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Jammu News: कर्तव्य पथ पर दिखी जम्मू-कश्मीर झलक और धमक
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- झांकी में हस्तशिल्प और लोक नृत्य, लद्दाख में पर्वत और प्रकृति ने किया आकर्षित
- राजोरी की बेटी असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला ने पुरुष सीआरपीएफ टुकड़ी का किया नेतृत्व
- सेना के जानवरों के दस्ते की शान बने लद्दाख बैक्ट्रियन ऊंट, जांस्कर पोनी, रैप्टर और कोल्ट्स
जम्मू। इस बार का गणतंत्र दिवस जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लिए खास रहा। कर्तव्य पथ पर दोनों प्रदेश की झलक और धमक देखने को मिली। जम्मू-कश्मीर का हस्तशिल्प एवं लोकनृत्य पर केंद्रित ‘नटरंग’ और लद्दाख के पर्वतीय क्षेत्रों के मनोरम दृश्य एवं जीवंत संस्कृति की झलक प्रदर्शित कर रही झांकी ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह समेत अन्य मंत्रियों ने ताली बजाकर स्वागत किया।
कर्तव्य पथ उस समय तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा जब पुरुष सीआरपीएफ टुकड़ी का नेतृत्व कर रही राजोरी की बेटी असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला ने मंच को सलामी दी। उन्होंने इस बात का अहसास कराया कि नारी शक्ति को सशक्त बनाने में जम्मू-कश्मीर की बेटियां किसी से कम नहीं हैं। पहली बार परेड में शामिल भारतीय सेना के जानवरों के दस्ते में लद्दाख का बैक्ट्रियन ऊंट, जांस्कर पोनी, रैप्टर (पक्षी) और कोल्ट्स (कुत्ते) सबसे अलग और खास रहे।
परेड में शामिल झांकी नटरंग को पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने बनाया था। इसमें प्रदेश के संपूर्ण क्षेत्र की हस्तकला और लोक नृत्यों को दर्शाया गया था। झांकी में एक तरफ पारंपरिक समोवर, कश्मीरी केतली और बारीक नक्काशीदार कलाकृतियों सहित प्राचीन कलाओं की भव्यता झलक रही थी। दूसरी तरफ रबाब, संतूर और बांसुरी की मधुर धुन गूंज रही थी। साथ में लोक नृत्य पेश करती कश्मीरी युवतियां सुनहरे विरासत की झलक दर्शा रही थीं।
लद्दाख की झांकी में लेह और कारगिल के कलाकारों की मंडली भी दिखी। सेना के जानवरों के दस्ते में शामिल माइनस 20 डिग्री में मुस्तैद रहने वाले बैक्ट्रियन ऊंट (दो कूबड़ वाले) और जांस्कर पोनी (लद्दाखी घोड़े) जो -40 डिग्री सेल्सियस तापमान और भारी बर्फबारी को आसानी से झेल लेते हैं उनके साथ ही रैप्टर (शिकारी पक्षी) और मुधोल हाउंड एवं रामपुर हाउंड के कुत्तों ने लद्दाख की धमक दिखाई।
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जम्मू। इस बार का गणतंत्र दिवस जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लिए खास रहा। कर्तव्य पथ पर दोनों प्रदेश की झलक और धमक देखने को मिली। जम्मू-कश्मीर का हस्तशिल्प एवं लोकनृत्य पर केंद्रित ‘नटरंग’ और लद्दाख के पर्वतीय क्षेत्रों के मनोरम दृश्य एवं जीवंत संस्कृति की झलक प्रदर्शित कर रही झांकी ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह समेत अन्य मंत्रियों ने ताली बजाकर स्वागत किया।
कर्तव्य पथ उस समय तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा जब पुरुष सीआरपीएफ टुकड़ी का नेतृत्व कर रही राजोरी की बेटी असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला ने मंच को सलामी दी। उन्होंने इस बात का अहसास कराया कि नारी शक्ति को सशक्त बनाने में जम्मू-कश्मीर की बेटियां किसी से कम नहीं हैं। पहली बार परेड में शामिल भारतीय सेना के जानवरों के दस्ते में लद्दाख का बैक्ट्रियन ऊंट, जांस्कर पोनी, रैप्टर (पक्षी) और कोल्ट्स (कुत्ते) सबसे अलग और खास रहे।
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परेड में शामिल झांकी नटरंग को पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने बनाया था। इसमें प्रदेश के संपूर्ण क्षेत्र की हस्तकला और लोक नृत्यों को दर्शाया गया था। झांकी में एक तरफ पारंपरिक समोवर, कश्मीरी केतली और बारीक नक्काशीदार कलाकृतियों सहित प्राचीन कलाओं की भव्यता झलक रही थी। दूसरी तरफ रबाब, संतूर और बांसुरी की मधुर धुन गूंज रही थी। साथ में लोक नृत्य पेश करती कश्मीरी युवतियां सुनहरे विरासत की झलक दर्शा रही थीं।
लद्दाख की झांकी में लेह और कारगिल के कलाकारों की मंडली भी दिखी। सेना के जानवरों के दस्ते में शामिल माइनस 20 डिग्री में मुस्तैद रहने वाले बैक्ट्रियन ऊंट (दो कूबड़ वाले) और जांस्कर पोनी (लद्दाखी घोड़े) जो -40 डिग्री सेल्सियस तापमान और भारी बर्फबारी को आसानी से झेल लेते हैं उनके साथ ही रैप्टर (शिकारी पक्षी) और मुधोल हाउंड एवं रामपुर हाउंड के कुत्तों ने लद्दाख की धमक दिखाई।