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ऑपरेशन शेरूवाली जारी: जम्मू के घने जंगल और दुर्गम इलाके आतंकियों की ढाल, 11वें दिन भी सुरक्षाबलों के हाथ खाली

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 03 Jun 2026 01:07 AM IST
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सार

सुरक्षा बलों का अभियान मंगलवार को 11वें दिन में प्रवेश कर गया, लेकिन आतंकियों को पकड़ना अभी भी मुश्किल साबित हो रहा है।

Operation Sherwali continues: Jammu's dense forests and inaccessible terrain serve as a shield for terrorists
ब्रिगेडियर सेवानिवृत्त राजेंद्र सिंह जम्वाल का कहना है कि इस तरह के ऑपरेशन हमेशा लंबे समय तक चलते हैं। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

जम्मू संभाग के घने जंगल और दुर्गम इलाके आतंकियों की ढाल और सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बन रहे हैं। कठुआ, उधमपुर और किश्तवाड़ में हिट एंड रन की साजिश अपनाने वाले आतंकियों ने अब राजोरी में भी यही तरीका अपनाया है। मंजाकोट सेक्टर के डोरिमल-गंभीर मुगला क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन शेरूवाली का यह स्पष्ट उदाहरण है। सुरक्षा बलों का अभियान मंगलवार को 11वें दिन में प्रवेश कर गया, लेकिन आतंकियों को पकड़ना अभी भी मुश्किल साबित हो रहा है। इसी तरह किश्तवाड़ में ऑपरेशन त्राशी के दौरान भी कई-कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चले थे।



सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मई में राजोरी में हुई दो मुठभेड़ों में आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर हमला करने के बाद घने जंगलों और दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर ओझल होने का पैटर्न अपनाया। इसके बाद सुरक्षा बलों को बड़े इलाके में लंबा तलाशी अभियान चलाना पड़ा। किश्तवाड़, उधमपुर और कठुआ में पिछले डेढ़ वर्ष में इसी तरह की साजिश देखने को मिली थी।
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छोटे समूहों में काम करने वाले आतंकियों ने जंगलों में छोटे-छोटे ठिकाने बनाए, लगातार स्थान बदला और सुरक्षा बलों के दबाव के बावजूद लंबे समय तक सक्रिय रहे। कई बार मुठभेड़ होने के बाद भी वे जंगलों में छिपने और दूसरे क्षेत्रों में निकलने में सफल रहे थे। यही स्थिति कुछ समय तक उधमपुर के डूडू बसंतगढ़ और कठुआ के दुर्गम क्षेत्रों में भी देखने को मिली थी।
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लंबे समय तक एक जगह नहीं रुक रहे आतंकी
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि आतंकियों के छोटे समूह अब लंबे समय तक किसी एक जगह पर नहीं रुक रहे हैं। वे स्थानीय भूगोल, घने जंगल और पहाड़ी रास्तों का फायदा उठाकर हमला करने के बाद तेजी से स्थान बदल लेते हैं। इससे अभियानों की अवधि बढ़ जाती है और सुरक्षा बलों की रणनीति जटिल हो जाती है। डोरिमल-गंभीर मुगला क्षेत्र में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें ऑपरेशन चला रही हैं।

ड्रोन, निगरानी उपकरण और विशेष खोजी दस्तों की मदद से जंगलों की लगातार तलाशी ली जा रही है, लेकिन आतंकियों को पकड़ना अब भी चुनौती बना हुआ है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राजोरी में सामने आ रहा यह पैटर्न जम्मू संभाग में सक्रिय आतंकियों की बदलती साजिश का संकेत है। इससे जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में आतंकवाद रोधी अभियानों चलाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। आतंकियों को मिलने वाले ग्राउंड स्पोर्ट रोकने से ही उन्हें खत्म किया जा सकेगा।

ऐसे ऑपरेशन हमेशा लंबे समय तक चलते हैं : ब्रिगेडियर जम्वाल
ब्रिगेडियर सेवानिवृत्त राजेंद्र सिंह जम्वाल का कहना है कि इस तरह के ऑपरेशन हमेशा लंबे समय तक चलते हैं। किश्तवाड़ और उधमपुर में भी ऑपरेशन कई दिन चले थे। मंजाकोट सेक्टर में काफी रिहायशी इलाके हैं और आतंकियों की मूवमेंट भी देखी गई।

इसलिए सुरक्षा बलों को आतंकियों की हर मूवमेंट पर नजर रखकर हर कदम सोच-समझकर उठाना पड़ता है। पूरी क्षेत्र को धीरे-धीरे कवर किया जाता है। जम्वाल ने यह भी कहा कि बिना ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) की मदद के आतंकियों का इतने लंबे समय तक घने जंगलों में टिकना मुश्किल होता है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे सपोर्ट नेटवर्क को खत्म करने पर भी नजर बनाए हुए हैं।

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