श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी: बैसाखी पर खुलेंगे मचैल माता धाम के कपाट, तीन महीने बाद होंगे दर्शन
बैसाखी पर मचैल माता धाम के कपाट तीन महीने बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंग जिसमें शोभायात्रा के साथ माता चंडी को मुख्य दरबार में विराजमान किया जाएगा।
विस्तार
जिले के पाडर में स्थित मचैल धाम के कपाट 14 अप्रैल को बैसाखी पर खोल दिए जाएंगे। करीब तीन माह के बाद दरबार खुलने पर श्रद्धालु माता चंडी के दर्शन कर पाएंगे। आधिकारिक रूप से यात्रा 25 जुलाई से शुरू होगी। इसके लिए प्रशासन अभी से तैयारियों में जुट गया है।
परंपरा के अनुसार तीन माह पहले मकर संक्रांति के दिन कपाट बंद कर माता की मूर्ति को मचैल गांव में स्थित मंदिर में स्थापित किया गया था। जहां नियमित पूजा-अर्चना की गई। अब बैसाखी पर शोभायात्रा के साथ मूर्ति दोबारा मुख्य दरबार में विराजमान की जाएगी। इसे लेकर डीसी पंकज कुमार शर्मा शनिवार रात ही मचैल पहुंच गए। उन्होंने यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं, सुरक्षा उपायों और विकास कार्यों पर लोगों के साथ चर्चा की। डीसी ने कहा कि इस बार वाहन दर्शनी दरवाजे तक पहुंच सकेंगे। फिलहाल मार्ग पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है। चिशोती सहित एक-दो स्थानों पर पुल निर्माण लंबित है। जल्द काम पूरा कर लिया जाएगा।
हर पल होगी निगरानी:
प्रशासन के अनुसार पहली बार रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) तकनीक लागू होगी। हर श्रद्धालु को आरएफआईडी कार्ड दिया जाएगा जिससे उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी। इससे प्रशासन को पता चलता रहेगा कि यात्री कहां है। किसी स्थान पर श्रद्धालुओं की संख्या 5 से 6 हजार हो जाती है तो पुलिस यात्रियों को आगे जाने से रोकेगी ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।
यात्रियों के ठहरने की होगी व्यवस्था:
प्रशासन का कहना है कि विभिन्न स्थानों पर यात्रियों के ठहरने के लिए पड़ाव बनाए जाएंगे। इन स्थानों व आसपास के क्षेत्रों में मांस, शराब व नशाखोरी पर प्रतिबंध रहेगा जिसके लिए आदेश जारी किया जाएगा। डीसी ने साफ-सफाई बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों से भी सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा कि यात्रा को सफल बनाने में जनता की भूमिका बेहद अहम रहती है।
पिछले हादसे से सबक, सुरक्षा पर फोकस
पिछले साल 14 अगस्त को चिशोती में बादल फटने से कई जानें गई थीं। कई लोग लापता हो गए थे। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन इस बार सतर्क है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसलिए यात्रियों को आरएफआईडी कार्ड दिए जाएंगे। वहीं प्रशासन के अनुसार यात्रा की शुरुआत स्थल किश्तवाड़ के सरकूट मंदिर में ठहरने की व्यवस्था भी की जाएगी। प्रशासन पानी, बिजली व अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रहा है।