Jammu: जल जीवन मिशन में बड़ा घोटाला! कागजों में बनीं 600 परियोजनाएं, जमीन पर नहीं कोई निशान
जम्मू-कश्मीर में जल जीवन मिशन के तहत 600 से अधिक परियोजनाएं कागजों में पूरी दिखाईं गईं, जबकि जमीन पर उनका कोई अस्तित्व नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि 900 से ज्यादा योजनाएं अधूरी हैं और 400 पर काम शुरू हुए बिना ही भुगतान जारी कर दिया गया।
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जम्मू-कश्मीर में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच समिति से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पड़ताल में पता चला है कि 600 से अधिक प्रोजेक्ट कागजों में पूरे दिखा दिए गए हैं जबकि धरातल पर उनका कोई अस्तित्व नहीं मिला है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश और विधायक हसनैन मसूदी की अध्यक्षता में बनी समिति इस पूरे मामले की जांच कर रही है। समिति एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में जल जीवन मिशन के तहत कुल 3200 परियोजनाएं स्वीकृत की गई थीं। इनमें 1800 परियोजनाएं कश्मीर संभाग और 1400 जम्मू संभाग में हैं। अब तक 900 से अधिक परियोजनाओं का काम अधूरा है और 400 से ज्यादा पर काम शुरू ही नहीं हो पाया है जबकि इन परियोजनाओं के नाम पर भुगतान तक जारी कर दिया गया है।
सूत्रों ने बताया कि भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण इलाकों में जल संकट गहराया हुआ है। कई गांवों में नलों और ओवरहेड टैंकों में पानी नहीं पहुंच रहा है। अधूरी परियोजनाओं के कारण लोगों को आज भी प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों तक हर घर नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस केंद्रीय योजना में बड़े घोटाले की आशंका जताई जताई जा रही है।
विधानसभा के बजट सत्र में भी गरमाया था मामला
विधानसभा के बजट सत्र में भी जल जीवन मिशन में अनियमितताओं, अधूरे कार्यों और कई परियोजनाओं के शुरू न होने को लेकर हंगामा हुआ था। इसके बाद मामले की जांच कर रही समिति का कार्यकाल 31 मई तक बढ़ा दिया गया था। समिति की जांत रिपोर्ट के सामने आने के बाद जल जीवन मिशन में बड़ा घोटाला सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
जल जीवन मिशन में करीब 13 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं। आरोप है कि राशि का उपयोग जमीनी कार्यों पर नहीं हुआ और कागजों में खर्च दर्शा दिया गया। इस मामले को आईएएस अधिकारी अशोक परमार ने उजागर किया था। इसके बाद जेजेएम के प्रबंध निदेशक (एमडी) को पद से हटा दिया गया था। इस मामले में विभागीय जांच भी जारी है। कमेटी इस पर भी जांच रिपोर्ट सौंपेगी।