ही आरोपियों से कोई बरामदगी हुई। गवाहों के बयानों में भी कई विरोधाभास सामने आए।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है। इसके चलते अदालत ने शेष तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और उनके जमानती बांड भी मुक्त करने के आदेश दिए।