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कटड़ा मेडिकल कॉलेज: मान्यता की पुनर्बहाली का आवेदन फिर खारिज, जनवरी में हुई थी रद्द, मार्च में डाली अर्जी

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Akash Dubey Updated Fri, 19 Jun 2026 10:41 AM IST
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सार

श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की मान्यता पुनर्बहाली अधर में है। नेशनल मेडिकल काउंसिल ने अनिवार्य अपडेट दस्तावेज जमा न करने पर आवेदन खारिज किया।

Katra Medical College Application for restoration of recognition rejected again.
श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस कटड़ा की मान्यता की पुनर्बहाली फिर अधर में लटक गई है। अनिवार्य एवं पूरे अपडेट दस्तावेज जमा नहीं करने पर नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने आवेदन खारिज कर दिया है। एनएमसी ने अपडेट दस्तावेजों को पूरा करने के लिए सात दिन का समय भी दिया था।



बीते शैक्षणिक सत्र में मेडिकल कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटों में 42 पर एक ही समुदाय के विद्यार्थियों को दाखिला मिला था। इसका हिंदू संगठनों ने विरोध किया था। श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के नेतृत्व में लंबा आंदोलन चला। इसके बाद एनएमसी ने छह जनवरी 2026 को कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी थी। जांच टीम ने मेडिकल मेडिकल कॉलेज भवन की प्रोजेक्ट रिपोर्ट सहित निर्माण संबंधी कई खामियां पाई थीं। पुनः मान्यता प्राप्त करने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने गत मार्च में एनएमसी को आवेदन भेजा था। सूत्रों ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन ने दिसंबर 2025 तक मान्यता वाले दस्तावेजों को आवेदन में शामिल कर दिया था।

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एनएमसी ने इसे नकारते हुए अपडेट दस्तावेजों के साथ आवेदन करने के लिए कहा था। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन को सात दिन का समय भी दिया गया। इसके बाद भी अपडेटेड दस्तावेज जमा नहीं किए गए। इसके साथ ही आवेदन खारिज कर दिया गया। हालांकि आवेदन के निरस्तीकरण का पत्र कॉलेज प्रबंधन को अभी प्राप्त नहीं हुआ है।

संघर्ष समिति के संयोजक रिटायर्ड कर्नल सुखबीर सिंह मनकोटिया ने बताया कि आवेदन निरस्त करने की सूचना मिली है। कटड़ा मेडिकल कॉलेज में प्रबंधन से जुड़े अधिकारी ने कहा कि मान्यता के लिए जो आवेदन किया गया था, ये बात सही है कि इसमें जो कागज लगाए गए वह अपडेट नहीं थे।

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नेशनल मेडिकल काउंसिल को ये कमियां दिखीं
मेडिकल कॉलेज में संकाय सदस्यों में 39 फीसदी की कमी।
डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजीडेंट के 65 फीसदी पद रिक्त।
संबद्ध अस्पताल की ओपीडी में भी मानकों से कम मरीज।

आईसीयू, कई फैक्ल्टी में छात्रों के लिए प्रयोगशाला नहीं मिली।
लाइब्रेरी में 1500 की जगह 744 किताबें ही थीं।
एआरटी सेंटर, एमडीआर-टीबी के इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं।
पांच ऑपरेशन थियेटर की जगह दो ही चालू मिले।

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